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CBI vs CBI: सुप्रीम कोर्ट में कल भी सुनवाई रहेगी जारी, CVC ने शुरू की बहस

वेणुगोपाल ने कहा कि वर्मा का ट्रांसफ़र नहीं किया गया इसलिए चयन समिति से परामर्श लेने की ज़रूरत नहीं थी और आलोक वर्मा अभी भी सरकारी आवास और दूसरी सुविधाओं का फायदा उठा रहे है. 

CBI vs CBI: सुप्रीम कोर्ट में कल भी सुनवाई रहेगी जारी, CVC ने शुरू की बहस
फाइल फोटो

नई दिल्ली: CBI vs CBI मामले में आलोक वर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में कल (6 दिसंबर) भी सुनवाई जारी रहेगी. केन्द्रीय सर्तकता आयोग (सीवीसी) कल अपनी बहस सुप्रीम कोर्ट में जारी रखेगी. कल सुप्रीम कोर्ट 10:30 बजे मामले की सुनवाई शुरु होगी. आज (बुधवार) सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि सीबीआई के दो बड़े अधिकारी निदेशक और विशेष निदेशक आपस मे लड़ रहे थे. ख़बरें मीडिया मे आ रही थीं जिससे सीबीआई की छवि ख़राब हो रही थी. सरकार ने सीबीआई प्रीमियम एजेंसी मे लोगों का भरोसा बनाए रखने के उद्देश्य से वर्मा से काम वापस लिया. 

वेणुगोपाल ने कहा कि वर्मा का ट्रांसफ़र नहीं किया गया इसलिए चयन समिति से परामर्श लेने की ज़रूरत नहीं थी और आलोक वर्मा अभी भी सरकारी आवास और दूसरी सुविधाओं का फायदा उठा रहे है. PM की अध्यक्षता वाला पैनल डायरेक्टर के लिए चयन करता है, उसे नियुक्त करने का अधिकार नहीं है. जस्टिस कुरियन जोसेफ ने अटॉर्नी जनरल से सवाल किया कि आपका कहना है कि सारा विवाद पब्लिक डोमेन में था, क्या आलोक वर्मा ने कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस की, उनकी तरफ से कोई प्रेस स्टेटमेंट जारी किया. 

दरअसल, पिछली सुनवाई के दौरान आलोक वर्मा से कामकाज वापस लिए जाने के आदेश को सही ठहराते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि चयन और नियुक्ति में अंतर होता है. तीन सदस्यीय समिति सीबीआई निदेशक के लिए नामों का चयन करती हैं और पैनल तैयार करके सरकार को भेजती है उसमें किसे चुनना है यह सरकार तय करती है और सरकार ही नियुक्ति करती है. चयन को नियुक्ति नहीं माना जा सकता. आपको बता दें कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने निदेशक पद का कामकाज वापस लिये जाने के आदेश को चुनौती दी है. कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और गैर सरकारी संस्था कामनकाज ने वह आदेश रद्द करने की मांग की है.

पिछली सुनवाई में ही अर्टनी जनरल केके वेणुगोपाल ने सीबीआई निदेशक के ट्रांसफर से पहले चयन समिति से इजाजत लेने के कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन के आरोपों का जवाब देते हुए कहा था कि वर्मा का स्थानांतरण नहीं किया गया है वह अपने दिल्ली के घर में रह रहे हैं.उनसे कामकाज वापस लिये जाने के आदेश को सही ठहराते हुए वेणुगोपाल ने कहा था कि सरकार की प्राथमिक चिंता लोगों का सीबीआई में भरोसा बनाए रखने की थी. सीबीआई के दो शीर्ष अधिकारियों ने एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए थे. सीबीआई के बारे मे लोगों की राय खराब हो रही थी. इसलिए सरकार ने दखल देने का फैसला किया. उन्होंने कहा था कि केन्द्रीय सर्तकता आयोग (सीवीसी) को सीबीआई की पूरी निगरानी का अधिकार है. सीवीसी का यह अधिकार सिर्फ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच तक ही सीमित नहीं है बल्कि सीवीसी कानून मे दिये गए सभी मामलों की निगरानी का अधिकार है.

आलोक वर्मा के वकील फली एस नारिमन ने कहा था कि सीबीआई निदेशक का कानूनन दो साल का तय कार्यकाल होता है. सेवानिवृति के बावजूद उसमें कटौती नहीं हो सकती. चयन समिति की पूर्व इजाजत के बगैर उसे ट्रांसफर भी नहीं किया जा सकता. वर्मा से कामकाज छीनना ट्रांसफर से बदतर है, सरकार ऐसा नहीं कर सकती. इस पर जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा था कि आप कह रहे हैं कि सीबीआई निदेशक पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकती. मान लीजिए कोई व्यक्ति रंगे हाथ रिश्वत लेते पकड़ा जाता है, तो क्या तब भी कार्रवाई नहीं हो सकती. नारिमन ने कहा था कि नहीं, पहले चयनसमिति या कोर्ट के पास जाकर इजाजत लेनी होगी. जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा था कि अगर कोई रंगे हाथ पकड़ा जाता है तो क्या ऐसे व्यक्ति को एक भी मिनट पद पर रहने देना चाहिए? इस पर नारिमन ने कहा था कि फिर भी कार्रवाई नहीं हो सकती, कमेटी नहीं है तो कोर्ट मौजूद है कोर्ट के पास जाएं.