सुप्रीम कोर्ट ने कहा- 'पोर्नोग्राफी पर रुख साफ करे केंद्र सरकार', अभिव्यक्ति की आजादी पर भी की टिप्पणी

चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर प्रतिबंध लगाने के लिये दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर मासूमों के इस्तेमाल को किसी भी कीमत पर मंजूरी नहीं दी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि क्या वह चाइल्ड और एडल्ट पोर्नोग्राफी में अंतर समझती है और कहा कि पोर्नोग्राफी के मामले में केंद्र सरकार अपना रुख स्पष्ट करे। कोर्ट ने सुझाव दिया कि सरकार को ऐसी साइट को ब्लॉक करने के संबंध में कोई व्यवस्था बनानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- 'पोर्नोग्राफी पर रुख साफ करे केंद्र सरकार', अभिव्यक्ति की आजादी पर भी की टिप्पणी

नई दिल्ली : चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर प्रतिबंध लगाने के लिये दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर मासूमों के इस्तेमाल को किसी भी कीमत पर मंजूरी नहीं दी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि क्या वह चाइल्ड और एडल्ट पोर्नोग्राफी में अंतर समझती है और कहा कि पोर्नोग्राफी के मामले में केंद्र सरकार अपना रुख स्पष्ट करे। कोर्ट ने सुझाव दिया कि सरकार को ऐसी साइट को ब्लॉक करने के संबंध में कोई व्यवस्था बनानी चाहिए।

'मोबाइल में पोर्न वीडियो रखना भी अपराध है'

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- 'अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार सार्वजनिक स्थानों पर पोर्न देखने की अनुमति नहीं देता है। अश्लीलता किसी भी तरीके से हो, वह कानून के मुताबिक अपराध है। चाइल्ड पोर्नोग्राफी हो या सिर्फ पॉर्नोग्राफी दोनों भारतीय दंड संहिता (आईपीसी धारा 292) के मुताबिक अपराध हैं। मोबाइल में अश्लील वीडियो रखना भी आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत अपराध के दायरे में आता है।

'सार्वजनिक स्थानों पर पोर्न देखना गैरकानूनी'

कोर्ट ने कहा- 'मासूम बच्चों को ऐसे अनैतिक हमलों का शिकार बनते नहीं देखा जा सकता। इस मामले पर कोर्ट ने सरकार से कहा है कि सार्वजनिक जगहों पर पोर्न देखने या दूसरों को ऐसा करने पर मजबूर करने वालों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाने चाहिए। इसके साथ ही चाइल्ड पोर्न वेबसाइट पर पाबंदी को लेकर उठाए गए कदमों से सुप्रीम कोर्ट ने संतोष जताया। साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय की अपेक्षा की है।