Mata Vaishno Devi Shrine Board News: पूरी तरह हिंदुओं के पैसे से बने कटरा के श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस में मुस्लिमों को 70 प्रतिशत सीट अलॉट करने से विवाद बढ़ गया है. हिंदू संगठनों ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कॉलेज को अल्पसंख्यक दर्जा देने की मांग की है.
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Shri Mata Vaishno Devi Medical College Controversy News: जम्मू में श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. राष्ट्रीय बजरंग दल (RBD) और हिंदू संगठन मूवमेंट कल्कि ने कॉलेज में कश्मीरी छात्रों को ज्यादा तरजीह दिए जाने का आरोप लगाते हुए संस्थान को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा देने की मांग की है.
वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में मुस्लिमों को 70 प्रतिशत सीटें
बुधवार को RBD अध्यक्ष राकेश बजरंगी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने आरोप लगाया कि कॉलेज की 50 एमबीबीएस सीटों में से 42 सीटें कश्मीरी छात्रों को दी गई हैं, जबकि जम्मू के केवल 7 हिंदू और 1 सिख छात्र को ही प्रवेश मिला है.
हिंदू संगठनों ने जताया जोरदार विरोध
राकेश बजरंगी ने कहा, 'हम यह स्वीकार नहीं करेंगे कि हिंदुओं के दान से बने संस्थान में लगभग 70 प्रतिशत सीटें कश्मीरी छात्रों को दी जाएं. यह जम्मू के लोगों के साथ खुला भेदभाव है.' उन्होंने मांग की कि श्राइन बोर्ड और प्रशासन इस कॉलेज को जामिया मिल्लिया इस्लामिया या खालसा कॉलेज की तर्ज पर अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा दें, क्योंकि जम्मू-कश्मीर में अब हिंदू खुद अल्पसंख्यक हैं.
अधिकारी दे रहे ये सफाई
दूसरी ओर, अधिकारियों का कहना है कि प्रवेश पूरी तरह योग्यता (merit) के आधार पर किया गया है और धर्म के आधार पर आरक्षण का प्रावधान नहीं है. अधिकारियों ने कहा कि इस संस्थान को अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त नहीं है.
उधर, मूवमेंट कल्कि संगठन ने भी श्राइन बोर्ड कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए कहा कि हिंदुओं के पैसों से चलने वाले इस बोर्ड द्वारा बनाए गए कॉलेज में हिंदू छात्रों के लिए सीटें आरक्षित की जानी चाहिए.
राजनीतिक हलकों में भी बढ़ी नाराजगी
इस विवाद के बाद अब सामाजिक और राजनीतिक हलकों में भी नाराज़गी बढ़ गई है. डोगरा एक्टिविस्ट मनु खजुरिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, '600 करोड़ की लागत से हिंदू श्रद्धालुओं के दान से बना यह मेडिकल संस्थान जम्मू के रियासी जिले में है, जहां हिंदू अब अल्पसंख्यक हैं. इसके बावजूद पहले बैच में सिर्फ 7 हिंदू और 1 सिख छात्र को ही प्रवेश मिला है. यह प्रतिनिधित्व का गंभीर सवाल उठाता है.'
पूर्व मंत्री अजय नंदा ने भी मामले पर चिंता जताते हुए कहा कि यह कॉलेज माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की चैरिटी से प्राप्त धन से बनाया गया है. उन्होंने कहा कि बोर्ड के एक्ट में यह स्पष्ट है कि इसके सदस्य और अध्यक्ष हिंदू समुदाय से होंगे, इसलिए यह सवाल उठता है कि एक विशेष समुदाय को इतनी अधिक सीटें क्यों दी गईं.
हिंदुओं के संस्थान में हिंदुओं से अन्याय
उन्होंने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, जो श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं, से इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की है. यह विवाद अब सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों तक पहुंच चुका है. कई लोग इसे 'हिंदुओं के दान से बने संस्थान में हिंदुओं के साथ अन्याय' करार दे रहे हैं. प्रशासन ने हालांकि दोहराया है कि प्रवेश पूरी तरह पारदर्शी और मेरिट आधारित है.