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NIA की गिरफ्त में आए दानिश के ‘आत्महत्या हराम’ तर्क ने कैसे बदल दी थी दिल्ली ब्लास्ट की पूरी साजिश?

Delhi Blast: लाल किले के पास हुए विस्फोट की जांच में NIA को बड़ी सफलता मिली है. एजेंसी ने कश्मीर से जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश को गिरफ्तार किया है. शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, जसीर एक सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा था, जो जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़ा बताया जा रहा है. जसीर, जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के काजीगुंड का रहने वाला है और विज्ञान का छात्र है. 

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Delhi Blast: लाल किले के पास हुए विस्फोट की जारी जांच के बीच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कश्मीर के जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश को गिरफ्तार किया है. शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, जसीर एक सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा था, जो जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़ा बताया जा रहा है. 25 वर्षीय जसीर, जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के काजीगुंड का रहने वाला है और विज्ञान का छात्र है. अधिकारियों का दावा है कि वह मॉड्यूल का सक्रिय सह-साजिशकर्ता था और उसने आत्मघाती हमलावर डॉ. उमर उन नबी के साथ मिलकर काम किया था.

कैसे हुआ जसीर का कट्टरपंथ की ओर रुझान?

जांच एजेंसियों के अनुसार, अक्टूबर 2023 में जसीर की पहली मुलाकात इस मॉड्यूल के सदस्यों से दक्षिण कश्मीर की कुलगाम मस्जिद में हुई. उसी समय उसे धार्मिक ग्रंथों और भारत-विरोधी आख्यानों के मिश्रण से धीरे-धीरे कट्टरपंथ की ओर धकेला गया. डॉ. उमर उन नबी ने उसे आत्मघाती हमले के लिए तैयार करने की कोशिश की, लेकिन जसीर ने इस्लाम में आत्महत्या हराम होने का हवाला देकर इससे पीछे हट गया.

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ड्रोन और रॉकेट तकनीक का टेक सपोर्ट

अधिकारियों का कहना है कि जसीर तकनीकी रूप से कुशल था और उसने मॉड्यूल को ड्रोन मॉडिफिकेशन, इम्प्रोवाइज़्ड रॉकेट और विस्फोटक तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहायता प्रदान की. उसकी तकनीकी जानकारी को अनौपचारिक इंटरनेट स्रोतों से विकसित माना जा रहा है. रिपोर्टों के अनुसार, जसीर को 2023 के अंत में डेढ़ महीने के लिए और 2025 की शुरुआत में कुछ दिनों के लिए फरीदाबाद के अल-फलाह विश्वविद्यालय के पास एक किराए के घर पर ले जाया गया, जहां उमर ने उसे ड्रोन, विस्फोटक और प्रोटोटाइप रॉकेट बनाने का प्रशिक्षण दिया. शुरुआत एक छोटे स्तर के ओवर-ग्राउंड वर्कर (OGW) के रूप में हुई थी, लेकिन 2025 तक उसे मॉड्यूल का टेक्निकल विशेषज्ञ बना दिया गया था.

जसीर ने बनाई थी हमले की योजना

जानकारी के अनुसार, अप्रैल 2025 में जसीर ने आर्थिक तंगी और धार्मिक आपत्तियों का हवाला देकर आत्मघाती हमला करने से इनकार कर दिया था. इसके बाद उमर उन नबी ने खुद यह भूमिका निभाई, जबकि जसीर को सहायक भूमिका में रखा गया. उसे 10 नवंबर 2025 तक मॉड्यूल की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहने का आरोप है. जसीर एक सामान्य ग्रामीण परिवार से आता है. उसके पिता बिलाल अहमद वानी (55) ड्राई फ्रूट विक्रेता थे. 17 नवंबर 2025 को जसीर व उसके चाचा की गिरफ्तारी के बाद अपने बेटे से मिलने की अनुमति न मिलने पर बिलाल अहमद ने घर में खुद को आग लगा ली. बाद में गंभीर जलने से उनकी मौत हो गई.

एजेंसियों का मानना है कि जसीर जिस मॉड्यूल का हिस्सा था, उसने लाल किले विस्फोट से पहले एक बड़े हमले की योजना बनाई थी. ड्रोन और छोटे रॉकेट का इस्तेमाल हमास-स्टाइल हमलों की नकल में किया जा रहा था. जांच अभी जारी है और NIA आने वाले दिनों में इस मॉड्यूल की पूरी संरचना और अंतरराज्यीय नेटवर्क को उजागर कर सकती है.

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Shashank Shekhar Mishra

ज़ी न्यूज में बतौर सब एडिटर कार्यरत. देश की राजनीति से लेकर दुनिया के बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों एवं घटनाओं को कवर करते हैं. पत्रकारिता में 5 वर्षों का अनुभव है. इससे पहले टाइम्स नाउ नवभारत, जागरण...और पढ़ें

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