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Ramgopal Agarwal Surrende: छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग घोटालों के मुख्य आरोपियों में शामिल कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल को आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने हिरासत में लिया है. रामगोपाल अग्रवाल कांग्रेस के कोषाध्यक्ष और नान (NAN) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. वे पिछले तीन वर्षों से फरार थे और उनकी तलाश ईडी (ED) और ईओडब्ल्यू (EOW) लंबे समय से कर रहे थे.
बता दें कि, कस्टम मिलिंग घोटाले के सिलसिले में कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल को समन जारी किया गया था. मंगलवार को आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने उनके बेटे वैभव अग्रवाल से लंबी पूछताछ की थी. इसके बाद रामगोपाल अग्रवाल जो तीन साल से फरार थे EOW के सामने पेश हुए और अब उन्हें हिरासत में ले लिया गया है.
क्या है कोल लेवी घोटाला?
जांच एजेंसियों के अनुसार जुलाई 2020 और जून 2022 के बीच कोयले के ट्रांसपोर्टेशन के दौरान 25 प्रति टन का अवैध लेवी (शुल्क) वसूला गया. आरोप है कि ऑनलाइन परमिट प्रक्रिया को ऑफलाइन मोड में बदलकर वरिष्ठ अधिकारियों, राजनेताओं और अन्य लोगों की मिलीभगत से यह अवैध वसूली की गई. जांच रिपोर्ट से पता चलता है कि इस दौरान लगभग 540 करोड़ अवैध रूप से वसूले गए. जांच में यह भी पता चला कि गैर-कानूनी वसूली के लिए तालमेल बिठाने और पैसे इकट्ठा करने के मकसद से 'पाल', 'दुर्ग', 'वीकली', 'टावर', 'टुडे' और 'जुगनू' नाम के कई व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए थे. जांच एजेंसियों का दावा है कि पूरा नेटवर्क इन्हीं चैनलों के जरिए चलाया जाता था.
अब तक 11 लोग हो चुके हैं गिरफ्तार
इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) दोनों कर रहे हैं. अब तक ED ने लगभग 273 करोड़ की चल और अचल संपत्ति जब्त की है. इस मामले में पहले ही 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और स्पेशल कोर्ट में 35 आरोपियों के खिलाफ पांच चार्जशीट दायर की गई हैं. अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वैभव अग्रवाल से पूछताछ के बाद जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है.
क्या है कस्टम मिलिंग घोटाला?
छत्तीसगढ़ में कथित कस्टम मिलिंग घोटाले में धान की मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को दिए जाने वाले इंसेंटिव पेमेंट में गड़बड़ी का मामला सामने आया है. EOW के अनुसार, 2015 से 2023 के बीच कुछ खास राइस मिलर्स को इन इंसेंटिव को बढ़ाने और उनके भुगतान से जुड़े नियमों का उल्लंघन करके अनुचित लाभ पहुंचाया गया. जांच एजेंसी का दावा है कि यह घोटाला लगभग 127 करोड़ का है.
शराब घोटाला
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले को राज्य के बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जाता है. ED और EOW की जांच के अनुसार, 2019 और 2022 के बीच सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था के भीतर काम कर रहे एक कथित सिंडिकेट ने अवैध शराब की बिक्री में मदद की और कमीशन-आधारित भ्रष्टाचार किया, जिससे राज्य के खजाने को नुकसान हुआ. जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क के कारण लगभग 3,200 करोड़ का घोटाला हुआ है.
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