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सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक को 3 दिनों में तमिलनाडु के लिए 6,000 क्यूसेक पानी देने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने दिए गए फैसले में कर्नाटक से कहा कि वह विधानसभा प्रस्ताव के बावजूद तीन दिन में तमिलनाडु के लिए कावेरी का 6000 क्यूसेक जल छोड़े । कोर्ट ने एटार्नी जनरल से कहा कि वे दोनों राज्यों के कार्यकारी प्रमुखों के बीच बैठक कराएं और केंद्र से कहा कि वह कावेरी जल को लेकर जारी गतिरोध का समाधान करे।

सुप्रीम कोर्ट ने  कर्नाटक को 3 दिनों में तमिलनाडु के लिए 6,000 क्यूसेक पानी देने को कहा

नई दिल्ली : तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने में असमर्थता जताए जाने के संबंध में कर्नाटक विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किए जाने के बावजूद उच्चतम न्यायालय ने राज्य को अगले तीन दिन में कावेरी से 6,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का मंगलवार को निर्देश दिया।

इसके साथ ही न्यायालय ने केंद्र और दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाकर ‘गतिरोध’ के राजनीतिक समाधान का सुझाव दिया।

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति यू यू ललित की पीठ ने कहा, ‘हम कर्नाटक राज्य को कल से यानी 28 सितंबर से 6000 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश देते हैं। हम आश्वस्त हैं कि जब हम मामले पर 30 सितंबर को विचार करेंगे, उस समय तक कर्नाटक बिना किसी बाधा के या किसी अन्य रूख के आदेश का पालन करेगा।’ 

न्यायालय के पूर्व के आदेशों का कर्नाटक द्वारा पालन नहीं किए जाने के मुद्दे पर तत्काल गौर करने से इंकार करते हुए पीठ ने कहा अब तक छोडे गए पानी की मात्रा को ‘अंतिम फैसले’ में समायोजित किया जाएगा। इसके साथ ही पीठ ने कहा कि प्रस्ताव के रिकार्ड में लाए जाने के बाद भी आज के आदेश का पालन किया जाना चाहिए।

सुनवाई के दौरान, कर्नाटक की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एफ एस नरीमन ने प्रतिवाद करते हुए कहा, ‘हम निर्देशों का पालन नहीं कर सकते। हम तमिलनाडु के अनुरोध से सहमत हैं कि मानसून सीजन खत्म होने तक हमारी बात नहीं सुनी जाए।’ पीठ ने कहा कि वह राज्य की बात सुनेगी और उसने कर्नाटक से सवाल किया कि क्या वह इस मौसम के अंत में आदेश का पालन करेगा। इसके जवाब में नरीमन ने कहा, ‘सिर्फ प्रभु जानते हैं।’ उन्होंने कहा कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि कावेरी के जलग्रहण क्षेत्र में उत्तर.पूर्वी मानसून के कारण कितनी बारिश होती है।

कर्नाटक ने कल उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दाखिल कर उसके उस आदेश में संशोधन किए जाने का अनुरोध किया था जिसमें तमिलनाडु के लिए 6000 क्यूसेक पानी छोडने के लिए कहा गया था। कर्नाटक ने कहा था कि वह साल के अंत तक ही पानी छोड़ सकता है क्योंकि उसे अपने राज्य के लिए पेयजल मुहैया कराने की जरूरत है।

कर्नाटक विधानसभा ने पिछले हफ्ते विशेष सत्र में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था। इसमें राज्य को निर्देश दिया गया था कि वह बेंगलुरू और कावेरी बेसिन के आसपास के क्षेत्रों में पेयजल के लिए ही पानी छोड़े। दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को बातचीत की मेज पर बुलाकर गतिरोध का राजनीतिक समाधान निकालने के लिए केंद्र से सहायता मांगते हुए पीठ ने कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है कि यह अदालत ‘कानून के अनुरूप उचित आदेश या निर्णय नहीं दे सकती।’ पीठ ने कहा कि हमने इसलिए ऐसा नहीं कहा कि यह अदालत कानून के अनुसार फैसला या आदेश नहीं दे सकती बल्किे उसके पहले हमने सोचा कि यह उचित होगा कि हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रचलित संघवाद के संबंध में चर्चा हो।

कर्नाटक की ओर से वरिष्ठ वकील एफ एस नरीमन और तमिलनाडु की ओर से वरिष्ठ वकील शेखर नफाडे ने दोनों राज्यों के प्रमुखों के केंद्र के साथ बैठक के शीर्ष अदालत के सुझाव पर सहमति जतायी।

पीठ द्वारा आदेश लिखाए जाने के बीच नरीमन ने राज्य को पानी छोड़ने के लिए कहे जाने के किसी निर्देश का विरोध किया। उन्होंने कहा, ‘इसमें कोई तर्क नहीं है’ और आदेश ‘सीधे टकराव’ के समान है।

नफाडे ने उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं किए जाने और गतिरोध के लिए कर्नाटक के ‘विध्नकारी और हठी’ रवैए पर दोषारोपण किया उन्होंने कहा, ‘निर्देश पर, मैं कह रहा हूं कि राज्य (तमिलनाडु) तंग आ गया है। हम इस मुकदमेबाजी से थक गए हैं। हमारे जो वैध अधिकार हैं, वे हमें नहीं मिल रहे हैं।’ पीठ ने दोनों राज्यों से पानी विवाद का हल निकालने के लिए सहयोग करने को कहा। मामले में अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।