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भारतीय युवाओं के खून में 'जहर' घोलना चाहता है दाऊद, पाकिस्तान में बैठकर बनाया ये प्लान

ये वही इशक्जाइ से है जिसे साल 2011 में खुद अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ड्रग्स माफिया घोषित किया था. 

भारतीय युवाओं के खून में 'जहर' घोलना चाहता है दाऊद, पाकिस्तान में बैठकर बनाया ये प्लान
ख़ुफ़िया एजेंसियों को मिली ताज़ा जानकारी के मुताबिक दाऊद ने पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई की मदद से इशक्जाइ को पाकिस्तान में सुरक्षित पनाह मुहैया करवाई है.

नई दिल्ली: खुफ़िया एजेंसियों को देश में लगातार बढ़ रही ड्रग्स की तस्करी को लेकर एक सनसनीखेज़ जानकारी हाथ लगी है. ख़ुफ़िया एजेंसियों को मिली जानकारी के मुताबिक डी कंपनी के सरगना को अपने ड्रग्स कारोबार को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए इंटरनेशनल पार्टनर मिल चुका है. ये पार्टनर कोई और नहीं बल्कि ड्रग्स की दुनिया के सबसे बदनाम नामों में से एक अफ़ग़ानिस्तान का हाजी इशक्जाइ है. ख़ुफ़िया जानकारी के मुताबिक, दाऊद ने इशक्जाइ की मदद से अफ्रीका महाद्वीप के सूडान, इथोपिया, केन्या, तंज़ानिया, ज़िम्बाब्वे, नामीबिया और घाना इन 7 देशों में अपना ग्राउंड नेटवर्क भी बना लिया है.

बता दें कि ये वही इशक्जाइ से है जिसे साल 2011 में खुद अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ड्रग्स माफिया घोषित किया था. इसी के बाद अफगानिस्तान और अमेरिकी एजेंसियों ने एक बड़ी कामयाबी को अंजाम देते हुए एक साल के भीतर साल 2012 में उसे गिरफ्तार भी कर लिया. इसके बाद साल 2013 में काबुल की एक विशेष अदालत ने इशक्जाइ को ड्रग्स तस्करी के मामले में दोषी पाते हुए 20 साल कैद की सजा सुनाई.

एजेंसियां इशक्जाइ को ज्यादा समय तक कैद नहीं रख पायीं. ड्रग्स सरगना इशक्जाइ ने कथित तौर पर कुछ अधिकारीयों को घूस देकर खुद को काबुल की जेल से कंधार की जेल में ट्रांसफर करवा दिया. इसके बाद कंधार जेल के सुरक्षाकर्मियों के साथ मिलीभगत कर फ़रार हो गया. एजेंसियों के पास मौजूद जानकारी के मुताबिक इशक्जाइ अफगानिस्तान बॉर्डर पार कर पाकिस्तान के क्वेटा शहर में छिपा हो सकता है.

 

ख़ुफ़िया एजेंसियों को मिली ताज़ा जानकारी के मुताबिक दाऊद ने पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई की मदद से इशक्जाइ को पाकिस्तान में सुरक्षित पनाह मुहैया करवाई है. बदले में वो इशक्जाइ के मध्य एशिया और यूरोप में फैले स्मगलिंग नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा है. सूत्रों का दावा है कि इशक्जाइ के साथ अपने इस जॉइंट वेंचर के ज़रिये डी कंपनी का ड्रग्स का कारोबार अब कई देशों में फ़ैल चुका है और इसी के तहत पिछले 3 सालों में अफ़ग़ानिस्तान से पाकिस्तान के रास्ते ड्रग्स की बड़ी खेप भारत पहुंचाई गयी. 

इसके लिए दाऊद ने अपने गुर्गों का इस्तेमाल कर अलग-अलग रास्ते और अलग-अलग मोडस ऑपरेंडी इस्तेमाल की. इसमें अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते फलों में छिपाकर ड्रग्स की तस्करी, समंदर के रास्ते गुजरात और मुंबई के बंदरगाहों पर जूट के बैगों में ड्रग्स की स्मगलिंग, बांग्लादेश और म्यांमार बॉर्डर के रास्ते नार्थ ईस्ट के अलग अलग राज्यों से होते हुए मुंबई-दिल्ली तक ड्रग्स कन्साइनमेंट पहुंचाना, इत्यादि शामिल हैं.

सूत्रों का कहना है कि दाऊद के ड्रग्स के कारोबार को संभालने वाले उसके खासमखास गुर्गे इक़बाल मिर्ची की लंदन में हुयी मौत के बाद डी कंपनी का ड्रग्स का काला धंधा लगभग चौपट होने की कगार पर था और तब से उसे एक पार्टनर की तलाश थी. ख़ुफ़िया एजेंसियों को पता चला है कि हाजी इशक्जाइ और दाऊद दोनों पिछले तक़रीबन 5 सालों से एक साथ काम कर रहे हैं. गौरतलब है कि पिछले दो सालों में जम्मू, कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, दिल्ली और मुंबई समेत  देश के अलग अलग हिस्सों से तक़रीबन 2 हज़ार किलो से ज्यादा की हेरोइन ज़ब्त की गयी है, जिसकी अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में क़ीमत 3 हज़ार करोड़ से ज्यादा बताई जा रही है. इनमें से अधिकतर मामलों में अफ़ग़ानिस्तानी स्मगलर्स की भूमिका पायी गयी.

सूत्रों का दावा है कि ख़ुफ़िया एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर गृह मंत्रालय ड्रग्स के इन इंटरनेशनल सरगनाओं की जोड़ी से निपटने के लिए रणनीति भी तैयार कर रहा है. इतना ही नहीं नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के डीजी राकेश अस्थाना की अगुवाई में एक जॉइंट कोऑर्डिनेशन कमिटी भी गठित की गयी है ताकि ड्रग्स तस्करी के बढ़ते मामलों पर लगाम लगायी जा सके.