कभी सूखे से किसान थे परेशान, जानिए कैसे अब कर रहें लाखों की कमाई

जब से उस्मानाबाद में नागझरवाडी गांव के किसानों ने अपनी फसल का पैटर्न बदला है तब से गांव की तस्वीर ही बदल गई है.

कभी सूखे से किसान थे परेशान, जानिए कैसे अब कर रहें लाखों की कमाई
उस्मानाबाद का नागझरवाडी गांव बना आलू उत्पादन का हब.

मुस्तान मिर्झा​ ,उस्मानाबाद: महाराष्ट्र (Maharashtra) के उस्मानाबाद जिले की पहचान सूखा प्रभावीत क्षेत्र की है. सूखे की वजह से यहां के किसानों को खेती में बहुत नुकसान होता है लेकिन जब से उस्मानाबाद में नागझरवाडी गांव के किसानों ने अपनी फसल का पैटर्न बदला है तब से गांव की तस्वीर ही बदल गई है. किसानों ने ज्यादा पानी से उगने वाले प्याज, सोयाबीन, ज्वार और बाजरा का उत्पादन छोड़कर आलू बोने से लाखों रुपए की कमाई की है.

बता दें कि पिछले 4 साल से नागझरवाडी गांव के किसानों ने उस्मानाबाद में सूखे के कारण कम पानी वाली फसल को चुना. अब पूरे गांव की लगभग 400 एकड़ जमीन पर आलू की फसल बोई जाती है. अब गांव के किसान करीब 3 हजार टन आलू का उत्पादन करते हैं. पहले पानी की कमी की वजह से प्याज, सोयाबीन, ज्वार और बाजरा की फसल बर्बाद हो जाती थी.

किसानों के आलू चुनने के पीछे एक और कारण भी है. आलू की फसल कम पानी के साथ कम समय में भी पैदा हो जाती है. आलू की फसल तैयार होने में केवल 90 दिन ही लगते हैं. आलू की फसल में एक और खासियत भी कि इसमें सिंचाई करना 10 दिन लेट भी हो जाए तो फसल खराब नहीं होती है. 1 एकड़ में 30 से 40 हजार रुपए का निवेश से डेढ़ से दो लाख रुपए की पैदावार हो जाती है.

महाराष्ट्र के पुणे के मंचर इलाके में आलू का सबसे अधिक उत्पाद किया जाता है इसीलिए गांव के किसान आलू के बीज मंचर इलाके से ही लाते हैं. आलू के बीच लाने के लिए किसान 10-15 का ग्रुप बनाकर जाते हैं. इससे आलू का औसत मूल्य स्थिर रहता है और किसानों को फायदा होता है.

नागझरवाडी गांव के किसान विजय कुमार पोकले ने ज़ी मीडिया को बताया, "आलू उत्पादन से हमें आर्थिक फायदा हुआ है. प्याज के उत्पाद के लिए ज्यादा समय और मजदूरी लगती थी, वही आलू कम पानी और कम समय में उगता है. आलू का औसत मूल्य स्थिर रहने से फायदा होता है. गांव के करीब 250 किसान आलू का उत्पादन करने में लगे हैं."

उस्मानाबाद के कृषि अधिकारी भुजुंग लोकरे ने बताया, "इस गांव के किसानों ने एकजुटता दिखाते हुए सफल खेती का उदाहरण सामने रखा है. इसी तरह अन्य गांव के लोगों को भी आधुनिक और प्रायोगिक खेती करनी चाहिए. जिससे ज्यादा से ज्यादा मुनाफा हो. कृषि विभाग से जो कुछ मदद चाहिए हम देने के लिए तैयार हैं."

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