उधमपुर आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों को दी गई श्रद्धांजलि

उधमपुर में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुआ जांबाज रॉकी छत्तीसगढ़ के बिलासपुर खंड के गांव रामगढ़ माजरा का रहने वाला था। उधमपुर में आतंकवादियों से मुठभेड़ में शहीद हुए बीएसएफ के जवान रॉकी ने अपने प्राणों की बलि देकर अपने दूसरे साथियों की जान बचाई।

उधमपुर आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों को दी गई श्रद्धांजलि

जम्मू: उधमपुर में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुआ जांबाज रॉकी छत्तीसगढ़ के बिलासपुर खंड के गांव रामगढ़ माजरा का रहने वाला था। उधमपुर में आतंकवादियों से मुठभेड़ में शहीद हुए बीएसएफ के जवान रॉकी ने अपने प्राणों की बलि देकर अपने दूसरे साथियों की जान बचाई।

बीएसएफ के तकरीबन 50 जवान बस में सवार होकर जम्मू से कश्मीर जा रहे थे। 50 किलोमीटर दूर पहुंचने पर अचानक एक आतंकवादी बस के सामने आ गया और उसने बस की तरफ ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दी। रॉकी ड्राइवर के बगल की सीट पर बैठा हुआ था। आतंकी द्वारा चलाई गई गोली ड्राइवर के अलावा रॉकी को भी लगी। बुरी तरह जख्मी होने के बावजूद रॉकी ने बस में चढ़ने की कोशिश कर रहे आतंकवादी को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। मारे गए आतंकी पास हैंड ग्रेनेड भी था। यदि आतंकी बस में चढ़ने में कामयाब हो जाता तो कई जवानों की जान जा सकती थी।

इस बीच उधमपुर आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों रॉकी और शुभेंदु को आज बीएसएफ ने श्रद्धांजलि दी। इन जवानों ने आतंकियों से लड़ते हुए अपनी जान तो न्यौछावर कर ही दी साथ ही बड़ी संख्या में दूसरे लोगों को हताहत होने से बचाया। जम्मू फ्रंटियर में बीएसएफ के महानिरीक्षक राकेश शर्मा के नेतृत्व में अर्धसैन्य बल के मुख्यालय पर यहां जवानों को श्रद्धांजलि दी गई।

शर्मा के अलावा शीर्ष अधिकारियों और बल के जवानों ने ‘रॉकी-शुभेंदु अमर रहें’ के नारों के बीच शहीद जवानों के पार्थिव शरीर पर पुष्पहार चढ़ाए। इसके बाद दोनों शहीदों के पार्थिव शरीर को फूलों से सजे ट्रकों में रख दिया गया, जिसमें उन्हें उनके अंतिम सफर के लिए उनके गृहनगरों हरियाणा और पश्चिम बंगाल ले जाया जाना था।

बीएसएफ के महानिरीक्षक ने संवाददाताओं को बताया, ‘शहीदों का अंतिम संस्कार पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ उनके गृहनगरों यानी हरियाणा और पश्चिम बंगाल में किया जाएगा।’ रॉकी और शुभेंदु रॉय ने कल उधमपुर जिले में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बीएसएफ के दस्ते पर हुए आतंकी हमले के दौरान आतंकियों से लड़ते हुए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया था। हमले के दौरान एक पाकिस्तानी आतंकी मारा गया था जबकि एक अन्य पाकिस्तानी आतंकी जिंदा पकड़ लिया गया था। इस हमले में बीएसएफ के 13 जवान घायल हुए थे।

महानिरीक्षक ने कहा, ‘कल हमारे दस्ते पर आतंकियों ने हमला बोला था। हमने दो बहादुर सैनिक गंवा दिए। उनमें से एक रॉकी था, जिसने आतंकी को बस में घुसने से तो रोका ही साथ ही घायल होने के बावजूद आतंकी को मार भी गिराया।’ उन्होंने कहा, ‘उसकी सक्रिय भूमिका और सजगता के चलते बीएसएफ के अन्य जवानों की जान बच गई। यह रॉकी का बहादुरी भरा कार्य था। हम उसकी बहादुरी के लिए उसे सलाम करते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘उसका दूसरा साथी शुभेंदु था, वह भी बस में बैठा था। उसने भी आतंकी को रोकने की कोशिश की लेकिन गोलीबारी इतनी भारी थी कि उसे गोलियां लग गईं। लेकिन इसके बावजूद उसने अपनी जान देकर दूसरे जवानों को बचाने की कोशिश की।’

जब महानिरीक्षक से पूछा गया कि आतंकियों ने पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर तक आने के लिए कौन सा रास्ता अपनाया, तो शर्मा ने कहा, ‘यह जांच का विषय है। जम्मू-कश्मीर पुलिस पूछताछ कर रही है। मैं इस बारे में निश्चित तौर पर कुछ नहीं कह सकता। वह लगातार अपने बयान बदल रहा है।’ जब उनसे पूछा गया कि क्या आतंकियों का इरादा अमरनाथ यात्रा के काफिले पर हमले का था, तो उन्होंने कहा, ‘एक आतंकी जिंदा पकड़ा गया है और मैं उम्मीद करता हूं कि हमें कुछ तथ्यों की जानकारी मिल सकेगी।’ उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा के यथासंभव सर्वश्रेष्ठ उपाय किए गए हैं और अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके इधर आना आसान नहीं है।

जब उनसे पूछा गया कि क्या आतंकियों के निशाने पर बीएसएफ थी, तो उन्होंने कहा कि यह संयोग था और यह बल आतंकियों का मुख्य निशाना नहीं था। उन्होंने कहा, ‘वे किसी निशाने की तलाश में थे। बीएसएफ का दस्ता वहां से होकर गुजरा और उन्होंने उसे ही निशाना बना लिया।’

(एजेंसी इनपुट के साथ)

 

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