India China News in Hindi: भारत को नुकसान पहुंचाने के लिए चीन और पाकिस्तान मिलकर सैन्य शक्ति बढ़ा रहे हैं. इसे देखते हुए भारत भी चुप नहीं बैठा है. वह अब ऐसा मास्टरस्ट्रोक चलने जा रहा है, जिसके बाद एसिया का पावर बैलेंस पूरी तरह शिफ्ट हो जाएगा.
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India Pakistan News in Hindi: चीन और पाकिस्तान से लगातार बढ़ते सैन्य खतरे को देखते हुए भारत लगातार अपने शस्त्रागार को मजबूत करने में लगा है. जिस तरह दोनों देशों की सैन्य साझेदारी बढ़ रही है और वे आसमान में आधुनिक लड़ाकू विमानों की तैनाती बढ़ा रहे हैं. उसे देखते हुए भारत भी अपनी एयर फोर्स को लगातार अपग्रेड कर रहा है. हाल ही में फ्रांस के रक्षा मंत्रालय से जुड़ी एक खबर लीक हुई है. जिसके मुताबिक, भारत अपने मित्र फ्रांस से 90 नए राफेल F4 मल्टीरोल फाइटर जेट खरीदने पर विचार कर रहा है. साथ ही भविष्य के खतरों का आकलन करते हुए 24 अत्याधुनिक राफेल F5 विमान खरीदने का विकल्प भी प्लान में रखा गया है.
चीन-पाक के मुकाबले घट रही वायुशक्ति
बताते चलें कि भारतीय वायुसेना (IAF) पिछले कई वर्षों से घटते संसाधनों का सामना कर रही है. एयरफोर्स को स्वीकृत स्क्वाड्रन संख्या की संख्या 42.5 है. जबकि वायुसेना के पास मौजूद स्क्वाड्रनों की संख्या धीरे-धीरे घटकर 29 रह गई है. डिफेंस एक्सरपर्टों के मुताबिक, कई सालों से नए विमानों की खरीद न होने और स्वदेशी लड़ाकू विमान परियोजनाओं में हुई देरी की वजह से यह हालात बने हैं. ऐसे में भारतीय वायुसेना बड़े पैमाने पर लड़ाकू विमानों की खरीद करके इस बढ़ते गैप को दूर करना चाहती है.
भारत के लिए चिंता की बात इसलिए भी है क्योंकि पड़ोसी पाकिस्तान और चीन लगातार अपनी वायु शक्ति बढ़ा रहे हैं. पाकिस्तान को अमेरिका से अपने पास मौजूद F-16 लड़ाकू विमानों के लिए 686 मिलियन डॉलर का अपग्रेड पैकेज मिल चुका है. इस पैकेज से इन विमानों को अपग्रेड किया जाएगा, जिससे इन विमानों की उम्र 2040 तक बढ़ जाएगी.
दुश्मनों के पास कितनी है ताकत?
वहीं भारत को काउंटर करने के लिए चीन भी खुलकर पाकिस्तान को मदद कर रहा है. इनमें फाइटर जेट्स समेत मिसाइलों की आपूर्ति भी शामिल हैं. पाकिस्तान पहले ही चीन से मिले J-10C फाइटर जेट्स उड़ा रहा है. इन मिसाइलों में लंबी दूरी की PL-15 मिसाइलें लगी हैं. यह वही मिसाइलें है, जिन्हें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान के एयर डिफेंस सिस्टम ने सफलतापूर्वक मार गिराया था. अब पाकिस्तानी वायुसेना चीन से पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर J-35 को हासिल करने की कोशिश में हैं. ऐसा होने की स्थिति में भारत के लिए खतरा और बढ़ जाएगा. जिससे निपटना भारत के लिए मुश्किल हो सकता है.
अगर चीन की बात करें तो उसके पास पहले से ही पांचवी पीढ़ी के करीब 400 J-20 लड़ाकू विमान हैं. जो उसे आसमान में भारत के मुकाबले बढ़त प्रदान करते हैं. दोनों देश मिलकर अब अपने फाइटर फ्लीट को लगातार आधुनिक बनाने में जुटे हैं, जिससे क्षेत्रीय सैन्य संतुलन में बड़ा बदलाव आ रहा है. ऐसे माहौल में भारत का राफेल पर भरोसा करना एक सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है.
अब भारत आएंगे दुश्मनों के महा-काल
राफेल पहले ही भारतीय वायुसेना में अपनी क्षमता साबित कर चुका है. ऑपरेशन सिंदूर” में भारत ने राफेल विमानों से पाकिस्तान को बड़ा नुकसान पहुंचाया था. उसकी मारक क्षमता, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और लंबी दूरी से हमला करने की क्षमता के सामने पाकिस्तान पस्त हो गया था. भारत के पास फिलहाल राफेल F3R संस्करण का 4.5 पीढ़ी का लड़ाकू विमान है. इसमें मेटियोर मिसाइल, स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और अत्याधुनिक सेंसर लगे हैं. भारत की जरूरतों को देखते हुए इसमें कई जरूरी बदलाव किए गए हैं.
अब भारत जो F4 संस्करण के जो नए राफेल लेने की योजना बना रहा है, वह मौजूदा विमानों से भी ज्यादा आधुनिक होंगे. इस प्लेन में बेहतर नेटवर्क-कनेक्टिविटी, हाईटेक रडार और स्टेल्थ लक्ष्यों को दूर से पकड़ने की क्षमता होगी. वहीं F5 संस्करण के सुपर राफेल की बात की जाए तो वह पांचवीं और छठी पीढ़ी के बीच की कड़ी माना जा रहा है. इसमें और भी शक्तिशाली इंजन, नए हथियार, अत्याधुनिक जैमिंग सिस्टम और हाइपरसोनिक मिसाइल ले जाने की क्षमता होगी.
भारत की इस रणनीति के मायने समझिए
इस पूरी प्रक्रिया का बड़ा पहलू 'मेक इन इंडिया' है. यानी फ्रांस से रफाल के कलपुर्जे लाकर उन्हें भारत में ही असेंबल किया जाएगा. इसके लिए देश की प्राइवेट कंपनियों को भी कॉन्ट्रेक्ट मिलेंगे, जिससे भारत में नए रोजगार पैदा होंगे. फ्रांस की कंपनी सफ्रान हैदराबाद में राफेल इंजन के रखरखाव के लिए सुविधा केंद्र स्थापित कर रही है.
राफेल की प्रस्तावित खरीदे के साथ भारत जियो-पॉलिटिक्स में एक बड़ा संदेश देने की भी कोशिश कर रहा है. असल में जब से ट्रंप प्रशासन ने अधिक टैरिफ की वजह से भारत को अलग-थलग करना शुरू किया. उसके बाद भारत ने भी बिना झुके मौन लेकिन दृढ जवाब देना शुरू किया. ट्रंप को जवाब देने के लिए भारत ने चीन और रूस के साथ करीबी बढ़ाई. साथ ही यूरोपीय संघ (EU), फ्रांस और जर्मनी जैसे यूरोपीय मित्र देशों के साथ मजबूत किया.
बढ़ती सुरक्षा चुनौती से निपटने के लिए भारत न केवल राफेल लड़ाकू विमानों के खरीद प्रस्ताव पर आगे बढ़ता दिख रहा है. इसके साथ ही रूस के साथ पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Su-57 पर बातचीत शुरू करने का संकेत दे रहा है. इससे साफ है कि भारत रूस, अमेरिका और यूरोप से सैन्य संसाधनों में संतुलन बनाते हुए अपने स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म को भी आगे बढ़ा रहा है.