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MP: जिला प्रशासन ने पेश की गुड गवर्नेंस की मिसाल, सीएम कमलनाथ ने दी बधाई

हर साल नाग पंचमी पर पचमढ़ी में नागद्वारी मेला लगता है. सतपुड़ा की पहाड़ियों में बेहद दुर्गम स्थान पर नागद्वार स्वामी का मंदिर है.

MP: जिला प्रशासन ने पेश की गुड गवर्नेंस की मिसाल, सीएम कमलनाथ ने दी बधाई
मेले में महाराष्ट्र विदर्भ सहित अनेक जिलों से श्रद्धालु भोलेशंकर के दर्शन पूजन के लिए एकत्र होते हैं.

पीताम्बर जोशी/होशंगाबाद: मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले में प्रशासन ने सरकारी खर्चों में कटौती कर गुड गवर्नेंस की एक बड़ी मिसाल पेश की है. यहां प्रशासन ने 64 लाख रुपए में होने वाला नागद्वारी मेला 10 लाख रुपए में करवा दिया. इसकी जानकारी होने पर प्रदेश के सीएम कमलनाथ ने ट्वीट कर अधिकारियों को शाबासी दी. सीएम कमलनाथ ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि होशंगाबाद जिले में सरकारी नागद्वारी मेले के आयोजन में जिला प्रशासन ने वर्षों से हो रहे अनावश्यक व्यय पर रोक लगाकर, खर्च प्रबंधन से इस वर्ष लाखों की बचत कर गुड गवर्नेंस की मिसाल पेश की है.

आपको बता दें कि हर साल नाग पंचमी पर पचमढ़ी में नागद्वारी मेला लगता है. सतपुड़ा की पहाड़ियों में बेहद दुर्गम स्थान पर नागद्वार स्वामी का मंदिर है. मेले में महाराष्ट्र विदर्भ सहित अनेक जिलों से श्रद्धालु भोलेशंकर के दर्शन पूजन के लिए एकत्र होते हैं. 10 दिनों तक 15 से 20 किलोमीटर दुर्गम पहाड़ी मार्ग की पैदल यात्रा पूरी कर भक्त नागद्वार गुफा पहुंचते हैं. मेले से पूर्व हर साल बारिश शुरू हो जाती है, हर बार की तरह इस बार भी मेला प्रशासन द्वारा मेले का आयोजन किया गया. लेकिन इस बार खर्च ज्यादा ना करते हुए 90 फ़ीसदी से ज्यादा की बचत की गई.

 

 

मेले के लिए बजट करीब 64 लाख रखा गया था, क्योंकि पिछले 5 सालों में मेले पर 50 लाख से अधिक खर्च आया. लेकिन इस बार मेला प्रशासन ने बड़ी सूझबूझ दिखाई और 64 लाख में होने वाले मेले को 10 लाख रुपए में करा दिया. इस बार सरकारी स्टाफ ने होटलों के बजाय भंडारे में भोजन किया. इस बार 70 हज़ार में श्रद्धालुओं की व्यवस्था हो गई, जबकि पिछली बार खर्च 22 लाख तक पहुंच गया था.

वहीं, इस बार चढ़ोत्तरी की नीलामी से 36 लाख रुपए, दुकान और स्टैंड की नीलामी से 6 लाख रुपये का लाभ हुआ. साथ ही मेले में कर्मचारियों, अधिकारियों ने पर्सनल सरकारी गाड़ियों का उपयोग ना कर पब्लिक ट्रांसपोर्ट से ट्रैवल किया. इस तरह पिछले साल की अपेक्षा प्रशासन के करीब 3 लाख की बचत हुई. पिछले साल डीजल और ट्रैवल पर 3.80 लाख खर्च हुए थे, इस साल केवल 1 लाख 50 हजार में काम पूरा हो गया.