2022 तक हर गरीब के पास होगा अपना घर, मोदी सरकार ने बनाया ये प्लान

देश के हर गरीब (Housng For All Scheme) को पक्का मकान देने की योजना पर मोदी सरकार ने काम तेज कर दिया है. प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के दूसरे चरण में कुल 1.95 करोड़ मकानों का निर्माण 31 मार्च 2022 तक पूरा किया जाना है.

2022 तक हर गरीब के पास होगा अपना घर, मोदी सरकार ने बनाया ये प्लान

नई दिल्लीः देश के हर गरीब (Housng For All Scheme) को पक्का मकान देने की योजना पर मोदी सरकार ने काम तेज कर दिया है. प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के दूसरे चरण में कुल 1.95 करोड़ मकानों का निर्माण 31 मार्च 2022 तक पूरा किया जाना है. ग्रामीण विकास मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि सब कुछ ठीक रहा तो समय से सभी गरीबों को आवास उपलब्ध हो जाएंगे. 

2019 में शुरू हुआ पीएम आवास योजना का दूसरा चरण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई मौकों पर 2022 तक सबको घर देने की बात कह चुके हैं. आखिर कैसे सभी गरीबों को घर मिलेगा? ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से तैयार विजन डाक्यूमेंट में इस सवाल का जवाब छिपा हुआ है. दरअसल, वर्ष 2019 से प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का दूसरा चरण शुरू हुआ है. 

ग्रामीण विकास मंत्रालय के विजन डाक्यूमेंट के मुताबिक, 2019-20 में 60 लाख मकानों का निर्माण शुरू हुआ. वहीं मौजूदा वित्तीय वर्ष 2020-21 में 70 लाख का टारगेट है. जबकि अगले वित्तीय वर्ष 2021-22 में 65 लाख आवासों का निर्माण होगा.

1.95 करोड़ मकान गरीबों को मिलेगा घर
इस तरह 31 मार्च 2022 तक कुल 1.95 करोड़ मकान गरीबों को उपलब्ध होगा. इन घरों में बिजली, एलपीजी कनेक्शन और शौचालय की सुविधा होगी. इस योजना के तहत लाभार्थियों को न्यूनतम 25 वर्गमीटर का घर बनाने के लिए 1.20 लाख रुपये मिलते हैं, जबकि हिल एरिया में 1.30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिलती है, और 12 हजार रुपये अलग से शौचालय के लिए मिलते हैं. पहले गांवों में गरीबों को घर देने के लिए इंदिरा आवास योजना चलती थी. इसके स्थान पर मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की शुरुआत की. 

 तीन साल में 1 करोड़ लोगों को घर देने का है लक्ष्य
प्रधानमंत्री मोदी ने 20 नवम्बर, 2016 को आगरा में इस महत्वाकांक्षी योजना का शुभारंभ किया था. सरकार ने हाउसिंग फार ऑल स्कीम (Housng For All Scheme) के तहत 2022 तक सभी गरीबों के सिर पर छत देने की बात की. मोदी सरकार ने 2016 में योजना शुरू करते समय कुल दो करोड़ 95 लाख ग्रामीण आवास बनाने का टारगेट तय किया था. 2016-17 से 2018-19 के बीच पहले चरण के तीन वर्षों में 1 करोड़ का लक्ष्य रखा गया था.

2022 तक 95 लाख लोगों का बनेगा अपना आशियाना 
वहीं 2019-20 से 2021-22 के बीच योजना के दूसरे चरण में 1.95 करोड़ और आवासों के निर्माण की कवायद चल रही है. इस प्रकार कुल दो करोड़ 95 लाख ग्रामीण आवासों का लक्ष्य 2022 तक पूरा होगा. इस योजना के तहत लाभार्थियों का चयन 2011 की जनगणना की लिस्ट से होता है. उन लाभार्थियों को इस आवास योजना का लाभ मिलता है, जो गरीबी के कारण बेघर या फिर कच्चे घरों में रहते हैं. दलित और आदिवासियों को इस योजना में प्राथमिकता मिलती है.