अगर आपको लगता है कि Lockdown से कुछ नहीं होगा, तो फिर यह पढ़िए

ब्रिटेन में हाल ही में हुए एक अध्ययन से यह साबित होता है कि लॉकडाउन से कोरोना की रफ्तार को काबू में किया जा सकता है.

अगर आपको लगता है कि Lockdown से कुछ नहीं होगा, तो फिर यह पढ़िए
फाइल फोटो

लंदन: यदि आपको लगता है कि कोरोना से मुकाबले के लिए लॉकडाउन कारगर हथियार नहीं है, तो फिर आप गलत हैं. ब्रिटेन में हाल ही में हुए एक अध्ययन से यह साबित होता है कि लॉकडाउन से कोरोना की रफ्तार को काबू में किया जा सकता है. कोरोना से बचाव के लिए यह बेहद जरूरी है कि इसकी गति धीमी की जाए, इसलिए लॉकडाउन आवश्यक है. नए COVID-19 लक्षणों को ट्रैक करने वाले ऐप का उपयोग करके ब्रिटेन ने 20 लाख लोगों का डेटा एकत्र किया है. जिससे यह पता चलता है कि लॉकडाउन जैसे उपाय वायरस के प्रसार को धीमा कर रहे हैं. 

किंग्स कॉलेज ऑफ लंदन के वैज्ञानिकों के मुताबिक, ब्रिटेन में रिपोर्ट किये गए नए कोरोनो वायरस लक्षणों की दर पिछले कुछ दिनों में काफी धीमी हो गई है. ताजा आंकड़े बताते हैं कि यहां 20 से 69 वर्ष की आयु के लगभग 14 लाख लोगों में COVID-19 के लक्षण हैं, जबकि 1 अप्रैल को यह संख्या 19 लाख थी. क्योंकि कुछ लोग ठीक हो गए हैं और कम लोगों में नए लक्षण देखने को मिल रहे हैं. नए लक्षणों में गिरावट से पता चलता है कि हालांकि अस्पताल में भर्ती होने वाले COVID-19 रोगियों और मरने वालों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन यदि सोशल डिस्टेंसिंग जैसे उपायों को लागू रखा जाता है, तो अगले दो सप्ताह में इसमें कमी आ सकती है. 

आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि ब्रिटेन में COVID-19 से मरने वालों की संख्या सात हजार के पार निकल गई है. महामारी की चपेट में आने वाले कई अन्य देशों की तरह ब्रिटेन ने भी लॉकडाउन को गंभीरता से लिया है. यहां स्कूल-कॉलेज से लेकर दुकानों तक सब कुछ बंद है. इसके अलावा, सोशल डिस्टेंसिंग पर भी जोर दिया जा रहा है. सरकार द्वारा लगातार लोगों से घरों में रहने की अपील की जा रही है.

उम्मीद जगाते हैं आंकड़े
सिम्प्टम ट्रैकर डेटा का विश्लेषण करने वाली किंग्स कॉलेज ऑफ लंदन की टीम के प्रमुख टिम स्पेक्टर ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, ‘ये संकेत उत्साहवर्धक हैं. भले ही अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों और मृतकों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन अध्ययन में सामने आए आंकड़े एक उम्मीद जगाते हैं’. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लंदन, बर्मिंघम, ग्लासगो और लिवरपूल जैसे ब्रिटेन के बड़े शहरों में समुदाय में कोरोना के लक्षणों का स्तर बहुत अधिक है. वहीं, लंदन के मेयर सादिक खान का कहना है कि ब्रिटेन लॉकडाउन में राहत देने की स्थिति में बिलकुल भी नहीं है, क्योंकि COVID-19 का प्रकोप अपने चरम पर है और इसके एक सप्ताह से अधिक समय तक ऐसे ही रहने की आशंका है. 

मई तक बढ़ेगा लॉकडाउन? 
लॉकडाउन के सकारात्मक परिणामों के आसार के बीच ब्रिटेन लॉकडाउन की अवधि को बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. जिस तरह के संकेत मिल रहे हैं, उनके मुताबिक लॉकडाउन को मई तक बढ़ाया जा सकता है. हालांकि, अभी इस पर अंतिम फैसला होना बाकी है. अधिकारी इस संबंध में ज्यादा कुछ कहने से बच रहे हैं. उनका इतना जरूर कहना है कि नियमों की समीक्षा अगले हफ्ते होगी, लेकिन लोगों को सभी लागू नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए.