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पटना के कई इलाकों में 8वें दिन भी जारी है जलजमाव, नगर निगम, BUIDCO की खुली पोल

पांच हजार करोड़ के बजट वाले पटना नगर निगम और बुडको की लापरवाही का खामियाजा आज पटना को भुगतना पड़ रहा है. 

पटना के कई इलाकों में 8वें दिन भी जारी है जलजमाव, नगर निगम, BUIDCO की खुली पोल
पटना के कई इलाकों में फॉगिंग का काम भी जारी है.

पटना: भारी बारिश के ठीक आठ दिनों बाद पटना के कुछ हिस्सों से पानी उतरना शुरू हो गया है. कई इलाकों से पानी उतर गया है तो कुछ इलाके ऐसे भी हैं जहां जलजमाव की स्थिति बरकरार है. निगम ने फॉगिंग शुरू की है, लेकिन यह भी आधी-अधूरी है. आठ दिनों के जलजमाव ने स्थिति को और भयावह बना दिया है. हालांकि जलजमाव से फंसे लोगों को एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम अब भी निकालने में लगी है.

पांच हजार करोड़ के बजट वाले पटना नगर निगम और बुडको की लापरवाही का खामियाजा आज पटना को भुगतना पड़ रहा है. बीते शुक्रवार, शनिवार और रविवार की बारिश के बाद पटना के राजेन्द्र नगर में जो जलजमाव की स्थिति बनी हुई है वो अब भी बरकरार हैं. हालांकि राजेन्द्र नगर के आर्य कुमार रोड, मगध अस्पताल वाले इलाके में पानी उतरना शुरू हो गया है, लेकिन अब इस पानी से लोगों को डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का डर सताने लगा है.

इसी बीच पटना का राजेन्द्र नगर का दूसरा हिस्सा अब भी जलजमाव का सामना कर रहा है. यहां अब भी पांच फीट तक पानी चल रहा है. हालांकि यहां पानी एक फूट तक जरूर कम हुआ है, लेकिन इस हिस्से में रोड नंबर एक से लेकर दस तक लोग राहत का इंतजार कर रहे हैं. पुनपुन नदी के बढ़े जलस्तर ने भी लोगों की परेशानी बढ़ाई है. लोग अपार्टमेंट और घरों में पिछले आठ दिनों से कैद हैं. मुश्किल सबसे ज्यादा उन लोगों को हुई है जो बीमार हैं या बुजुर्ग हैं.

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम की तरफ से रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. आज सुबह एनडीआरएफ ने विमला नाम की बुजुर्ग को बोट से निकाला. बुजुर्ग महिला हार्ट पेशेंट हैं. एनडीआरएफ ने सूचना मिलने के बाद महिला को सुरक्षित एंबुलेंस तक पहुंचाया.

नगर निगम ने कुछ हिस्सों में फॉगिंग शुरू की है. इसी कड़ी में आज निगम की टीम राजेन्द्र नगर के धनुष ब्रीज के पास दिखाई दी, जहां जलजमाव में स्प्रे किया जा रहा है ताकि डेंगू, मलेरिया के मच्छर पैदा नहीं हो सके. हालांकि यहां भी तैयारी आधी अधूरी दिखाई दी, क्योंकि जिस टैंक के जरिए स्प्रे हो रहा उसका साइलेंसर काफी नीचे है, जो पांच फूट पानी में नहीं जा सकता है. इसमें काम कर रहे कर्मचारियों को साइलेंसर में पानी जाने और इंजन खराब होने का डर सता रहा है.

दरअसल, इस बारिश ने नगर निगम के साथ-साथ संप हाउस की निगरानी करने वाले बुडको की भी पोल खोल दी है. दोनों को ये लग रहा था कि बारिश आएगी, जल जमाव होगा और फिर जिंदगी जस की तस हो जाएगी. लेकिन शायद उसने ये कभी नहीं सोचा होगा कि राजेन्द्र नगर में आठ दिनों तक पानी जमा रहेगा और पूरे देश में उसकी किरकिरी होगी.