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झारखंड: लातेहार का एक लाचार गांव, नाला का पानी पीने को मजबूर गांव के लोग

ग्रामीणों का आरोप है कि जब वे प्रशासनिक अधिकारियों के पास शिकायत लेकर पहुंचते हैं तो सरकारी अफसर सीधे मुंह उनसे बात तक नहीं करते.

झारखंड: लातेहार का एक लाचार गांव, नाला का पानी पीने को मजबूर गांव के लोग
लातेहार के इस गांव में लोगों को पीने का साफ पानी तक नसीब नहीं.

लातेहार: एक तरफ सरकार समाज के हर तबके के लोगों को हर सुख-सुविधा देने का दावे करते नहीं थकती. वहीं, दूसरी तरफ अधिकारियों की लापरवाही की वजह से आज भी लातेहार के आदिवासी बहुल इलाका कुंजरूम गांव आज़ादी के 70 साल से ज्यादा बीत जाने के बाद भी विकास की बाट जोह रहा है. ऐसा नहीं है कि ग्रामीणों ने इसकी शिकायत ज़िले के सरकारी बाबुओं से नहीं की, लेकिन आज तक सिस्टम चलाने वाले अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगा.

जनता जनार्दन अफसर से शिकायत करते नहीं थकती, लेकिन अफसरों को कोई फर्क नहीं पड़ता. ग्रामीणों का आरोप है कि जब वे प्रशासनिक अधिकारियों के पास शिकायत लेकर पहुंचते हैं तो सरकारी अफसर सीधे मुंह उनसे बात तक नहीं करते. यहां तक की स्थानीय विधायकों से भी अफसर ठीक ढंग से बात नहीं करते हैं. ऐसे में समझा जा सकता है कि आम जनता के कैसा व्यवहार होता होगा? सरकार से लेकर विपक्ष सब वोट की जुगत में रहते हैं लेकिन जनता की चिंता किसे है?

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लातेहार सरकारी अधिकारियों की लापरवाही का नमूना मात्र ही है. गारू थाना इलाके के बारेसाढ़ से 16 किलोमीटर दूर मौजूद कुंजरूम गांव, जहां आज भी सरकारी सुविधा के नाम पर न कुछ भी नहीं है. इस गांव में न तो सड़क है और न ही बच्चों के पढ़ने के लिए कोई स्कूल. ऐसे में ग्रामीण अपनी समस्या कहे तो कहे किसे?

लातेहार के स्थानीय ग्रामीणों का कहना है, "हम आदिवासी के साथ आदिम जन जाति के लोग कई सालों से नाले के पानी पीने को मजबूर हैं. अधिकारी प्रखंड से लेकर जिला तक के चक्कर लगाते थक जाते हैं, लेकिन कोई हमारी बात नहीं सुनता."

गौरतलब है कि यह क्षेत्र जिले का अति नक्सल प्रभावित होने के साथ साथ अति पिछड़ा भी है. इस गांव में सैकड़ों ग्रामीण इस नाले से ही अपनी और अपने जानवरों की प्यास बुझाते हैं. ऐसे में बहुप्रतीक्षित विकास कब तक लातेहार के इस लाचार गांव तक पहुंचेगा, यह बताने वाला कोई नहीं है.

-- Rashmi Sharma, News Desk