NRC के फाइनल ड्राफ्ट के लिए 30 अगस्त तक दर्ज किए जाएंगे दावे और अपत्तियां

इससे पहले NRC कॉर्डिनेटर ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि जिन लोगों के नाम दूसरे ड्राफ्ट में शामिल नहीं किये गए है, वो 7 अगस्त के बाद इसकी वजह जान सकते है और 30 अगस्त के बाद नागरिकता को लेकर अपनी आपत्तियां या फिर दावे दर्ज करा सकते है.

NRC के फाइनल ड्राफ्ट के लिए 30 अगस्त तक दर्ज किए जाएंगे दावे और अपत्तियां
फाइल फोटो

नई दिल्ली : असम NRC मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई.जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्टेट क्वार्डिनेटर को निर्देश दिया कि वह सील बंद लिफ़ाफ़े मे जनसंख्या के अनुपात के हिसाब से जिलेवार उन लोगों की सूची दे जो NRC ड्राफ़्ट लिस्ट से बाहर हैं.30 अगस्त से NRC के फ़ाइनल ड्राफ़्ट के लिए दावे और आपत्तियां ली जाएंगी.

कोर्ट ने सरकार की ओर से आपत्तियां और दावे पेश करने के लिए तैयार SOP पर तीन याचिकाकर्ताओं और आल असम स्टूडेंट्स यूनियन, आल असम माइनॉरिटी यूनियन और जमीयत उलेमा हिन्द का नज़रिया लिया जाए.कोर्ट ने साफ़ किया कि किसी भी राजनैतिक दल का नज़रिया या मशविरा नहीं लिया जाएगा.दरअसल, पिछली सुनवाई में केंद्र सरकार ने कोर्ट बताया था कि उसने NRC के ड्राफ्ट में जगह न पा सके लोगों के दावे और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया बना ली है.कोर्ट ने कहा था कि इसे रजिस्ट्री में जमा करवा दें.

इससे पहले NRC कॉर्डिनेटर ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि जिन लोगों के नाम दूसरे ड्राफ्ट में शामिल नहीं किये गए है, वो 7 अगस्त के बाद इसकी वजह जान सकते है और 30 अगस्त के बाद नागरिकता को लेकर अपनी आपत्तियां या फिर दावे दर्ज करा सकते है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ऐसे सभी लोगों को अपने दावे साबित करने केलिए पर्याप्त मौका मिलना चाहिए.कोर्ट ने NRC कोऑर्डिनेटर से लिस्ट में शामिल न किये गए लोगों के दावो की पुष्टि के लिए अपनाएं जाने वाली प्रकिया की जानकारी (मानक कार्य प्रक्रिया) मांगी थी. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि NRC के दूसरे ड्राफ्ट के रिलीज के आधार पर अथॉरिटी किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकतीं और जिन लोगों के नाम छूट गए है, उन्हें पूरा मौका मिलने के बाद ही कोई एक्शन लिया जाएगा.

NRC ड्राफ्ट पर गरमाई थी राजनीतिक
पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि बहुत से ऐसे लोग हैं, जिनके पास आधार कार्ड और पासपोर्ट है. लेकिन इसके बावजूद उनका नाम ड्राफ्ट में शामिल नहीं किया गया है.उन्‍होंने आरोप लगाया था कि 'सरनेम' देखकर लोगों के नाम ड्राफ्ट लिस्‍ट में से हटाए गए हैं. क्‍या क्या सरकार बलपूर्वक कुछ लोगों को देश से बाहर निकालने की कोशिश कर रही है? लोगों को योजनाबद्ध तरीके से बाहर करने की साजिश की जा रही है. हम इस बात को लेकर चिंतित हैं कि लोगों को उनके देश में ही शरणार्थी बना दिया गया है.ममता बनर्जी ने चेतावनी देते हुए कहा था कि यह बांग्‍ला बोलने वाले लोगों और बिहारियों को राज्‍य से बाहर फेंकने की योजना है. नतीजे हमारे राज्य में भी महसूस किए जाएंगे. एनआरसी के ड्राफ्ट में जिन 40 लाख लोगों के नाम नहीं हैं, वे कहां जाएंगे? क्‍या केंद्र सरकार के पास इन लाखों लोगों के लिए कोई पुनर्वास कार्यक्रम है? अंत में इस कदम से पश्चिम बंगाल की सरकार को सबसे ज्‍यादा परेशानी का सामना करना पड़ेगा. 

यह है मामला 
असम में नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (NRC) का फाइनल ड्राफ्ट सोमवार को जारी होने के बाद 40 लाख से ज्यादा लोगों का भविष्य अधर में लटक गया था. ये ऐसे लोग हैं जिनका नाम ड्राफ्ट में नहीं है. केंद्र सरकार ने भी इन लोगों की नागरिकता की स्थिति पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था. आपको बता दें कि NRC ड्राफ्ट में 2.89 करोड़ लोगों का नाम शामिल है जबकि असम में 3.29 करोड़ लोगों ने आवेदन दिया था. 40 लाख लोगों के नाम रजिस्टर में क्यों नहीं है, इसके कारणों को सार्वजनिक नहीं किया गया है. हालांकि चार श्रेणियां जरूर बताई गई हैं, जिनसे जुड़े लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए. वह है, ‘D (संदिग्ध) वोटर्स, D वोटर्स के बच्चे व परिवार के लोग, जिनके मामले विदेशी न्यायाधिकरण में लंबित हैं और उनके बच्चे.