मनोकामनाओं के मतंगेश्वर महादेव, शिव-पार्वती के पैर दबाने से भोले बाबा होंगे प्रसन्न, पूरी करेंगे सारी मनोकामनाएं

खजुराहो के मतंगेश्वर महादेव की महिमा अपरम्पार है। अगर आप हर तरफ से खाली हाथ लौटे हैं और संसार से केवल निराशा ही मिली है तो आप मतंगेश्वर महादेव के मंदिर आयें और बेलपत्र पर चंदन से भगवान राम का नाम लिखकर शिवलिंग पर चढ़ायें, आपकी सारी मनोकामनायें देखते ही देखते पूरी हो जायेंगी। 

मनोकामनाओं के मतंगेश्वर महादेव, शिव-पार्वती के पैर दबाने से भोले बाबा होंगे प्रसन्न, पूरी करेंगे सारी मनोकामनाएं

दिल्ली: खजुराहो के मतंगेश्वर महादेव की महिमा अपरम्पार है। अगर आप हर तरफ से खाली हाथ लौटे हैं और संसार से केवल निराशा ही मिली है तो आप मतंगेश्वर महादेव के मंदिर आयें और बेलपत्र पर चंदन से भगवान राम का नाम लिखकर शिवलिंग पर चढ़ायें, आपकी सारी मनोकामनायें देखते ही देखते पूरी हो जायेंगी। 

-​कहां है मतंगेश्वर महादेव का मंदिर? 
मतंगेश्वर महादेव का मंदिर मध्यप्रदेश के खजुराहो में है। मंदिर तक पहुंचने के लिये आपको कई सीढ़ियां चढ़नी होंगी। मंदिर में पहुंचने पर सबसे पहले आपको भगवान गणपति के दर्शन होंगे। आगे जाने पर एक संकरा गर्भगृह है जहां विराजे हैं मतंगेश्वर महादेव। 18 फीट लंबा भोले बाबा का ये स्वंयभू शिवलिंग 9 फीट जमीन के अंदर और 9 फीट जमीन के बाहर है। यहां महादेव अपने पूरे परिवार माता पार्वती, पुत्र गणेश और कार्तिकेय के साथ विराजमान हैं। मंदिर के पुजारी स्वामी अवधेश बताते हैं कि ''मंदिर बनवाने वाले राजा चंद्रदेव शिव भक्त थे, चंद्रवंशी होने के कारण उन्हें एक मरकत मणि मिली थी। मणि की सुरक्षा के लिए उन्होंने इसी के ऊपर शिवलिंग का निर्माण कराया। कहते हैं कि जो भी इस शिवलिंग का दर्शन करता है उसे इस मणि का भी तेज़ मिलता है।''
मतंगेश्वर महादेव का पहला अभिषेक और आरती सवेरे 5 बजे होती है। भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिये शिवलिंग पर चंदन से ऊं लिखते हैं। शमीपत्र,धतूरा और लाल फूल चढ़ाते हैं। पौराणिक मान्यता है कि शिवलिंग पर राम नाम लिखे बेलपत्र चढ़ाने और शिव-पार्वती के पैर दबाने से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। शिव मंदिर की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती। शिवभक्त यहां भी शिवलिंग की आधी परिक्रमा करते हैं और अभिषेक का जल कभी नहीं लांघते। 

-मंदिर का वास्तु और शिल्प
मतंगेश्वर महादेव का मंदिर केसरिया रंग के पत्थरों से बना है और शिखर पर हमेशा ध्वजा पताका लहराती रहती है। मंदिर का गर्भगृह चौकोर है और छत बहुमंजिली और पिरामिड के आकार वाली है। मतंगेश्वर महादेव को मृत्युंजय महादेव के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि आज खजुराहो और यहां के लोगों को जो कुछ मिला है वो इन्ही की देन है।जब से मंदिर बना है तब से खजुराहो में केवल मतंगेश्वर महादेव की ही राजसत्ता चल रही है और यही वजह है कि खजुराहो में इससे ऊंचा कोई भवन नहीं। मतंगेश्वर महादेव के बाद भैरवनाथ के दर्शन करना ना भूलियेगा क्योंकि कहते हैं कि भोलेनाथ का दर्शन करने के बाद भैरवबाबा के दर्शन ना करें तो महादेव की पूजा अधूरी रह जाएगी। 

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