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गुमला: राज्य सरकार की इस योजना से महिलाओं को मिल रहा लाभ, दूर हो रही हैं मुश्किलें

झारखंड जोहार परियोजना के अंतर्गत लेयर पोल्ट्री फार्मिंग की शुरुआत की गई है. इस परियोजना से गुमला के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं आत्म निर्भर बन रही है.

गुमला: राज्य सरकार की इस योजना से महिलाओं को मिल रहा लाभ, दूर हो रही हैं मुश्किलें
झारखंड जोहार परियोजना के अंतर्गत लेयर पोल्ट्री फार्मिंग की शुरुआत की गई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

गुमला: झारखंड के गुमला में महिलाओं को सशक्त और स्वावलंबी बनाने में लेयर फार्मिंग कारगर साबित हो रहा है. लेयर फार्मिंग ग्रामीण विकास विभाग झारखंड सरकार द्वारा संचालित किया जा रहा है.

झारखंड जोहार परियोजना के अंतर्गत लेयर पोल्ट्री फार्मिंग की शुरुआत की गई है. इस परियोजना से गुमला के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाएं आत्म निर्भर बन रही है. 

इससे महिलाओं के लिए आय का एक स्रोत भी खुल गया है. महिलाएं ग्रामीण अंडा उत्पादक सहकारी समिति के तहत लेयर फार्मिंग के जरिए अंडे का उत्पादन कर रही है.

इन ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को पहले अपने घर गृहस्थी चलाने के लिए काफी कठिनाइयां होती थी. लेकिन अब जोहार परियोजना के तहत लेयर फार्मिंग से जुड़कर ये महिलाएं काफी खुश है. 
 
महिलाएं अब अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में भेजने में सक्षम हैं. आपको बता दें पूरे बसिया में कुल 300 लेयर शेड हैं. 

फिलहाल पशुपालन विभाग ने 600 शेड बनवाए है. इस कार्य में जिले की महिलाएं काफी तेजी से जुड़ कर स्वावलंबी बन रही हैं. 

महिलाओं का मानना है की पहले घर चलाने के लिए बड़ी कठनाई होती है, लेकिन अब हम अपने परिवार का अच्छा पालन-पोषण कर रहें है.

वहीं, गुमला से लगभग 36 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बसिया प्रखंड का तेतरा गांव इसका जीता जागता उदाहरण है. तेतराव बनई गांव संस्थान के कर्मचारी अखिलेश ने बताया की ये योजना बहुत अच्छी है. 

उन्होंने अपनी जमीन पर इस परियोजना के द्वारा दिए गए लेयर पोल्ट्री फार्म को स्थापित किया. जहां मुर्गी पालन एवं अंडा उत्पादन का काम किया जा रहा है. 

इस काम में उनके साथ गांव के ही कई परिवार भी जुड़े हुए हैं. वहीं, गुमला जिले के उपायुक्त शशिरंजन का कहना है कि आज महिलाओं ने तीन से चार हजार रुपए प्रति महीने कमाना शुरु कर दिया है. 

उन्होंने कहा कि ये क्षेत्र की गरीबी दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. साथ ही इस कार्य में उन्हें काफी सफलता हासिल हुई है.

आपको बता दें कि गोदाम में एक दिन में लगभग 6 से 7 हजार तक अंडे स्टोर किए जाते हैं. जिसके बाद उन अंडों को बसिया, भागीडेरा के कार्यालय में जमा कर दिया जाता है. फिर गांवों के सरकारी स्कूलों में संचालित मिड डे मील में उसकी आपूर्ति की जाती है.

Anupama  Kumari, News Desk