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बेतिया: बारिश के लिए ग्रामीणों ने कराई कृष्ण-रुक्मिणी की शादी, 1990 से चल रही परंपरा

1990 में जब इस क्षेत्र में बारिश नही हो रही थी और किसान बेहाल थे. तो लोगों ने जमुनिया में कृष्ण और रुक्मिणी की शादी हुई थी और उसके बाद जमकर बारिश हुई थी. 

बेतिया: बारिश के लिए ग्रामीणों ने कराई कृष्ण-रुक्मिणी की शादी, 1990 से चल रही परंपरा
बारिश नहीं होने पर ग्रामीण भगवान कृष्ण और रुक्मिणी की शादी कराते हैं.

बेतिया: बिहार के बेतिया के गौनाहा प्रखंड के जमुनिया पंचायत में बारश नहीं होने पर लोग अनोखी परंपरा को मानते हैं. बारिश नहीं होने पर ग्रामीण भगवान कृष्ण और रुक्मिणी की शादी कराते हैं. उनका मानना है कि कृष्ण-रुक्मिणी की शादी कराने से बारिश होती है. 

1990 में जब इस क्षेत्र में बारिश नही हो रही थी और किसान बेहाल थे. तो लोगों ने जमुनिया में कृष्ण और रुक्मिणी की शादी हुई थी और उसके बाद जमकर बारिश हुई थी. इस साल भी ग्रामीणों को बारिश होने की उम्मीद है.

 

फिर इधर हाल के दिनों में बारिश नहीं हो रही है और किसान परेशान है. दरअसल यह पहाड़ी और थारू बहुल गांव है इसलिए किसान बारिश पर ही निर्भर रहते हैं .1990 के बाद आज फिर 2019 में पंचायत के लोगो ने कृष्ण और रुक्मिणी की शादी बड़े धूम धाम से कराई.

गांव वाले कृष्ण और रुक्मिणी की शादी पूरे रीति-रिवाज के साथ कराते हैं. श्रीकृष्ण-रुक्मिणी का पुष्प वाटिका से हरण करते हैं. हरण में दो बालिकाएं होती है. एक कृष्ण और दूसरा रुक्मिणी, लवा भुजना, मटकोर, परछावन, माड़ो मंझका और तमाम रस्म पूरी की जाती. भारी संख्या में बाराती होते हैं. रथ पर कृष्ण और रुक्मिणी सवार रहते हैं.

यह एक परम्परा है और इस परंपरा में ग्रामीण भगवान से बारिश की मांग करते है और बारिश भी होती है. यहां के मुखिया सुनील गढ़वाल ने बताया कि 1990 में कृष्ण और रुक्मिणी की शादी हुई थी तो बारिश हुई थी अबकी बार फिर बारिश नही हो रही है तो आज शादी हुई है. 

इसे गांव वाले एक परम्परा मानते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि कार्यक्रम की शुरुआत होते ही आसमान में बादल छा गए और 1990 में भी यही हुआ था. देखने वाली बात ये होगी कि ग्रामीणों को बारिश से कब राहत मिलती है.