बिहार में भीषण जलसंकट, बेतिया के इस गांव में बूंद-बूंद के लिए तरस रहे लोग

2018 में इन गांवों में सीएम नीतीश कुमार का दौरा था. जिला प्रशासन ने आनन-फानन में गांवों में जल-नल योजना को धरातल पर उतार दिया, लेकिन अचानक सीएम का कार्यक्रम रद्द हो गया. ग्रामीणों को पानी नहीं मिल सका. 

बिहार में भीषण जलसंकट, बेतिया के इस गांव में बूंद-बूंद के लिए तरस रहे लोग
बिहार में भीषण जलसंकट. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

बेतिया : बिहार के बेतिया के भीखना ठोड़ी गांव में पानी की एक-एक बूंद के लिए लोग तरस रहे हैं. बढ़ती गर्मी और तपती धूप में लोग प्यास से हलकान हो जाते हैं. पथरीली पहाड़ी नदियों के रास्ते दो किमी दूर यानी नेपाल के नदियों से लोग पीने के लिए पानी लाते हैं और प्यास बुझाते हैं.

एक तरफ पानी के एक-एक बूंद के लिए हहाकार मचा है वहीं, जिला प्रशासन मौन और उदासीन है. लगभग एक हजार की आबादी वाले गांव में जल नल की टंकी बनाई गई है. घर के हर दरवाजे पर नल भी लगाए गए हैं, लेकिन यह सिर्फ शोभा बढ़ा रहा है. नलों से पानी नहीं आ रहा है.

2018 में इन गांवों में सीएम नीतीश कुमार का दौरा था. जिला प्रशासन ने आनन-फानन में गांवों में जल-नल योजना को धरातल पर उतार दिया, लेकिन अचानक सीएम का कार्यक्रम रद्द हो गया. ग्रामीणों को पानी नहीं मिल सका. टंकी और नल शोभा की वस्तु बन गई है. शायद सीएम आए होते तो ग्रामीणों को पानी मुहैया हो गया होता. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

लगातार मिडिया में खबर आने के बाद गांव में एक पानी का टैंकर भेजा जा रहा है, जो कि नाकाफी है. जिला प्रशासन की उदासीनता को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है. पहाड़ी नदी से ग्रामीण दो किमी तपती धूप और भीषण गर्मी में पानी लेने जाते है. बच्चें, महिलाएं और पुरुष कई वर्षों से अभ्यासरत हो चुके हैं.

नदी भी सुख गई है. झरने का पानी है इतनी बड़ी नदी के गर्भ में दो फीट की चौड़ाई में छिछला होकर बह रहा है. ग्रामीण इसी से पानी भरते हैं. प्रशासन की उदासीनते से लोग उत्साहित हैं. सिर्फ एक टैंकर पानी से स्थायी निदान नहीं हो पा रहा है.

ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि सीएम नीतीश कुमार ने नल जल योजना की जांच के लिए कमेटी बनाई थी, तो वो कमेटी इन गांवों में आज तक क्यों नहीं पहुंची?