चीन-पाकिस्तान में ब्रह्मोस- सुखोई 30 MKi के 'किलर कॉम्बो' का खौफ, टेंशन में इमरान

ब्रह्मोस और सुखोई 30 MKi के कॉम्बिनेशन से इमरान ख़ान और बाजवा का ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है. 

चीन-पाकिस्तान में ब्रह्मोस- सुखोई 30 MKi के 'किलर कॉम्बो' का खौफ, टेंशन में इमरान
ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल अब ब्रह्मास्त्र बन चुकी है. समंदर से युद्ध में ब्रह्मोस सिकंदर साबित हुई.

नई दिल्ली: ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल (Brahmos supersonic cruise missile) अब ब्रह्मास्त्र बन चुकी है. समंदर से युद्ध में ब्रह्मोस सिकंदर साबित हुई. ज़मीन पर वार करने में ब्रह्मोस का कोई सानी नहीं और अब आसमान में सिर्फ ब्रह्मोस का ही राज चलेगा. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 17 दिसंबर को ओडिशा तट से हवा में मार करने वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया. ये परीक्षण इसलिए ख़ास है क्योंकि ब्रह्मोस का परीक्षण सुखोई 30 MKi से किया गया. ब्रह्मोस और सुखोई का साथ साथ ये फाइनल टेस्ट था. ब्रह्मोस और सुखोई 30 MKi के कॉम्बिनेशन से इमरान ख़ान और बाजवा का ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है क्योंकि अब ब्रह्मोस पहले से कहीं ज़्यादा घातक और ख़तरनाक हो चुकी है. 

इसी हफ्ते एक अद्भुत, असाधारण मिलन हुआ जिसने देश के दुश्मनों का हमेशा-हमेशा के लिए ब्लड प्रेशर बढ़ा दिया है क्योंकि अब एक बार में 3200 किलोमीटर की उड़ान भरने वाले सुखोई 30 MKI फाइटर जेट को आवाज़ की रफ्तार से 3 गुना तेज़ स्पीड से हमला करने वाले ब्रह्मोस का साथ मिल गया. एक ऐसा किलर कॉम्बिनेशन जो दुश्मनों की मौत की गारंटी है. वैसे तो भारतीय सेना और ब्रह्मोस का रिश्ता 21 वर्ष पुराना है लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब Sukhoi 30MKI फाइटर जेट से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल दागी गई. 

सुनने में आपको ये एक सामान्य परीक्षण जैसा लग सकता है लेकिन सुखोई और ब्रह्मोस का मारक संयोजन क्या कर सकता है और कैसी तबाही ला सकता है. ये समझने के लिए उसे क़रीब से जानना और पहचानना होगा. भारत का सुखोई फाइटर प्लेन वाला सपना साल 2002 में साकार हुआ था जो आज की तारीख में ना सिर्फ बेहद आधुनिक फाइटर प्लेन है बल्कि भारत की सुरक्षा के लिहाज़ से किसी ब्रह्मास्त्र से कम नहीं है. 

सुखोई और ब्रह्मोस का डेडली कॉम्बिनेशन सबसे पहली बार 22 नवंबर 2017 को टेस्ट किया गया था. निशाना पूरी तरह सटीक समंदर में खड़े टारगेट को सुखोई से दागी गई ब्रह्मोस मिसाइल ने पलभर में तबाह कर दिया. दूसरी बार 22 मई 2019 तो सुखोई और ब्रह्मोस का टेस्ट किया गया. अबकी बार टारगेट ज़मीन पर था. लक्ष्य का हश्र वही हुआ जो समंदर में हुआ था. तीसरी बार 17 दिसंबर 2019 को सुखोई और ब्रह्मोस का टेस्ट किया गया और इस टेस्ट को साथ ही सुखोई और ब्रह्मोस की इंटिग्रेशन प्रक्रिया पूरी हुई. 

भारतीय सेना अपनी ब्रह्मोस मिसाइलों को सुखोई 30 mki की शान की सवारी कराने की योजना पर कई वर्षों से काम कर रही थी. आखिरकार तमाम टेस्टिंग के बाद अब वो लम्हा आ गया है. जब दुनिया की सबसे तेज़ सुपसोनिक मिसाइलों में एक ब्रह्मोस का सुखोई 30 mki के साथ मिलकर ब्रम्हास्त्र बन चुकी है. ब्रह्मोस को अबतक जमीन पर मौजूद लॉन्चर्स और समंदर के युद्धपोतों से छोड़ा जाता था लेकिन अब एयरफोर्स के शानदार लड़ाकू विमान सुखोई 30 एमकेआई की मदद से ब्रह्मोस को हवा से लॉन्च करने की आज़ादी मिल गई है. 

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ब्रह्मोस एक क्रूज मिसाइल है जो बिना पायलट वाले लड़ाकू विमान की तरह होगी. इसे किसी भी ऐंगल से हमले के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है और ये ज़मीन की सतह से काफी पास उड़ती हैं जिससे दुश्मनों के रडार इसे पकड़ नहीं पाते. ब्रह्मोस अपनी तेजी से दुश्मन को चकमा दे सकती है तो दूसरी तरफ इस मिसाइल को सुखोई की रेंज का भी फायदा मिलेगा. यानी आप ये भी कह सकते हैं अब एक ऐसी Air Launched ब्रह्मोस तैयार होगी. जो देश के दुश्मनों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन सकती है.

(दिल्ली से रूफ़ी ज़ैदी के साथ मुंबई ब्यूरो की रिपोर्ट, ज़ी मीडिया‌)