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लालू यादव, राबड़ी और बेटे के खिलाफ CBI ने दर्ज किया केस, 12 ठिकानों पर छापेमारी

लालू प्रसाद यादव पहले से ही अवैध संपत्ति और भ्रष्टाचार के मामले में फंसे हुए हैं 

लालू यादव, राबड़ी और बेटे के खिलाफ CBI ने दर्ज किया केस, 12 ठिकानों पर छापेमारी
लालू प्रसाद यादव पहले से ही अवैध संपत्ति और भ्रष्टाचार के मामले में फंसे हुए हैं.

पटना: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार (7 जुलाई) को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव के आवासों पर छापेमारी की. छापेमारी लालू के रेल मंत्री रहते हुए रेलवे के दो होटलों को एक निजी कंपनी को लीज पर देने के मामले में कथित अनियमितता को लेकर की गई है. जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ मामले भी दर्ज किए हैं. सीबीआई के कई अधिकारियों ने दिल्ली, गुरुग्राम, पटना, रांची और भुवनेश्वर में लालू प्रसाद और उनके परिवार के सदस्यों के आवासों सहित करीब एक दर्जन स्थानों पर छापेमारी की.

सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक राकेश अस्थाना ने कहा कि लालू ने 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहते हुए कथित तौर पर इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) के माध्यम से सुजाता होटल को अवैध सुविधाएं दीं. अस्थाना ने कहा कि रांची व पुरी में होटलों के विकास, रखरखाव तथा संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया में छेड़छाड़ की गई और निजी कंपनी को रियायत दी गई. ऐसा पटना में तीन एकड़ भूखंड के बदले किया गया, जिस पर एक मॉल का निर्माण हो रहा है. उन्होंने कहा, "जब लालू प्रसाद रेल मंत्री थे, उस समय रेलवे के बीएनआर होटल का टेंडर सुजाता होटल्स को दिया गया."

अस्थाना के अनुसार, "पश्चिमी पटना में तीन एकड़ का भूखंड डिलाइट मार्केटिंग प्राइवेट कंपनी द्वारा स्थानांतरित किया गया, जिससे यादव परिवार परिचित है." उन्होंने यह भी कहा कि 2010 से 2014 के बीच इस भूखंड को एक अन्य कंपनी को बेहद कम कीमत पर स्थानांतरित कर दिया गया, जिसका स्वामित्व यादव परिवार के लारा प्रोजेक्ट्स के पास है. अस्थाना ने कहा, "भूखंड का स्थानांतरण बेहद कम कीमत पर हुआ. सर्किल रेट के मुताबिक जमीन की कीमत 32 करोड़ रुपये थी और उस समय इसकी बाजार में कीमत 94 करोड़ रुपये थी. लेकिन इसे केवल 65 लाख रुपये में लारा प्रोजेक्ट्स को स्थानांतरित कर दिया गया."

उन्होंने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 और 13 (1) (बी) के तहत पांच जुलाई को मामला दर्ज किया गया. इस मामले में आईआरसीटीसी के पूर्व प्रबंध निदेशक पी.के. गोयल और लालू के विश्वासपात्र प्रेमचंद गुप्ता की पत्नी का नाम भी शामिल है.