एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयान में घमासान मचा हुआ है. इस बीच एआईएमआईएम के नेता वारिस पठान ने पार्टी का पक्ष रखा और बीजेपी तथा कांग्रेस पर जमकर प्रहार किया. उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लंबे समय तक सत्ता का सुख भोगने वाली पार्टियों ने मुसलमानों के उत्थान का काम नहीं किया.
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Maharashtra Politics: एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के उस बयान पर हंगामा बरपा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि एक दिन भारत में हिजाब पहनने वाली महिला भी देश की पीएम बनेगी. ओवैसी के इस बयान पर उठ रहे सवालों के बीच एएमआईएम के नेता वारिस पठान ने पार्टी का पक्ष रखा और बीजेपी तथा कांग्रेस पर एक साथ निशाना साधा.
दरअसल, वारिस पठान ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मुसलमानों को केवल वोटबैंक समझती है, लेकिन जब उनके तेतृत्व की बारी आती है तो पीछे हट जाती है. उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता अक्सर कहते रहते हैं कि फला व्यक्ति मेयर बन सकता है या फला व्यक्ति प्रधानमंत्री बन सकता है, लेकिन ओवैसी ने जो बात कही है, उसका मूल संदेश भारत के संविधान से जुड़ा है.
पाकिस्तान के संविधान का क्यों दिया उदाहरण?
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के संविधान में स्पष्ट रूप से लिखा है कि वहां सिर्फ एक खास धर्म का व्यक्ति ही प्रधानमंत्री बन सकता है, जबकि भारत का संविधान, जिसे डॉ भीमराव अंबेडकर ने तैयार किया, पूरी तरह से समानता पर आधारित है. आगे कहा कि भारतीय संविधान में कहीं नहीं लिखा है कि किसी खास धर्म, जाति या वर्ग का व्यक्ति ही प्रधानमंत्री, मेयर या किसी भी बड़े पद पर बैठ सकता है.
कांग्रेस पर जमकर बरसे पठान
आगे कहा कि भारत में किसी भी धर्म या किसी भी जाति का व्यक्ति, चाहे वह पुरुष हो या महिला, देश के सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है. इसी भावना के तहत एआईएमआईएम की यह उम्मीद और इच्छा है कि भविष्य में हिजाब पहनने वाली महिला भी प्रधानमंत्री या मेयर बन सकती है. इसके अलावा उन्होंने सवाल खड़ा किया कि कांग्रेस पार्टी को आखिर तकलीफ क्या हो रही है. वारिस पठान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की नीयत और मंशा साफ तौर पर दिखाई देती है, क्योंकि पार्टी को मुसलमानों की राजनीतिक नेतृत्व क्षमता या उनके राजनीतिक सशक्तिकरण से कोई वास्तविक सरोकार नहीं है.
'कांग्रेस को केवल मुसलमानों का वोट चाहिए'
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पठान ने कहा कि कांग्रेस पार्टी को केवल मुसलमानों का वोट चाहिए, लेकिन उन्हें नेतृत्व के अवसर देने में पार्टी हमेशा पीछे हटती रही है. अपने बयान के दौरान उन्होंने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान राज्य की 48 सीटों में से कांग्रेस ने एक भी मुसलमान उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया. जब मुसलमानों को उम्मीदवार ही नहीं बनाया जाएगा तो वे सांसद कैसे बनेंगे और आगे चलकर प्रधानमंत्री बनने की संभावना कैसे पैदा होगी?
वारिस पठान ने यह भी आरोप लगाया कि जो पार्टियां सालों तक सत्ता में पही हैं, उन्होंने सत्ता का सुख भोगा है, लेकिन मुसलमानों को केवल वोट बैंक समझा है. इनमें से किसी भी दल ने मुसलमानों की शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, जिसकी वजह से आज यह समुदाय सामाजित और राजनीतिक रूप से पिछड़ा हुआ है. पठान ने कहा कि आईएमआईएम इसी मानसिकता को बदलने और मुसलमानों को राजनीतिक नेतृत्व और सशक्तिकरण देने की लड़ाई लड़ रही है. (इनपुट- आईएएनएस)