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नवरात्र प्रतिपदा को चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग, सिर्फ अभिजित मुहूर्त में कलश स्थापना, जौ बोने से दुर्गा लक्ष्मी का आगमन

शारदीय नवरात्र का शुभारंभ कलश स्थापना के साथ होता है। कलश में ही सबसे पहले वरुण देवता का आवाहन किया जाता है। घट जल का आधार है और जल वरुण देवता का प्रतीक है। वेदों में वरुणदेव को पाश-बन्धनों से मुक्ति दिलाने वाला देवता माना गया है। जब मनुष्य बंधनों में बंधा रहता है तब तक वह पशु के समान होता है। इसीलिये कलश स्थापना करके, मनुष्य सबसे पहले बंधन से मुक्ति होता है, उसके बाद देवी आराधना के लिये शुद्ध होता है। बिना बंधन से मुक्ति पाये, शक्ति की आराधना नहीं हो सकती। बिना शक्ति की के मनुष्य कर्म भी नहीं कर सकता। बिना कर्म किये कोई सफलता कैसे पा सकता है। इसीलिये सबसे पहले कलश स्थापना की जाती है। आइये आपको बताते हैं कि कैसे नवरात्र में करें कलश स्थापना?

नवरात्र प्रतिपदा को चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग, सिर्फ अभिजित मुहूर्त में कलश स्थापना, जौ बोने से दुर्गा लक्ष्मी का आगमन
फाइल फोटो

दिल्ली: शारदीय नवरात्र का शुभारंभ कलश स्थापना के साथ होता है। कलश में ही सबसे पहले वरुण देवता का आवाहन किया जाता है। घट जल का आधार है और जल वरुण देवता का प्रतीक है। वेदों में वरुणदेव को पाश-बन्धनों से मुक्ति दिलाने वाला देवता माना गया है। जब तक मनुष्य बंधनों में बंधा रहता है तब तक वह पशु के समान होता है। इसीलिये कलश स्थापना करके, मनुष्य सबसे पहले बंधन से मुक्ति होता है, उसके बाद देवी आराधना के लिये शुद्ध होता है। बिना बंधन से मुक्ति पाये, शक्ति की आराधना नहीं हो सकती। बिना शक्ति के मनुष्य कर्म भी नहीं कर सकता। बिना कर्म किये कोई सफलता कैसे पा सकता है। इसीलिये सबसे पहले कलश स्थापना की जाती है। आइये आपको बताते हैं कि कैसे नवरात्र में करें कलश स्थापना?

-13 अक्टूबर को कलश स्थापना का शुभ समय
 नवरात्र इस बार चित्रा नक्षत्र और  वैधृति योग में शुरु हो रहे हैं। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार वैधृति योग और चित्रा नक्षत्र में घट स्थापना नहीं की जाती। सिर्फ  अभिजित मुहूर्त में ही ऐसे संयोग में घट स्थापना हो सकती है।

-13 अक्टूबर को कलश स्थापना का अभिजित मुहूर्त
 दोपहर 12 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक
-कलश स्थापना के लिये पूजन सामग्री
 सबसे पहले 10 सुपारी, 10 लौंग, 10 इलायची, 10 पान सिंदूर, लाल चुनरी, रोली,मौली मिसरी, पंचमेवा और ऋतुफल,  धूप दीप, अगरबत्ती और फूल एक जगह  रखें। 
-कैसे करें कलश स्थापना?
-मां दुर्गा के सामने अखंड दीप प्रज्जवलित करें।
-पूर्व दिशा में गणपति, उनके दाहिनी ओर महागौरी की स्थापना करें।
-फिर ब्रह्मा, विष्णु, महालक्ष्मी, काली, सरस्वती की स्थापना करें।
-इसके बाद बजरंगबली का आवाहन करें।
-बाद में देवी का आवाहन इस मंत्र से करें।
-देवी का आवाहन मंत्र
-सदा भवानी दाहिने सम्मुख सदा गणेश
-पांच देव रक्षा करें ब्रह्मा विष्णु, महेश

-इसके बाद दुर्गा सप्तशति के इस मंत्र से नवदुर्गा की स्थापना करें- 
-प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्माचारिणी। तृतीय चंद्रघण्टेति कुष्माण्डेति चतुर्थकम्।
-पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रि महागौरीति चाऽष्टम्।

-नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिताः। 
इसके बाद लौंग, इलायची, पत्र, पुष्प,पान, मिठाई फल अर्पित करें। उत्तर या उत्तरपूर्व में कलश स्थापना करें। उत्तर में मिट्टी के कसोरे में जौ और दक्षिण पूर्व या दक्षिण में अखंड ज्योति की स्थापना करें। देवताओं का ध्यान करें और परिवार समेत, मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिये मन में कामना करें और दुर्गा सप्तशति का पाठ करें।

-क्यों बोया जाता है जौ?
जौ वर्धनशील अन्न है।‘पयसो रूपं यद्यवाः’यानि जौ पय का रूप है।‘पयः पिबतेर्वा प्यायतेर्वा’। श्रुति कहती है कि यवोsसि धान्यराजोsसि। इसलिये महालक्ष्मीरूप शक्ति उपासना क्रम में समृद्धि और वृद्धि के प्रतीक स्वरूप जौ बोये जाते हैं। इसलिये प्रतिपदा तिथि को इस बार जौ बोकर, माता लक्ष्मी को इस बार दिवाली तक अपने घर आमंत्रित करें।

-अष्टमी और नवमी की पूजन विधि
 अष्टमी और नवमी को कन्यापूजन से पहले, हवन करना चाहिये। प्रसाद की आहुति देनी चाहिये। गणपति, महालक्ष्मी, महागौरी,सरस्वती को स्थापित कर, उनकी  आरती करें और उसके बाद देवताओं को विदा करके उनका आभार प्रकट करना चाहिये।

-नवरात्र में कब और कैसे खिलायें कन्या?
 अष्टमी या नवमी के दिन 9 कन्या और एक लांगूर को हलवा, पूड़ी और चने और लाल वस्त्र, फल और 11 या 21 रुपए दक्षिणा देकर आशीर्वाद लें। कन्याओं की  आयु 8 से 10 साल के बीच हो। सबसे बड़ी कन्या से, जल का छिड़काव कर आशीर्वाद लें।

-नवरात्र में छात्र कब करें पूजन?
 नवरात्र में प्रतिपदा से तृतीया तक महाकाली, चतुर्थी से षष्ठी तक महालक्ष्मी, सप्तमी से नवमी तक महासरस्वती के होते हैं। छात्रों को सप्तमी,अष्टमी और नवमी  का नवरात्र व्रत रखना चाहिये। ऐसा करने वाले छात्रों को परीक्षा प्रतियोगिता में सफलता मिलती है। 

 

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