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Mumbai Joint Ownership Tax Case: मुंबई की एक महिला को बॉम्बे हाईकोर्ट से टैक्स नोटिस मामले में बड़ी राहत मिली है. मामला 6.75 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी डील से जुड़ा है, जिसमें महिला को अपने पति के साथ ज्वाइंट ओनरशिप बनाया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक, हाईकोर्ट ने मुंबई की महिला को जारी टैक्स नोटिस को खारिज कर दिया. आर्थिक टाइम्स वेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरी रकम पति के पैसों से दी गई थी. जबकि महिला एक हाउस वाइफ हैं और उनकी सालाना आमदनी सिर्फ 4.36 लाख रुपये है. उन्होंने इस प्रोपर्टी में कोई आर्थिक योगदान नहीं किया था. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने टैक्स चोरी की आशंका में पति-पत्नी दोनों को नोटिस भेजा था. हालांकि, हाईकोर्ट ने अब महिला का नोटिस रद्द कर दिया, जबकि पति का मामला अभी लंबित है.
यह मामला तब सामने आया जब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने संभावित कर चोरी का आरोप लगाया और पति-पत्नी दोनों को आयकर अधिनियम की धारा 148 के तहत नोटिस भेजे. 4 अगस्त, 2025 के अदालती आदेश के मुताबिक, प्रोपर्टी के दस्तावेजों में पत्नी का नाम सिर्फ सुविधा के लिए जोड़ा गया था. रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक स्टेटमेंट से पुष्टि हुई है कि पति ने पूरी राशि अपने एचडीएफसी बैंक खाते से चुकाई थी.
अदालत ने सुनवाई के दौरान कल्पिता अरुण लांजेकर बनाम आईटीओ (2024) मामले में अपने पहले के फैसले का हवाला दिया. इसमें एक गैर-योगदानकर्ता ज्वाइंट ओनरशिप को जारी इसी तरह का नोटिस कैंसिल कर दिया गया था. जस्टिस बी.पी. कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पी. पूनीवाला ने कहा कि पत्नी के मामले में कोई भी इनकम आकलन से नहीं बची थी और सभी पेमेंट डिटेल्स उसके पति से जुड़े थे. उन्होंने सवाल किया कि साफ सबूतों के बावजूद आकलन करने वाले अफसर ने उसे क्यों निशाना बनाया.
एक्सपर्टिस ने बताया कि अगर ज्वाइंट प्रोपर्टी का दस्तावेजीकरण ठीक से नहीं किया गया तो यह इनकम टैक्स अथॉरिटी के लिए खतरे की घंटी हो सकती है. चार्टर्ड अकाउंटेंट डॉ. सुरेश सुराना ने ईटी वेल्थ को बताया कि परचेज डीड में हर एक को-ओनर के वित्तीय योगदान और ओनरशिप परसेंटेज का जिक्र होना चाहिए. बैंक ट्रान्सफर, रसीदें और समझौतों का सही रिकॉर्ड रखा जाना चाहिए. सीए आशीष करुंडिया ने गिफ्ट या लोन के रूप में किए गए योगदान का दस्तावेजीकरण करने और हर एक शख्स के इनक टैक्स रिटर्न में आय का सही हिस्सा दर्शाने की सलाह दी.