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सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए बीएसएफ पहली बार करेगी BOLD-QIT तकनीक का इस्‍तेमाल

भारतीय सीमाओं की सुरक्षा को पुख्‍ता करने के लिए बीएसएफ अत्‍याधुनिक उपकरणों का उपयोग करने जा रही है. इस प्रयास के तहत बीएसएफ ने पहली बार 'बॉर्डर एलेक्ट्रॉनिकली डोमिनेटेड क्यूआरटी सिस्टम (BOLD-QIT ) का इस्‍तेमाल धुबरी बार्डर पर शुरू किया है.

सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए बीएसएफ पहली बार करेगी BOLD-QIT तकनीक का इस्‍तेमाल
असम के धुबरी में सीमा सुरक्षा के उपकरणों की निगरानी करते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह.

नई दिल्‍ली: भारतीय सीमाओं की सुरक्षित रखने में आड़े आ रही प्राकृतिक जटिलताओं और मानवीय भूल की संभावनाओं को खत्‍म करने के लिए बार्डर सिक्‍योरिटी फोर्स (बीएसएफ) ने अत्‍याधुनिक उपकरणों का इस्‍तेमाल शुरू किया है. बीएसएफ ने अपनी इस मुहिम के तहत एक कदम आगे बढ़ाते हुए धुबरी बार्डर पर 'बॉर्डर एलेक्ट्रॉनिकली डोमिनेटेड क्यूआरटी सिस्टम (BOLD-QIT) के जरिए सीमाओं की निगरानी शुरू की है.  BOLD-QIT सिस्‍टम का उद्घाटन मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने असम में बांग्‍लादेश की सीमा से सटे धुबरी बार्डर पर किया है. उल्‍लेखनीय है कि  BOLD-QIT सिस्‍टम CIBMS (व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली) के तहत काम करेगा.

61 किमी चौड़ी ब्रह्मपुत्र नदी की निगरानी BSF के लिए है चुनौती 
बीएसएफ के वरिष्‍ठ अधिकारी के अनुसार, सीमा सुरक्षा बल बांग्लादेश के साथ 4,096 किलोमीटर लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा करने वाला देश का अग्रणी सीमा रक्षक बल है. सीमाओं पर, विभिन्न स्थानों पर, भौगोलिक बाधाओं के कारण सीमा बाड़ को खड़ा करना संभव नहीं है. ऐसी ही एक भौगोलिक बाधा असम के धुबरी में भारत बांग्‍लादेश बार्डर है. 

यहां पर ब्रह्मपुत्र नदी न केवल बांग्लादेश में प्रवेश करती है, बल्कि सहायक नदियां यहीं पर आकर ब्रह्मपुत्र नदी से मिलती हैं. जिसके चलते बार्डर पर ब्रह्मपुत्र नदी के दो किनारों की दूरी 61 किमी से भी अधिक हो जाती है. ऐसें में इस सीमा की निगरानी बेहद मुश्किल और चुनौती भरी हो जाती है. बरसात के मौसम में इस इलाके में किसी तरह की निगरानी रखना असंभव सा हो जाता है. 

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सेंसर पर आधारित होगी बार्डर की सुरक्षा व्‍यवस्‍था
बीएसएफ के वरिष्‍ठ अधिकारी के अनुसार, विभिन्न प्रकार की सेंसर प्रणाली के उपयोग से बीएसएफ ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के जलीय क्षेत्र निगरानी रखेगी. परियोजना के तहत इस पूरे क्षेत्र को डाटा नेटवर्क पर काम करने वाले कम्‍युनिकेशन सिस्‍टम, एफसी केबल्स, डीएमआर कम्युनिकेशन, दिन-रात निगरानी करने वाले कैमरों, घुसपैठ का पता लगाने वाली प्रणाली और रडार सिस्‍टम से जोड़ा गया है. ये आधुनिक गैजेट बॉर्डर पर बीएसएफ कंट्रोल रूम से भी जोड़ा गया है. 

उन्‍होंने बताया कि घुसपैठ की किसी भी संभावना को विफल करने के लिए तैनात बीएसएफ की  क्विक रिएक्शन टीमें भी अब इस प्रणाली का हिस्‍सा होंगी. घुसपैठ की स्थिति में BOLD-QIT सिस्‍टम से दो मैसेज जनरेट होंगे. पहला मैसेज बीएसएफ कंट्रोल रूम को मिलेगा और दूसरा मैसेज क्‍यूआरटी को सचेत करेगा. क्‍यूआरटी टीम BOLD-QIT द्वारा उपलब्‍ध कराई गई जीपीएस लोकेशन पर पहुंचकर उपयुक्‍त कार्रवाई कर सकेंगे.  

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महज 12 महीने में पूरा हुआ सीमाओं की निगरानी का यह प्रोजेक्‍ट 
बीएसएफ के वरिष्‍ठ अधिकारी ने बताया कि इस समस्या को दूर करने के लिए, 2017 में बीएसएफ ने तकनीकी समाधान का निर्णय लिया. 1 जनवरी 2018 को, बीएसएफ के सूचना और प्रौद्योगिकी विंग ने CIBMS (व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली) के  तहत बॉर्डर  इलेक्ट्रॉनिकली डोमिनेटेड क्यूआरटी सिस्टम (BOLD-QIT ) पर काम करना शुरू किया. उन्‍होंने बताया कि विभिन्‍न सहायक एजेंसियों की मदद से बीएसएफ ने रिकॉर्ड समय में यह प्रोजेक्‍ट पूरा किया है.

भारत-पाक बार्डर पर लगेगी स्‍मार्ट फेंसिंग
बीएसएफ के अनुसार, इस परियोजना के कार्यान्वयन से न केवल बीएसएफ को सभी प्रकार के सीमा पार अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी, बल्कि सीमा प्रहरियों को भी चौबीसों घंटे मानव निगरानी में व्यस्त रहने से राहत मिलेगी. गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले साल सितंबर के महीने में जम्मू में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पांच-पांच किलोमीटर की दो स्मार्ट बॉर्डर फेंसिंग पायलट परियोजनाओं का उद्घाटन किया था.