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जम्‍मू-कश्‍मीर: अमरनाथ यात्रा के बाद फि‍र सरकार बनाने की कोशिश करेगी BJP

जम्मू एंड कश्मीर से आ रही खबरों के अनुसार, जल्द ही राज्यपाल एनएन वोहरा की जगह नई नियुक्ति हो सकती है.

जम्‍मू-कश्‍मीर: अमरनाथ यात्रा के बाद फि‍र सरकार बनाने की कोशिश करेगी BJP
एक बार फिर जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने की कोशिश करेगी BJP (प्रतीकात्मक तस्वीर)

रवीन्द्र कुमार, नई दिल्ली: ऐसा लग रहा है कि जम्मू-कश्मीर में महबूबा मुफ्ती की सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद बीजेपी एक बार फिर इस राज्य की सत्ता पर काबिज होने की कोशिश कर रही है. जी मीडिया को सूत्रों से मिली जानकारी यह बता रही है कि बीजेपी अमरनाथ यात्रा के बाद राज्य में फिर से सरकार बनाने की कोशिश कर सकती है. सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, जल्द ही राज्य का राज्यपाल भी बदला जा सकता है. उम्मीद की जा रही है कि बीजेपी, पीडीपी और निर्दलीय के सहयोग से फिर से सरकार बनाने की कोशिश करेगी. आपको बता दें कि बीजेपी ने मंगलवार 19 जून को पीडीपी से गठबंधन तोड़ लिया था जिस वजह से जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगाना पड़ गया था.

आपको बता दें कि बीजेपी नेता राम माधव और दूसरे नेताओं ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए जम्मू-कश्मीर में गठबंधन तोड़ने का एलान किया था. राम माधव ने उस वक्त कहा था कि जिन उद्देश्यों को लेकर बीजेपी ने पीडीपी के साथ मिलकर राज्य में गठबंधन की सरकार बनाई थी, वह पूरी नहीं हुई. इसलिए अब बीजेपी, जम्मू-कश्मीर में पीडीपी से समर्थन वापस ले रही है. प्रेस कांफ्रेस के दौरान बीजेपी नेता ने कहा था कि घाटी में हालात खराब हैं. कश्मीर में कट्टरता बढ़ गई है.

बीजेपी कर सकती है कोशिश
जम्मू कश्मीर में अभी राज्यपाल शासन है, लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से सरकार बनाने की संभावना खत्म नहीं हुई है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बीजेपी को अमरनाथ यात्रा के समापन का इंतजार है. यहां आपको यह भी बता दें कि 26 अगस्त को अमरनाथ यात्रा का समापन हो रहा है. बीजेपी आला सूत्रों के मुताबिक बीजेपी जल्द जम्मू कश्मीर में सरकार बनाने की कोशिश कर सकती है. भले ही बीजेपी के पास अभी संख्या बल नहीं है, लेकिन सूत्रों की मानें तो बीजेपी जल्द बहुमत के लिए कोशिश कर सकती है.

इसलिए मजबूत हुए बीजेपी के मंसूबे
बीजेपी सूत्र के मुताबिक पीडीपी से नाराज चल रहे पूर्व वित्त मंत्री हासिब द्राबू समेत कई विधायक बीजेपी के राज्य नेताओं से संपर्क में हैं. सूत्रों के अनुसार लगभग एक दर्जन पीडीपी विधायक चाहते हैं कि बीजेपी के साथ सरकार चले. इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के कुछ निर्दलीय विधायक भी बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने के पक्ष में हैं. सूत्रों के अनुसार 5 निर्दलीय विधायक और कांग्रेस के तीन विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं. जम्मू कश्मीर में बहुमत के लिए 44 विधायक चाहिए. बीजेपी के पास 25 विधायक हैं. ऐसे में बीजेपी को बहुमत के लिए और 19 विधायक चाहिए. हालांकि बीजेपी के रणनीतिकारों का मानना है कि जब वो सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे तो उनके पास बहुमत से ज़्यादा संख्या होनी चाहिए. 

मिशन 2019 के लिए जरूरी है यह कदम
बीजेपी की रणनीतिकारों का मनाना है कि अगर उनका मुख्यमंत्री बनेगा तो लोकसभा चुनाव में बीजेपी को इसका फायदा मिलेगा. जम्मू-कश्मीर की 6 लोकसभा सीटों में से फिलहाल बीजेपी और NDA के पास 3 सांसद हैं. फिलहाल जो हालात हैं उसमें कम से कम 2 सीट का नुकसान बीजेपी को 2019 में हो सकता है. इसलिए भी पार्टी चाहती है कि सरकार बनाकर अपने समर्थकों और जनाधार को वापस लाया जाए. बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि पीडीपी के साथ गठबंधन की सरकार के कारण जम्मू और लद्दाख क्षेत्र का विकास हुआ नहीं था जिस कारण बीजेपी का कार्यकर्ता में नाराजगी थी. लेकिन अब अगर बीजेपी का मुख्यमंत्री बनता है तो जम्मू और लद्दाख क्षेत्रों पर फोकस रहेगा. इसके अलावा प्रदेश के राज्यपाल को भी बदले जाने की संभावना है. किसी राजनीतिक व्यक्ति को राज्यपाल बनाया जा सकता है. सूत्रों के अनुसार इस महीने के अंत तक नए राज्यपाल की नियुक्ति भी हो सकती है.

अमित शाह का जम्मू दौरा था महत्वपूर्ण
गौरतलब है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह गठबंधन टूटने के बाद 23 जून को जम्मू गए थे. वहां जम्मू-कश्मीर बीजेपी के विधायकों से मिले भी थे और आगे की रणनीति पर चर्चा भी की थी. बीजेपी आला सूत्रों के अनुसार पार्टी जल्द जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने की कोशिश कर सकती है. उम्मीद है कि संसद के मानसून सत्र के आसपास से इस ऑपरेशन को शुरू किया जाएगा और अमरनाथ यात्रा के समापन तक बीजेपी अपने ऑपरेशन को अंजाम दे देगी. 

ये है ताजा हाल
बता दें कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल सीटों की संख्या- 89 है. सरकार बनाने के लिए किसी भी दल को 44 सीटों का बहुमत चाहिए. मौजूदा समय में पीडीपी के पास 28 और भाजपा के खाते में 25 सीटें हैं. वहीं विपक्ष की बात करें तो नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 15 सीटें, कांग्रेस- 12 और अन्य के खाते में 9 सीटें हैं.