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अवैध प्रवासियों या घुसपैठियों की संख्‍या का पता लगाना बेहद जरूरी, NRC भविष्य के लिए : CJI

देश के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि हम NRC दस्‍तावेज के जरिये भविष्‍य में होने वाले दावों पर निर्णय ले सकते हैं.

अवैध प्रवासियों या घुसपैठियों की संख्‍या का पता लगाना बेहद जरूरी, NRC भविष्य के लिए : CJI
प्रधान न्यायाधीश, मृणाल तालुकदार की किताब 'पोस्ट कॉलोनियल असम' के विमोचन पर बोल रहे थे.

नई दिल्ली: देश के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) ने असम एनआरसी (Assam NRC) का बचाव करते हुए कहा है कि अवैध प्रवासियों या घुसपैठियों की संख्‍या का पता लगाना बेहद जरूरी था. असम एनआरसी (NRC) ने यही किया. एनआरसी मौजूदा समय का दस्‍तावेज नहीं है बल्कि भविष्‍य पर आधारित दस्‍तावेज है. उन्‍होंने कहा कि हम इस दस्‍तावेज के जरिये भविष्‍य में होने वाले दावों पर निर्णय ले सकते हैं. प्रधान न्यायाधीश, मृणाल तालुकदार की किताब 'पोस्ट कॉलोनियल असम' के विमोचन पर बोल रहे थे. 

न्यायमूर्ति गोगोई ने कहा, "उन्नीस लाख या 40 लाख कोई मुद्दा नहीं है बल्कि यह भविष्य के लिए आधार दस्तावेज है. भविष्य के दावों को निर्धारित करने के लिए इस दस्तावेज का जिक्र कर सकते हैं. मेरी राय में एनआरसी का वास्तविक महत्व आपसी शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में है."

उन्‍होंने एनआरसी मुद्दे पर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों की ओर से फैलाई जा रही गलत बातों पर भी बोला. न्यायमूर्ति गोगोई ने कहा कि एनआरसी पर राष्ट्रीय संवाद के दौरान टिप्पणीकारों ने एक विकृत तस्वीर पेश की है. उन्होंने एनआरसी पर आक्षेप लगाने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वालों की निंदा की.

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उन्होंने कहा, "सोशल मीडिया और इसके टूल का इस्तेमाल बहुत से टिप्पणीकारों द्वारा इस मुद्दे पर दोहरी बात करने के लिए किया गया है. उन्होंने एक लोकतांत्रिक संस्थान पर दुर्भावना से प्रेरित होकर आक्षेप लगाना शुरू किया है."