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'जन गण मन' अंग्रेजों के स्वागत के लिए लिखा गया... बीजेपी सांसद के बयान पर बवाल, कांग्रेस का तंज-एक और 'व्हाट्सएप इतिहास'

Jana Gana Mana BJP MP Sparks Row: उत्तर कन्नड़ बीजेपी सांसद विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी ने 'जन गण मन' को ब्रिटिश स्वागत गीत बताकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है.  कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने इसे 'आरएसएस व्हाट्सएप इतिहास' कहकर खारिज किया है. साथ ही जमकर तंज कसा है. जानें पूरी बात. 

'जन गण मन' अंग्रेजों के स्वागत के लिए लिखा गया... बीजेपी सांसद के बयान पर बवाल, कांग्रेस का तंज-एक और 'व्हाट्सएप इतिहास'

Karnataka BJP MP links national anthem to British: कर्नाटक के भाजपा सांसद और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष Vishweshwar Hegde Kageri अपने एक बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं. उन्होंने दावा किया कि भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ ब्रिटिशों के स्वागत के लिए लिखा गया था और उस समय ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान बनाए जाने की जोरदार मांग उठी थी. उनके इस बयान ने सियासी हलचल मचा दी है. 

विवाद की शुरुआत: क्या बोले बीजेपी सांसद कागेरी?
कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ से बीजेपी सांसद और पूर्व विधानसभा स्पीकर विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी ने एक कार्यक्रम में ऐसा बयान दिया, जिसने पूरे देश में हंगामा मचा दिया. होनावर के पुलिस परेड ग्राउंड पर तालुक प्रशासन द्वारा आयोजित 'राष्ट्रीय एकता यात्रा' में बोलते हुए उन्होंने कहा, "जन गण मन मूल रूप से ब्रिटिश का स्वागत करने के लिए लिखा गया गीत था." उन्होंने ये भी जोड़ा कि वंदे मातरम को राष्ट्रगान बनाने की लंबे समय से मांग चली आ रही है.  ये बातें उन्होंने 'आत्मनिर्भर भारत' पर जोर देते हुए कही. लेकिन सांसद ने साफ कहा कि वो इतिहास को दोहराना नहीं चाहते. फिर भी, उनके शब्दों ने लोगों को झकझोर दिया. सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं- क्या ये राष्ट्रगान का अपमान नहीं है?  

कांग्रेस का तीखा पलटवार: 'व्हाट्सएप हिस्ट्री' का तंज
कांग्रेस नेता और कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने इस मामले में जमकर तंज कसा है. उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, "एक और दिन, एक और आरएसएस 'व्हाट्सएप हिस्ट्री' का पाठ. कर्नाटक बीजेपी सांसद श्री कागेरी अब दावा कर रहे हैं कि हमारा राष्ट्रगान 'ब्रिटिश' है. बकवास."  खरगे ने आगे तथ्य दिए: "श्री टैगोर ने 1911 में भोरतो भग्यो विधाता नामक भजन लिखा, जिसका पहला छंद जन गण मन बना. ये 27 दिसंबर 1911 को कलकत्ता में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सेशन में गाया गया- किसी राजा के सम्मान में नहीं. टैगोर ने 1937 और 1939 में स्पष्ट किया कि ये भारत के भाग्य-विधाता की स्तुति है, न कि जॉर्ज पांचवें या किसी जॉर्ज की." 

RSS पर भी कसा तंज
खरगे ने बीजेपी-आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा, "मैं हर बीजेपी, आरएसएस नेता, कार्यकर्ता और स्वयंसेवक से अपील करता हूं कि इतिहास पढ़ें, खासकर आरएसएस के मुखपत्र ऑर्गनाइजर के संपादकीय. आरएसएस का संविधान, तिरंगे और राष्ट्रगान का अपमान करने का पुराना इतिहास है. इस वायरस को ठीक करने की जरूरत है." 

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krishna pandey

कृष्णा पांडेय, ज़ी न्यूज़ डिजिटल में चीफ सब-एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. वह राजनीति, अंतरराष्ट्रीय मामलों, क्राइम, और फीचर जैसे कई बीट्स पर काम करते हैं. इनकी खासियत है इन-डेप्थ एक्सप्लेनर और संवे...और पढ़ें

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