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नागरिकता संशोधन विधेयक को संसद की मंजूरी

संसद में आज नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2015 को मंजूरी मिल गयी जो इससे संबंधित अध्यादेश के स्थान पर लाया गया था। इसके माध्यम से नागरिकता कानून में प्रवासी भारतीयों के पंजीकरण को उदार बनाने के साथ उनके जुडे प्रावधानों को लागू करने से संबंधित खामियों को दूर करने का प्रयास किया गया है।

नई दिल्ली : संसद में आज नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2015 को मंजूरी मिल गयी जो इससे संबंधित अध्यादेश के स्थान पर लाया गया था। इसके माध्यम से नागरिकता कानून में प्रवासी भारतीयों के पंजीकरण को उदार बनाने के साथ उनके जुडे प्रावधानों को लागू करने से संबंधित खामियों को दूर करने का प्रयास किया गया है।

राज्यसभा में इस विधेयक पर हुई चर्चा के जवाब में गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि यह अध्यादेश लाना इसलिए जरूरी हो गया था क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका और आस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लोग (पीआईओ) एवं ओवरसीज सिटीजंस आफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड का नौ जनवरी से पहले विलय करने की प्रतिबद्धता जतायी थी। नौ जनवरी 1915 को ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे और मौजूदा साल इसका शताब्दी वर्ष है।

रिजिजू ने कहा कि यह यह एक भावनात्मक मामला था इसलिए अध्यादेश लाया गया। रिजिजू के जवाब के बाद राज्यसभा ने इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है।

इस विधेयक के जरिये नागरिकता कानून 1955 में संशोधन किया जायेगा। इसमें पीआईओ और ओसीआई कार्ड को एक साथ मिला देने की बात कही गई है। रिजिजू ने कहा कि इस विधेयक के प्रावधानों के अनुसार अब ओसीआई कार्डधारकों का लाभ उनकी चौथी पीढ़ी तक के बच्चों को मिलेगा। यह सुविधा अभी केवल पीआईओ कार्डधारकों को ही मिल रही है। उन्होंने कार्डधारकों के साथ भेदभाव या उन्हें परेशान किये जाने के मुद्दों पर सदन को आश्वासन दिया कि कार्ड हासिल करने की पूरी प्रक्रिया को सुगम बनाया जायेगा।