Advertisement
trendingNow13074829

बीएमसी चुनाव: बहुमत में तो कभी नहीं आई शिवसेना, पर आज उद्धव ठाकरे को चुभ रही 'बिग ब्रदर' की हैसियत

बीएमसी चुनाव में आज वोटिंग का दिन है. फैसला 16 जनवरी यानी कल आएगा. उद्धव ठाकरे के लिए पार्टी को बचाने की निर्णायक लड़ाई है. कभी ठाकरे परिवार के दबदबे वाली बीएमसी में पिछले तीस सालों में जो कुछ हुआ, आज उद्धव को सारी बातें याद आ रही होंगी. इसमें 'बिग ब्रदर' की हैसियत उन्हें सबसे ज्यादा चुभ रही होगी जो पहले जूनियर था लेकिन बाद में पार्टी को ही चुनौती दे बैठा.  

बीएमसी चुनाव: बहुमत में तो कभी नहीं आई शिवसेना, पर आज उद्धव ठाकरे को चुभ रही 'बिग ब्रदर' की हैसियत

वैसे तो भाजपा का गठबंधन भी भारत के सबसे अमीर नगर निगम पर फतह के लिए जोर लगा रहा है लेकिन कोई और है जिसके लिए यह अग्निपरीक्षा है. जून 2022 में पार्टी के विभाजन के बाद यह तीसरी चुनावी फाइट है. करीब तीन दशक से लगातार शिवसेना मुंबई पर राज करती आई है. बीएमसी का मतलब ही शिवसेना बन चुका था. ऐसे में 2017 के बाद होने जा रहे इस हाई प्रोफाइल चुनाव पर देश की नजरें हैं क्योंकि अब शिवसेना दो हिस्सों में बंट चुकी है. उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे दोनों अपनी शिवसेना को सही और असली साबित करने के लिए यह निर्णायक लड़ाई जीतना चाहेंगे. 

उद्धव ठाकरे इस चुनाव की अहमियत समझते हैं शायद इसीलिए उन्होंने अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन हासिल करने के लिए सबसे पहले परिवार को एकजुट करने की सोची. महाराष्ट्र में दशकों से बाल ठाकरे का ही नाम बोलता है. शिंदे भी ठाकरे की तस्वीर लेकर अपनी सियासत चमका रहे हैं. आज भी सोशल मीडिया के प्रोफाइल में उन्होंने बैकग्राउंड में ठाकरे को लगा रखा है. ऐसे में उद्धव के सामने चुनौती बड़ी है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) ने मराठी वोटों को एकसाथ लाने के लिए चचेरे भाई राज ठाकरे के साथ गठबंधन किया है. राज ने नवंबर 2005 में शिवसेना से अलग होकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) बना ली थी. हालांकि इतने से ही बीएमसी में जीत की गारंटी नहीं मिल जाती. उद्धव की सबसे बड़ी चुनौती वो जूनियर है जो आज 'बिग ब्रदर' बनकर सामने खड़ा है.  

बीएमसी का चुनाव इतना अहम क्यों?

Add Zee News as a Preferred Source

- ग्रेटर मुंबई नगर निगम के तौर पर इसे 1873 में स्थापित किया गया. 
- 1931 में प्रेसिडेंट की जगह बीएमसी चीफ को मेयर कहा जाने लगा. 
- आजादी के बाद 1948 में वयस्क मताधिकार के आधार पर बीएमसी में पहले चुनाव हुए. 
- 1972 में बीएमसी ने मराठी को आधिकारिक भाषा के तौर पर स्वीकार किया. 
- 1991 में सीटों की संख्या 221 पहुंची. 1992 और 1997 में चुनाव कराए गए
- 2002 में सीटें 227 हुईं. इसका वार्षिक बजट कई छोटे राज्यों से भी ज्यादा है.  

fallback

उद्धव शिवसेना की चुनौती

-  मुंबई ही नहीं, पूरे देश में यह धारणा है कि बीएमसी का मतलब शिवसेना है लेकिन कम लोग जानते होंगे कि ठाकरे पार्टी ने अपने दम पर कभी बहुमत हासिल नहीं किया. शिवसेना ने हमेशा गठबंधन से ही नगर निगम की सरकार चलाई है. 
- इसने 1985 में चुनाव जीता था और 170 में से 74 सीटें मिलीं. तब पार्टी ने 140 सीटों पर चुनाव लड़ा था. 
- अविभाजित शिवसेना का सबसे जबर्दस्त प्रदर्शन 1997 में दिखा जब शिवसेना ने 221 में 103 सीटें जीत लीं. 
- इसके बाद ग्राफ गिरने लगा और 100 से नीचे आ गया. 2012 में 75 सीटें मिली थीं. 
- 2017 में यह 84 सीटों पर आकर सिमट गई. 
- 2019 के विधानसभा चुनाव में संयुक्त शिवसेना ने 16 प्रतिशत वोट हासिल किए थे. पांच साल बाद दोनों गुटों को मिलाकर 20 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले. इसमें शिंदे ग्रुप को ज्यादा 12 प्रतिशत और उद्धव गुट को 10 प्रतिशत मिले थे. इस बार उद्धव चाहेंगे कि बीएमसी में शिंदे ग्रुप से ज्यादा वोट अपने साथ खींचा जाए. 

fallback

भाजपा का बढ़ना

हां, शिवसेना के साथ अलायंस में जूनियर के तौर पर शामिल हुई भाजपा लगातार बढ़ती गई. 2014 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में वह 'बिग ब्रदर' बन गई. बीएमसी चुनाव में भी वह पहले 20-30 सीटें निकाल रही थी लेकिन 2017 में यह 82 के आंकड़े पर पहुंच गई. तब यह शिवसेना से केवल 2 सीटें पीछे थी. इस बार के चुनाव में भाजपा शिंदे सेना की मदद से पहली बार बीएमसी पर कब्जा करना चाहती है. आसान नहीं है लेकिन पहले से कम मुश्किल है. इसका मैसेज बड़ा होगा- ठाकरे अब भाजपा के लिए किसी भी तरह से चुनौती नहीं हैं.  

Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Zee News Hindi पर. Hindi News और India News in Hindi के लिए जुड़े रहें हमारे साथ.

About the Author
author img
Anurag Mishra

अनुराग मिश्र ज़ी न्यूज डिजिटल में एसोसिएट न्यूज एडिटर हैं. वह दिसंबर 2023 में ज़ी न्यूज से जुड़े. देश और दुनिया की राजनीतिक खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं. इससे पहले नवभारत टाइम्स डिजिटल में शाम की श...और पढ़ें

TAGS

Trending news