DNA ANALYSIS: नई शिक्षा नीति और स्मार्ट होते सरकारी स्कूलों का 'भविष्य'

भारत के ज्यादातर मां-बाप का सपना होता है कि उनका बच्चा किसी अच्छे प्राइवेट स्कूल में पढ़ें. ये सपना पूरा करने के लिए माता-पिता जी तोड़ मेहनत करते हैं और किसी तरह से अपने बच्चे को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाते हैं.  लेकिन अब धीरे धीरे ये स्थिति बदलने लगी है.  

DNA ANALYSIS: नई शिक्षा नीति और स्मार्ट होते सरकारी स्कूलों का 'भविष्य'

नई दिल्ली: भारत के ज्यादातर मां-बाप का सपना होता है कि उनका बच्चा किसी अच्छे प्राइवेट स्कूल में पढ़ें. ये सपना पूरा करने के लिए माता-पिता जी तोड़ मेहनत करते हैं और किसी तरह से अपने बच्चे को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाते हैं.  लेकिन अब धीरे धीरे ये स्थिति बदलने लगी है.  हरियाणा सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, हाल के दिनों में करीब 43 हज़ार बच्चों ने प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में एडमिशन लिया है. इनमें सबसे आगे हिसार ज़िला है. जहां साढ़े तीन हज़ार छात्रों ने प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में दाख़िला लिया है.  दूसरे नंबर पर गुरुग्राम है. जहां प्राइवेट से सरकारी स्कूलों में जाने वाले बच्चों की संख्या ढाई हज़ार है. 

कोविड- 19 की वजह से आर्थिक स्थिति खराब हुई
उदाहरण के लिए हरियाणा में पिछले कुछ महीनों में बड़ी संख्या में बच्चों ने प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में एडमिशन लिया है.  इसकी वजह ये है कि कोरोना वायरस के दौर में सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई Online हो रही है. अब पैरेंट्स को लगने लगा है कि जब सारी पढ़ाई ऑनलाइन ही होनी है तो प्राइवेट स्कूलों को मोटी फीस देने का क्या फायदा.  वैसे भी खराब आर्थिक स्थिति की वजह से ज़्यादातर माता-पिता प्राइवेट स्कूलों का ख़र्च उठाने की स्थिति में नहीं हैं. वहीं देश के कई राज्यों में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में बहुत सुधार आया है और अब सरकारी स्कूल भी लोगों की पहली पसंद बनने लगे हैं. 

देश में सरकारी स्कूलों की वास्तविक संख्या का आंकड़ा उपलब्ध नहीं
वर्ष 2015-16 के आंकड़ों के मुताबिक भारत के सरकारी स्कूलों में 8 करोड़ 46 लाख छात्र पढ़ते हैं. जबकि प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या लगभग 8 करोड़ है.  हालांकि एक नए सरकारी आंकड़े के मुताबिक भारत में स्कूल जाने वाले बच्चों की कुल संख्या 26 करोड़ है. लेकिन इस आंकड़े में इस बात का जिक्र नहीं है कि कितने बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं और कितने सरकारी स्कूलों में. भारत में प्राइवेट स्कूलों की संख्या 15 लाख है. हैरानी की बात ये है कि भारत में कितने सरकारी स्कूल हैं..इसका कोई सही आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. 

2010 से 2015 के बीज प्राइवेट स्कूलों में बढ़ी थी छात्रों की भीड़
Covid 19 की वजह से अब भले ही बड़ी संख्या में छात्र सरकारी स्कूलों में शिफ्ट हो रहे हैं..लेकिन इस महामारी से पहले स्थिति इसके विपरीत थी. उदाहरण के लिए वर्ष 2010 से 2015 के बीच भारत के सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या में एक करोड़ 30 लाख की गिरावट आई थी .जबकि इस दौरान प्राइवेट स्कलों में एडमिशन लेने वालों की संख्या में 1 करोड़ 75 लाख की वृद्धि हुई थी. 

भारत में 3 प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं जा पाते स्कूल
भारत में जिन बच्चों की उम्र स्कूल जाने की है. उनमें से 3 प्रतिशत बच्चे स्कूल जा ही नहीं पाते.  जबकि लगभग 3 प्रतिशत बच्चे स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं. नई शिक्षा नीति का मकसद इस स्थिति को भी बदलना है. लेकिन हरियाणा समेत कई राज्यों की शिक्षा व्यवस्था में अभी से बड़े बदलाव दिखाई दे रहे हैं. इन बदलावों कई कारण हैं. जिनमें Covid 19 है, प्राइवेट स्कूलों पर कम होता विश्वास और देश के सरकारी स्कूलों की सुधरती स्थिति है. 

हरियाणा में छात्र- छात्राओं को टैब देने की तैयारी
हरियाणा के सरकारी स्कूलों के छात्रों को अब ऑनलाइन क्लास दी जा रही हैं. सरकार नौवीं से बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को टैब देने की भी तैयारी कर रही है. सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं भी पहले से बेहतर हुईं हैं. प्राइवेट स्कूलों की तरह सरकारी स्कूलों में भी स्मार्ट क्लास शुरु की गईं हैं. ये सब सिर्फ कागजों में नहीं हुआ है, साफ दिखाई भी देता है. यही वजह है कि अब प्राइवेट स्कूलों के टॉपर्स भी सरकारी स्कूलों में दाखिले ले रहे हैं. 

शिक्षकों के प्रोत्साहन के लिए भी चल रहे हैं कार्यक्रम
कोई भी स्कूल सिर्फ अच्छी इमारत और स्मार्ट क्लासेज शुरू कर देने से अच्छा नहीं बन जाता. जब तक कि वहां पढ़ाने वाले टीचर्स अच्छे ना हों. हरियाणा सरकार ने सरकारी टीचर्स को ट्रेनिंग देने के लिए कई तरह के प्रोग्राम चलाएं हैं. ऐसे टीचर्स के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनाने के लिए स्टार टीचर नाम से कंपीटिशन भी शुरु किया गया है. 

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी कम होने की उम्मीद
देश की नई शिक्षा नीति वर्ष 2021-2022 से लागू होगी. उम्मीद की जा रही है कि इसके लागू होने के बाद प्राइवेट स्कूलों की मनमानी में भी कमी आएगी और जल्द ही प्राइवेट और सरकारी स्कूलों के बीच की दीवार गिर जाएगी. इस नई नीति के तहत अब मानव संसाधन विकास मंत्री का Designation भी बदल गया है और डॉक्टर निशंक अब देश के शिक्षा मंत्री कहलाएंगे.

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