Nehru removed Maa Durga stanzas from Vande Mataram: जहां एक तरफ पीएम मोदी पूरे देश में वंदे मातरम का सामूहिक गान करा रहे हैं. बीजेपी प्रवक्ता सीआर केसवन ने कांग्रेस को लेकर गंभीर दावा कर दिया है. केसवन ने कहा है कि 1937 में कांग्रेस अध्यक्ष नेहरू ने वंदे मातरम से मां दुर्गा की स्तुति वाले छंद हटवा दिए, ताकि मुस्लिम समुदाय नाराज न हो. जबकि नेता जी बोस इस पूरे गीत के पक्ष में थे. केसवन ने इसे कांग्रेस का सांप्रदायिक तुष्टिकरण बताया है.
Trending Photos
)
Vande Mataram 150 years of national song: आज वंदे मातरम गीत के 150 साल पूरे होने पर पूरे देश में उत्साह है. पीएम नरेंद्र मोदी सुबह इंदिरा गांधी स्टेडियम में इसका उद्घाटन करेंगे और लाखों लोग पूरे गीत का सामूहिक गान करेंगे. लेकिन इसी मौके पर बीजेपी ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला है. बीजेपी प्रवक्ता सीआर केसवान ने कहा है कि जवाहरलाल नेहरू ने जानबूझकर मां दुर्गा की प्रशंसा वाले छंद हटा दिए थे. इसको लेकर बीजेपी प्रवक्ता सीआर केसवान ने कांग्रेस पर वंदे मातरम गीत को तोड़-मरोड़ने का आरोप लगाते हुए नेहरू के पत्रों का हवाला भी दिया है.
It is imperative for our younger generation to know how the Congress party brazenly pandering to its communal agenda under the Presidentship of Nehru, adopted only a truncated Vande Mataram as the party’s national song in its 1937 Faizpur Session , while PM @narendramodi ji today… pic.twitter.com/13NBta11OV
— C.R.Kesavan (@crkesavan) November 7, 2025
कांग्रेस पार्टी ने अपने सांप्रदायिक एजेंडे को बढ़ाया
केसवान ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा, "कांग्रेस ने नेहरू के नेतृत्व में वंदे मातरम को काट-छांट कर लिया, जो राष्ट्र की एकता का प्रतीक था." इसके साथ ही केसवान ने कहा "हमारी युवा पीढ़ी के लिए यह जानना ज़रूरी है कि कैसे नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस पार्टी ने अपने सांप्रदायिक एजेंडे को बेशर्मी से आगे बढ़ाते हुए, 1937 के फैज़पुर अधिवेशन में पार्टी के राष्ट्रीय गीत के रूप में केवल एक संक्षिप्त वंदे मातरम को अपनाया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी आज 150वें वर्ष के स्मरणोत्सव का उद्घाटन करेंगे और पूरे देश में हमारे गौरवशाली वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण के सामूहिक गायन में भाग लेंगे."
We mark 150 years of Vande Mataram, a song that has inspired generations to rise for the nation. Addressing a programme in Delhi. https://t.co/qQqjgmSXy5
— Narendra Modi (@narendramodi) November 7, 2025
केसवान ने अपने पोस्ट में आगे कहा "शानदार वंदे मातरम हमारे राष्ट्र की एकता और एकजुटता की आवाज़ बन गया, जिसने हमारी मातृभूमि का सम्मान किया, राष्ट्रवादी भावना का संचार किया और देशभक्ति को बढ़ावा दिया. अंग्रेजों ने इसे गाना एक आपराधिक कृत्य घोषित कर दिया था. यह किसी विशेष धर्म या भाषा से संबंधित नहीं था. लेकिन कांग्रेस ने इस गीत को धर्म से जोड़ने का ऐतिहासिक पाप और भूल की. नेहरू के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने धार्मिक आधार पर जानबूझकर वंदे मातरम के उन छंदों को हटा दिया, जिनमें देवी माँ दुर्गा का गुणगान किया गया था,"
नेहरू का फैसला: दुर्गा छंद क्यों हटे?
वंदे मातरम बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का लिखा गीत है, जो 1882 के उपन्यास आनंदमठ से लिया गया. यह गीत ब्रिटिश राज के खिलाफ आजादी की आवाज बना. लेकिन इसमें मां दुर्गा, लक्ष्मी जैसी देवियों का जिक्र है, जिसे कुछ लोग धार्मिक मानते थे. 1937 के फैजपुर कांग्रेस सत्र में नेहरू कांग्रेस अध्यक्ष थे. वहां सिर्फ पहले दो छंद अपनाए गए, बाकी हटा दिए. केसवान ने नेहरू के नेताजी सुभाष चंद्र बोस को लिखे पत्रों का हवाला दिया है. 1 सितंबर 1937 के पत्र में नेहरू ने कहा कि गीत को देवी से जोड़ना बेतुका है. 20 अक्टूबर को उन्होंने लिखा कि गीत का बैकग्राउंड मुसलमानों को चिढ़ा सकता है. नेताजी पूरे गीत के पक्ष में थे, लेकिन नेहरू ने इसे 'सांप्रदायिक' बता काट दिया. केसवान ने इसे 'ऐतिहासिक पाप' कहा, क्योंकि गीत किसी धर्म या भाषा का नहीं, बल्कि मातृभूमि की एकता का प्रतीक था. ब्रिटिश इसे गाने पर अपराध मानते थे, लेकिन कांग्रेस ने इसे धर्म से जोड़ दिया.
राहुल पर निशाना: हिंदू विरोधी मानसिकता
केसवान ने नेहरू की आलोचना को राहुल गांधी से जोड़ा. कहा, 1937 में नेहरू ने दुर्गा का जिक्र मिटाया, तो मार्च 2024 में राहुल ने कहा 'हिंदू धर्म में शक्ति शब्द है, हम शक्ति से लड़ रहे हैं.' हाल ही में छठ पूजा को 'ड्रामा' कहकर करोड़ों भक्तों की भावनाएं आहत कीं. केसवान बोले, "नेहरू की हिंदू विरोधी सोच राहुल में गूंज रही है." बीजेपी का कहना है कि युवाओं को यह इतिहास जानना चाहिए, ताकि राष्ट्रवाद की असली भावना समझ आए.