सावधान! पनीर खाना सेहत के लिए हो सकता है खतरनाक, पढ़ें यह रिपोर्ट

माइक्रोबायोलॉजिकल एक तरह के बैक्टेरिया कंटेंट होते हैं, जो किसी भी फूड प्रोडक्ट में हाइजीन की कमी की वजह से पैदा होते हैं. इससे उस फूड प्रोडक्ट अनहेल्दी हो जाता है.

सावधान! पनीर खाना सेहत के लिए हो सकता है खतरनाक, पढ़ें यह रिपोर्ट
फाइल फोटो

सुमन अग्रवाल/नई दिल्लीः आप जो पनीर खा रहे हैं क्या वो हेल्दी है, क्या वो पनीर ताजा है. आप तो उसे ताजा और हेल्थी समझकर ही खरीदते हैं लेकिन क्या आपको पता है उस पनीर में कुछ माइक्रोबायोलॉजिकल बैक्टेरिया पैदा हो जाते हैं. कंज्यूमर वॉयस की एक रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है कि पनीर के कई बड़े ब्रांड हैं जो एफएसएसआई के मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं. कंज्यूमर वॉयस पनीर के आठ ब्रांड का डीएनए टेस्ट कराया जिसमें 3 एफएसएसआई के सेफ्टी और हाइजीन दोनों क्राइटेरिया पर खरे उतरते हैं लेकिन 4 ब्रांड इन क्राइटेरिया से दूर हैं.

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कंज्यूमर वॉयस ने कराया डीएनए टेस्ट 
कंज्यूमर वॉयस ने बीआईएस और एफएसएसआई के मानकों के आधार पर पनीर का डीएनए टेस्ट कराया. इस टेस्ट में सामने आया है पनीर के तीन ब्रांड ऐसे हैं जिसके अंदर माइक्रोबायोलॉजिकल कंटेंट नहीं है लेकिन 4 ऐसे भी ब्रांड हैं जिसमें माइक्रोबायोलॉजिकल काफी मात्रा में पाए गए हैं. माइक्रोबायोलॉजिकल एक तरह के बैक्टेरिया कंटेंट होते हैं, जो किसी भी फूड प्रोडक्ट में हाइजीन की कमी की वजह से पैदा होते हैं. इससे उस फूड प्रोडक्ट अनहेल्दी हो जाता है. अप्रत्यक्ष रूप से वो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकरक होते हैं.

कोल्ड चेन का ध्यान रखना जरूरी
दरअसल, अगर प्लांट जहां से दूध या दूध के कोई उत्पाद तैयार होकर रिटेलर के पास आते हैं उस दौरान अगर कोल्ड चेन का ध्यान नहीं रखा गया और फूड प्रोडक्ट को 8 डिग्री से ज्यादा तापमान में रखा गया तो उसमें ये बैक्टेरिया पैदा हो जाते हैं. जब हमने एफएसएसआई से उनके मानकों पर बात की तो FSSAI के स्टैंडर्ड और रेगुलेशन एडवाइजर सुनील बक्शी ने कहा, हमारे पास मिल्क प्रोडक्टस के लिए स्टैंडर्ड हैं, लेकिन वो मैन्यूफ्रेक्चर्रर के स्तर पर है. सेफ्टी क्राइटेरिया को ध्यान में रखते हुए स्टैंडर्ड बने हैं लेकिन हाइजीन का स्तर ज्यादातर रिटेलर के एंड से देखा जाना चाहिए. 

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सेलर भी हाइजीन और सेफ्टी का ध्यान रखें
कंज्यूमर वॉयस के टेक्निकल अफसर जो इस पनीर की टेस्टिंग से भी जुड़े हैं के सी चौधरी ने बताया कि हमने एफएसएसआई के मानकों के आधार पर ही पनीर की टेस्टिंग कराई है. हमने पाया कि कुछ ब्रांड्स में माइक्रोबायोलॉजिकल कंटेंट हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानीकारक हैं. एफएसएसआई के पास मैन्यूफ्रेक्चर्रर के लिए मानक है, लेकिन रिटेलर या कंज्यूमर के लिए माइक्रोबायोलॉजिकल के स्तर पर कोई क्राइटेरिया नहीं है. हम उनसे गुजारिश करने वाले हैं कि वे रिटेलर और कंज्यूमर के लेवल पर भी माइक्रोबायोलॉजिकल के स्टैंडर्ड लेकर आएं ताकि सेलर भी हाइजीन और सेफ्टी का ध्यान रखे.

ऐसे पैदा होते हैं माइक्रोबायलॉजिकल बैक्टेरिया 
मिल्क प्रोडक्ट्स के लिए FSSAI के पास स्टैंडर्ड है. दूध के प्लांट से जब दूध या कोई भी मिल्क प्रोडक्ट्स मैन्यूफ्रेक्चर होता है, वहां से रिटेलर के पास आने तक और कंज्यूमर के हाथ में जाने तक एक कोल्ड चेन मेंटेन करनी होती है. इस दौरान उस प्रोडक्ट को 8 डिग्री से ज्यादा के तापमान में नहीं रखा जाना चाहिए. मिल्क प्रोडक्ट्स को ठंडे में रखना अनिवार्य होता है. अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो उसमें कई तरह के बैक्टेरिया पैदा हो जाते हैं. कच्चा पनीर और जो पनीर खुले में रखा है उसमें बैक्टेरिया की ज्यादा आशंका होती है.