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NGT अध्यक्ष नियुक्तिः जेडीयू-एलजेपी के बाद NDA के एक और सहयोगी हुए नाराज

अनुसूचित जाति-जनजाति कानून पर फैसला देने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एके गोयल को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) अध्यक्ष बयाने जाने के बाद एनडीए के एक और घटक दल ने इस पर नाराजगी जताई है.

NGT अध्यक्ष नियुक्तिः जेडीयू-एलजेपी के बाद NDA के एक और सहयोगी हुए नाराज
फाइल फोटो

नई दिल्ली: अनुसूचित जाति-जनजाति कानून पर फैसला देने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एके गोयल को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) अध्यक्ष बयाने जाने के बाद एनडीए के एक और घटक दल ने इस पर नाराजगी जताई है. केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के मुखिया रामदास आठवले ने पूर्व जस्टिस एके गोयल को एनजीटी का अध्यक्ष बनाए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. आठवले ने कहा कि मैं एनडीए का हिस्सा होने के बावजूद जस्टिस गोयल को हटाने की मांग करता हूं. उन्होंने कहा कि 'जस्टिस गोयल ने SC-ST अधिनियम के मामले में गलत निर्णय दिया था. गोयल के इस फैसले से अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय में की भावनाएं आहत हुई हैं. एक्ट के प्रावधानों को कमजोर करने से दलितों में असंतोष और आक्रोश है.' आपको बता दें कि इससे पहले एलजेपी और जेडीयू के नेता इस मामले पर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं. 

 

 
पीएम के सामने उठाएंगे गोयल का मुद्दा- आठवले
केंद्रीय मंत्री आठवले ने कहा कि गोयल को एनजीटी का अध्यक्ष बनाए जाने का फैसला सही नहीं है. आठवले ने कहा कि गोयल को तत्काल पद से हटा देना चाहिए. उन्होंने कहा कि गोयल की नियुक्ति के मामले को वह जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष उठाएंगे. आरपीआई नेता ने यह भी कहा कि गोयल की नियुक्ति का कई दलित सांसद भी विरोध कर चुके हैं. गौरतलब है कि बिहार में बीजेपी की प्रमुख सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) ने भी जस्टिस गोयल के मामले पर सवाल उठाए थे. नरेंद्र मोदी नीत केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री रामविलास पासवान के बेटे और एलजेपी नेता चिराग पासवान ने कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के अध्यक्ष आदर्श कुमार गोयल को बर्खास्त किया जाना चाहिए, क्योंकि वह सुप्रीम कोर्ट की उस पीठ का हिस्सा थे जिसने दलितों और आदिवासियों पर अत्याचारों को रोकने के लिए बने कानून के प्रावधानों को कथित तौर पर कमजोर किया था. 

गोयल को तत्काल बर्खास्त करने की मांग
एलजेपी नेता चिराग ने कहा था कि गोयल को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम के वास्तविक प्रावधानों को बहाल किया जाना चाहिए. उन्होंने चेताया था कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो नौ अगस्त को दलित संगठनों का राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन दो अप्रैल को हुए आंदोलन से भी ज्यादा तीव्र हो सकता है. आपको बता दें कि कांग्रेस पार्टी ने भी पूर्व जस्टिस एके गोयल के खिलाफ अभियान चलाने का फैसला किया है. पार्टी ने अपने दलित सांसदों से यह कहा है कि वह इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाएं और इसको राज्यों में भी ले जाएं. कांग्रेस का आरोप है कि जस्टिस एके गोयल की सुप्रीम कोर्ट से रिटायरमेंट के अगले ही दिन उनको प्रभावशाली पद से नवाज दिया गया और यह सबकुछ जानबूझकर नरेंद्र मोदी सरकार ने किया यह दिखाता है कि सरकार उनके फैसले का समर्थन करती है.

कांग्रेस ने भी बोला हमला
कांग्रेस पार्टी ने यह भी तय किया है कि वह आगामी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान के चुनाव में भी जोर-शोर से इस मुद्दे को उठाएगी. साथ ही केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ इन तीनों ही राज्यों में दलितों को लामबंद करेगी और इस मुद्दे को देशभर में प्रचारित-प्रसारित करेगी. इसी रणनीति के तहत गुरुवार को लोकसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे और के सुरेश ने इस मुद्दे को उठाया था.