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दिल्ली: LG के दफ्तर पर केजरीवाल के धरने को असंवैधानिक घोषित करने को याचिका दायर

याचिका में अदालत से मांग की है कि एक गाइड लाइन बनाई जाए ताकि कोई भी मुख्यमंत्री भविष्य में इस प्रकार धरना प्रदर्शन न करें.

दिल्ली: LG के दफ्तर पर केजरीवाल के धरने को असंवैधानिक घोषित करने को याचिका दायर
(फाइल फोटो)

नई दिल्ली: दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल के ऑफिस में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के धरने के खिलाफ एक वकील हरीनाथ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की है कि मुख्यमंत्री द्वारा किए गए इस तरह के धरने को असंवैधानिक करार दिया जाए. साथ ही अदालत से मांग की है कि एक गाइड लाइन बनाई जाए ताकि कोई भी मुख्यमंत्री भविष्य में इस प्रकार धरना प्रदर्शन न करें, क्योंकि इससे सरकार के काम काज पर असर पड़ता है और जनता परेशान होती है. 

दरअसल, इस मुद्दे पर इसी याचिकाकर्ता वकील की एक याचिका पहले ही से दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है जिसमें वहीं मांग की हुई है जो कि सुप्रीमकोर्ट में दायर याचिका में है, जिसपर हाईकोर्ट में सुनवाई होनी बाकि है लेकिन हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई करवाने की कोशिश में वकील ने सुप्रीमकोर्ट मे भी याचिका दायर कर दी थी. 

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आपको बता दें कि अपनी तीन मांगों को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके कैबिनेट सहयोगी जून में एलजी अनिल बैजल से मिलने गए थे. एलजी के न मिलने पर वे वहीं धरने पर बैठ गए थे. केजरीवाल के साथ डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया, मंत्री- सत्येंद्र जैन व गोपाल राय भी धरने पर बैठे थे. केजरीवाल ने उप राज्यपाल (एलजी) कार्यालय के प्रतीक्षा कक्ष से ट्वीट कर इसकी जानकारी दी थी. 
उन्‍होंने कहा था कि बैजल को एक पत्र सौंपा गया लेकिन उन्होंने कार्रवाई करने से इनकार कर दिया. उन्होंने ट्वीट किया, 'उन्हें पत्र सौंपा. एलजी ने कार्रवाई करने से इनकार कर दिया. कार्रवाई करना एलजी की संवैधानिक कर्तव्य है. कोई विकल्प नहीं बचने पर हमने एलजी से विनम्रता से कहा है कि जब तक वह सभी विषयों पर कार्रवाई नहीं करेंगे, तब तक वे वहां से नहीं जाएंगे.' 

मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उपराज्यपाल दिल्ली में फैसला लेने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं, एलजी को कैबिनेट की सलाह के अनुसार ही काम करना होगा. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना मुमकिन नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साफ है कि दिल्ली की चुनी हुई सरकार ही राज्य को चलाने के लिए जिम्मेदार है. फैसले के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी ट्वीट कर खुशी जताई थी.