close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

बिहार: बिना प्रैक्टिकल के पास हो रहे साइंस के छात्र, कहीं उपकरण नहीं तो कहीं स्टाफ की कमी

 ये हालात बिहार के किसी दूसरे कॉलेज की नहीं बल्कि विज्ञान की पढ़ाई के लिए मशहूर पटना साइंस कॉलेज की भी है जहां हजारों छात्र बिना किसी ठोस प्रैक्टिकल ही पास कर गए.

बिहार: बिना प्रैक्टिकल के पास हो रहे साइंस के छात्र, कहीं उपकरण नहीं तो कहीं स्टाफ की कमी

पटना: बिहार के विश्वविद्यालयों में साइंस के छात्र बिना प्रैक्टिकल या दूसरे शब्दों में कहें तो आधे-अधूरे प्रैक्टिकल के ही परीक्षा पास कर रहे हैं. कई कॉलेज में प्रैक्टिकल के सामान ही नहीं हैं तो कुछ में अगर प्रैक्टिकल के उपकरण हैं तो फिर स्टाफ ही नहीं है. ये हालात बिहार के किसी दूसरे कॉलेज की नहीं बल्कि विज्ञान की पढ़ाई के लिए मशहूर पटना साइंस कॉलेज की भी है जहां हजारों छात्र बिना किसी ठोस प्रैक्टिकल ही पास कर गए.

विज्ञान के छात्रों के लिए प्रैक्टिकल कुछ उसी तरह जरूरी होता है जिस तरह जीने के लिए सांस. कल्पना कीजिए अगर रसायन, भौतिकी या फिर जूलॉजी के छात्र अगर बिना प्रैक्टिकल के ही डिग्री ले लें तो उनका करियर कैसे बनेगा और संवरेगा. बिहार में उच्च शिक्षा की लगातार सेहत बिगड़ती जा रही है और साइंस के हजारों छात्र बिना किसी प्रायोगिक यानि प्रैक्टिकल के बीएससी और एमएससी की डिग्री ले रहे हैं.

 

पटना यूनिवर्सिटी का मशहूर पटना साइंस क़ॉलेज जो अपनी पढ़ाई और रिसर्च के लिए पूरे उत्तर भारत में प्रसिद्ध था वहां के हालात जानकर आपको तरस आएगी. हालांकि कुछ डिपार्टमेंट में क्लास वर्क हो अच्छा हो रहा है लेकिन प्रैक्टिल के उपकरण, लैब और स्टाफ नहीं होने से छात्र और छात्राओं का खासा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

दरअसल पटना साइंस कॉलेज में साइंस की पढ़ाई शिक्षकों की कमी के बाद भी अच्छे तरीके से होती है. लेकिन साइंस में प्रैक्टिक्ल क्लास एक अहम रोल निभाती है. लेकिन डिपार्टमेंट ऑफ केमेस्ट्री,फिजिक्स,जूलॉजी और बॉटिनी में अधिकांश केमिकल खत्म हो चुके हैं,कुछ ही बाकी बचे हैं जिससे छात्र प्रैक्टिकल कर रहे हैं.आलमारी,मेज पर धूल की मोटी परत है.लैब की कुर्सियां और स्टूल टूटी फूटी है. डिपार्टमेंट ऑफ जूल़ॉजी में माइक्रोस्कोप, एथनॉल, जायलिन, स्केनिंग, मोनो पोटाशियम, सोडियम जैसे अहम रसायन नहीं है.

अगर बिहार के किसी भी साइंस कॉलेज में स्नातक,और पीजी के प्रैक्टिल रूम को नीट जैसी संस्था की टक्कर में लाना है तो इसके लिए करोड़ों रुपए की जरूरत है लेकिन पटना साइंस सहित कई दूसरे कॉलेजों को सालों से प्रैक्टिकल के लिए पैसे नहीं मिले हैं. हालांकि खबर ये है कि 60 लाख रुपए बिहार सरकार जल्द ही साइंस कॉलेज के लिए आवंटित करने वाली है.

दूसरी ओर पटना यूनिवर्सिटी ने कहा है कि उपकरण, लैब, पुस्तकालय को लेकर बिहार सरकार को चिट्ठी लिखी गई है और जल्द ही छात्रों की शिकायतें दूर होंगी. दूसरी ओर डिपार्टमेंट ऑफ जूलॉजी के विभागाध्यक्ष  प्रोफेसर अऱविंद खुद मानते हैं कि प्रैक्टिकल के लिए स्टाफ की कमी हैं और प्रयोगशाला इतनी सशक्त नहीं है कि यहां बच्चों का भविष्य साइंस के लिए बेहतर हो सके.हालांकि इन्होंने कहा है कि जो भी केमिकल है उससे ही काम चलाया जाएगा.