CDS अनिल चौहान ने जोर देते हुए कहा कि एक महाद्वीपीय और समुद्री शक्ति के रूप में भारत, हिंद महासागर क्षेत्र में एक प्रमुख स्थान रखता है.
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CDS Anil Chauhan: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने रविवार को भारत की धरती और समुद्री ताकत पर ऐसा दावा किया, जिससे पाकिस्तान की नींद तो उड़ेगी ही, साथ में चीन में भी खलबली मच सकती है. CDS अनिल चौहान ने बताया कि सत्ता के लिए वैश्विक संघर्ष, जो कभी जमीन और आसमान तक सीमित था, अब अंतरिक्ष, साइबरस्पेस और संज्ञानात्मक क्षेत्र तक फैल गया है.
चंडीगढ़ में रविवार (9 नवंबर) को 9वें सैन्य साहित्य महोत्सव 2025 का आयोजन किया गया. इस खास समारोह का विषय था 'बहु-क्षेत्रीय युद्ध में हृदयस्थल और तटीय क्षेत्र की शक्तियां और भारत'. इस विषय पर बोलते हुए CDS अनिल चौहान ने जोर देते हुए कहा कि एक महाद्वीपीय और समुद्री शक्ति के रूप में भारत, हिंद महासागर क्षेत्र में एक प्रमुख स्थान रखता है.
CDS अनिल चौहान ने कहा कि भारत इस क्षेत्र के अन्य देशों के लिए "प्रथम प्रतिक्रियादाता और पसंदीदा साझेदार" बना हुआ है। ब्रिटिश लेखक टिम मार्शल की पुस्तक "प्रिजनर्स ऑफ जियोग्राफी" का हवाला देते हुए, सीडीएस ने कहा कि किसी राष्ट्र का स्थान और भौगोलिक विशेषताएं, चाहे उसका आकार कुछ भी हो, उसकी शक्ति प्रदर्शन और रणनीतिक विकल्पों को आकार देने की क्षमता निर्धारित करती हैं.
"अगर आप 20वीं सदी की भू-राजनीतिक घटनाओं- भारत का विभाजन, पाकिस्तान का निर्माण और चीन के साथ हमारा युद्ध को देखें, तो इन घटनाओं ने भारत को एक महाद्वीपीय दृष्टिकोण अपनाने के लिए मजबूर किया. लेकिन भारत का भूगोल दर्शाता है कि यह एक महाद्वीपीय और समुद्री, दोनों तरह की शक्ति है."
जनरल चौहान ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि वैश्विक प्रभुत्व की प्रतिस्पर्धा हमेशा से भूगोल से जुड़ी रही है. वैश्विक शक्ति का संघर्ष लंबे समय से भूगोल पर नियंत्रण के बारे में रहा है - समुद्रों और महाद्वीपों से लेकर आकाश तक। आज, यह अंतरिक्ष, साइबरस्पेस और संज्ञानात्मक क्षेत्र तक फैल गया है.
उन्होंने जिबूती और सिंगापुर के उदाहरण देकर इस बात पर ज़ोर दिया कि भूगोल किस तरह सामरिक महत्व को बढ़ाता है. बाब अल-मंडेब में स्थित जिबूती और मलक्का जलडमरूमध्य के पास स्थित सिंगापुर, दोनों ही छोटे देश हैं जिनका वैश्विक व्यापार के लिए अत्यधिक महत्व है. सीडीएस ने आगे बताया कि इंडोनेशिया के जलडमरूमध्य - जिनमें मलक्का, सुंडा, लोम्बोक और ओम्बाई-वेटर शामिल हैं. प्रशांत और हिंद महासागर को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण समुद्री संपर्क के रूप में काम करते हैं.
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