देशों को अपनी जलवायु योजना की समीक्षा करना चाहिए: जयराम रमेश

पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने शनिवार को कहा कि देशों द्वारा सौंपी गयी जलवायु कार्ययोजना धरती के बढ़ते तापमान (ग्लोबल वार्मिंग) को दो डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए पर्याप्त नहीं है और ये देश इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपने वर्तमान स्वैच्छिक लक्ष्यों की अगले पांच सालों में समीक्षा करने का संकल्प लें।

देशों को अपनी जलवायु योजना की समीक्षा करना चाहिए: जयराम रमेश

पेरिस : पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने शनिवार को कहा कि देशों द्वारा सौंपी गयी जलवायु कार्ययोजना धरती के बढ़ते तापमान (ग्लोबल वार्मिंग) को दो डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए पर्याप्त नहीं है और ये देश इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपने वर्तमान स्वैच्छिक लक्ष्यों की अगले पांच सालों में समीक्षा करने का संकल्प लें।

रमेश ने कहा कि वैसे भारत ने अपनी बिजली का 40 फीसदी हिस्सा 2030 तक गैर जीवाश्म ईंधनों से हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है लेकिन उन्होंने चेताया कि बाकी 60 फीसदी हिस्सा जीवश्म ईंधनों से आने जा रहा है और यह भारत की जलवायु पहेली है। वह नेशनल एसेम्बली में दो दिवसीय ग्लोब कॉप 21 लेजिलेटर्स सम्मिट में अपनी बात रख रहे थे।

बाद में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए रमेश ने कहा कि वर्ष 2009 और 2010 के जलवायु सम्मेलनों में उनका रूख था कि भारत 2020 तक अपनी उत्सर्जन तीव्रता घटाएगा और इस बात की भारत ने कड़ी आलोचना की थी कि हर देश को जिम्मेदारी लेने होगी। और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार वही रूख अपना रही है।