महाराष्ट्र फतह के मिशन पर BJP-शिवसेना, बैकफुट पर कांग्रेस-NCP

लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में बेहतर तालमेल रहे. जिन कार्यकर्ताओं के बीच स्थानीय स्तर पर नाराजगी है उन्हें एक मंच पर लाने के तैयारी चल रही है. हालांकि इस बैठक को अनौपचारिक बताया जा रहा है. 

महाराष्ट्र फतह के मिशन पर BJP-शिवसेना, बैकफुट पर कांग्रेस-NCP

मुंबई: लोकसभा चुनाव के नतीजों से बीजेपी-शिवसेना काफी उत्साहित है और महाराष्ट्र में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव (Maharashtra assembly election 2019) के लिए अभी से रणनीति बनाने में जुट गए हैं. सूत्रों का कहना है कि इस संदर्भ में शिवसेना-बीजेपी के नेताओं की बैठक हो चुकी है. लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में बेहतर तालमेल रहे. जिन कार्यकर्ताओं के बीच स्थानीय स्तर पर नाराजगी है उन्हें एक मंच पर लाने के तैयारी चल रही है. हालांकि इस बैठक को अनौपचारिक बताया जा रहा है. 

बीजेपी-शिवसेना बैठक की मुख्य बातें-:
- बीजेपी-शिवसेना के कार्यकर्ताओं में अच्छा तालमेल बढ़ाने की कोशिश.

-जिन विधायकों का प्रदर्शन अच्छा नहीं है, उनके टिकट काटे जाएं.

- जिस सीट पर शिवसेना का प्रभुत्व हो उसे शिवसेना को दिया जाए.

- जिस पर बीजेपी का प्रभुत्व हो वो सीट बीजेपी को दिया जाए.

- नाराज हुई कार्यकरताओं को मनाने की कोशिश की जाए.

- गठबंधन से संबंधित प्रश्न पर बिना पार्टी आलाकमान के निर्देश के नेता बात न करें.

- बीजेपी-शिवसेना के सीट शेयरिंग पर पार्टी के आलानेता ही बात करेंगे.

- सीट शेयरिंग पर शिवसेना-बीजेपी के आला नेता से बातचीत होने के बाद आखिरी फैसला मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और शिवसेना पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे लेंगे.  

लोकसभा चुनावों में दोनों दलों ने मिलकर चुनाव लड़े और शानदार सफलता हासिल की थी. राज्य की 48 लोकसभा सीटों में से भाजपा ने 23 सीटों पर कब्जा किया जबकि शिवसेना ने 18 सीटें हासिल की थी, यानी कुल मिलाकर दोनों दलों को 41 सीट मिली. मत प्रतिशत की बात करें तो भाजपा को कुल 27.6 फीसदी वोट प्राप्त हुए थे जबकि शिवसेना को 23.3 फीसदी वोट हासिल हुए थे. 

वहीं कांग्रेस तथा एआईएमआईएम और निर्दलीय उम्मीदवारों को एक सीट मिली थी, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस (एनसीपी) को चार सीटें हासिल हुईं थी. 2014 विधानसभा चुनावों की बात करें तो बीजेपी ने 122 सीटें हासिल की थी जबकि शिवसेना को महज 63 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था,

राज्य की 288 विधानसभा सीटों में से 226 विधानसभा सीटों पर बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को बढ़त मिली है, जबकि विपक्षी कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन ने 56 सीटों पर बीजेपी-शिवसेना गंठबंधन से ज्यादा वोट हासिल किया है. छह सीटों पर अन्य को बढ़त मिली है. 

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की बात करें, तो यहां की 36 सीटों में से 31 पर बीजेपी-शिवसेना गंठबंधन आगे रही. जबकि पांच सीटों पर महागठबंधन और दूसरे दलों को बढ़त हासिल हुई है.

शिवसेना ने लोकसभा चुनाव के पहले बीजेपी पर एक विपक्ष की तरह लगातार निशाना साधा, लेकिन चुनाव के ठीक पहले बीजेपी के साथ गठबंधन कर लिया. दोनों नेमिलकर जीत हासिल की और विधानसभा में साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है.

कुछ दिनो पहले बीजेपी कोटे से मंत्री चंद्रकांत पाटील ने बीजेपी-शिवसेना को महाराष्ट्र विधानसभा के 288 सीट में से 135-135 सीटों पर चुनाव लड़ने का फॉर्मूला दिया था. बाकी 18 सीटें सहयोगी दलों को देने का प्रस्ताव रखा था. 

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पहले ही कहा था कि बीजेपी के साथ सबकुछ अच्छा चल रहा है और गठबंधन नहीं टूटेगा. कोई कितना भी प्रयास करें यह गठबंधन नहं टूटेगा. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी लोकसभा चुनाव के पहले कहा था कि शिवसेना के साथ बीजेपी की दोस्ती लोकसभा और आगामी महाराष्ट्र विधानसभा में बनी रहेगी.

सूत्रों के मुताबिक चुनाव नतीजे के बाद भी बीजेपी और शिवसेना के नेताओं की एक अनौपचारिक बैठक हुई, उसमें आगामी विधानसभा चुनाव में लोकसभा की तरह प्रदर्शन दोहराने की बात की गयी.

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शिवसेना के राष्ट्रीय संगठक अखिलेश तिवारी के बताया, 'हमारा विधानसभा में गठबंधन का फॉर्मूला लगभग तय है. सही समय पर शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव  ठाकरे उस पर बात करेंगे. हमने आगामी विधानसभा की रणनीति पर चर्चे की शुरुवात की है. इस बार गठबंधन का प्रदर्शन अच्छा रहेगा.

बीजेपी के मंत्री गिरीश महाजन ने बताया, 'हमारे पार्टी अध्यक्ष ने पहले ही कह दिया है बीजेपी-शिवसेना साथ मे चुनाव लड़ेगी, हम अच्छा प्रदर्शन करेंगे. हमारी रणनीति कांग्रेस-एनसीपी से बेहतर होगी. लगातार काग्रेस-एनसीपी के कई विधायक संपर्क में हैं, जो कि बीजेपी में आना चाहते हैं. इस बार गठबंधन की ही सरकार बनेगी.

एनसीपी सांसद माजीद मेमन के मुताबिक विधानसभा चुनाव को लगभग 100 दिन बचे हैं, ऐसे मे बीजेपी-शिवसेना जानती है कि वे साथ मिलकर नहीं लड़े तो उनकी हालत खराब हो जाएगी. उन्हें सफलता नहीं मिलेगी. इस वजह से वे मिलकर रणनीति तय कर रहे हैं. विधानसभा में साथ चुनाव लड़ने की बात कह रहे हैं. 

राजनीतिक विश्लेषक राजू वेरनेकर के मुताबिक बीजेपी-शिवसेना का एक-दूसरे के साथ आना मजबूरी है. उनके विधानसभा चुनाव की रणनीति में हिंदुत्व मुद्दा अहम हो सकता है. सीटों को लेकर दोनों के बीच माथापच्ची जरूर हो सकती है.