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Shaheen Shahid: जैश-ए-मोहम्मद की टॉप कमांडर थी महिला डॉक्टर शाहीन, कोड नेम 'मैडम सर्जन', 'ऑपरेशन हमदर्द' को देने वाली थी अंजाम, टीम D का खुला राज

Shaheen Shahid Code Name madam surgeon: जैश-ए-मोहम्मद की टॉप कमांडर शाहीन उर्फ मैडम सर्जन यूपी ATS की रडार पर है. ऑपरेशन हमदर्द से गरीब, महत्वाकांक्षी और कट्टर मुस्लिम लड़कियों-महिलाओं को पैसे, लग्जरी और जिहाद के लालच देकर आतंक की दुनिया में धकेला जा रहा था. टीम D के डॉक्टर साथी कोड वर्ड्स जैसे हार्ट स्पेशलिस्ट, मेडिसिन स्टॉक से बात करते थे. जानें सभी खुलासे.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार-एआई)
प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार-एआई)

Doctor Shaheen Shahid: भारत की खुफिया एजेंसियों ने जबसे लखनऊ की रहने वाली डॉ. शाहीन शाहिद को गिरफ्तार किया है. अब रोज बहुत हैरान करने वाले खुलासे हो रहे हैं. अब एक ऐसी ही साजिश का पर्दाफाश हुआ है, जिसे किसी के भी सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे. यह प्लान था जैश-ए-मोहम्मद. जिसे अब भारतीय खुफिया एजेंसियों ने डिकोड किया है. जानते हैं पूरी कहानी.

शाहीन शाहिद का कोड नाम 'मैडम सर्जन' 
लखनऊ की डॉक्टर शाहीन शाहिद जो जैश-ए-मोहम्मद की महिलाओं की विंग 'जमात-उल-मोमिनात' की इंडिया हेड थीं, उन्हें फरीदाबाद से गिरफ्तार किया गया था. अब जांच में खुलासा हुआ है कि शाहीन को  'मैडम सर्जन' कहा जाता था. सूत्रों के मुताबिक, जैश ए मोहम्मद ने शाहीन को मैडम सर्जन को कोड नाम दिया था. शाहीन से इस ऑपेरशन में जुड़े सभी साथी और जैश ए मोहम्मद से जुड़े आतंकी शाहीन को मैडम सर्जन कह कर बुलाते थे. बताया जा रहा है कि ऑपेरशन हमदर्द को अंजाम देने में जुटी थी जैश ए मोहम्मद की मैडम सर्जन. एक तरह से कहा जाए तो शाहीन ऑपरेशन हमदर्द की मास्टरमाइंड थी.

ऑपरेशन हमदर्द क्या था? तीन कैटेगरी में बांटा प्लान
ऑपरेशन हमदर्द सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन ये आतंक का हथियार था. जैश ने युवा मुस्लिम लड़कियों और महिलाओं से हमदर्दी दिखाकर उन्हें दहशतगर्द बनाने का प्लान बनाया था. इसे तीन हिस्सों में बांटा गया था. 
ऑपरेशन हमदर्द में थी तीन कैटेगरी
पहली कैटेगरी
: पहली केटेगरी में उन मुस्लिम लड़कियों और महिलाओं को रखा गया था जो आर्थिक रूप से बहुत कमजोर थी. जिन्हें पैसे का लालच देकर दहशतगर्दी के रास्ते पर लाने की प्लानिंग थी.
दूसरी कैटेगरी: दूसरी कैटेगरी में उन मुस्लिम लड़कियों और महिलाओं को रखा गया था जो आम तौर पर बुर्का नही पहनती थी. और उनकी ख्वाहिश बहुत बड़ी बड़ी थी. उनको विदेश ले जाने का और  ख्वाब दिखाने का प्लान था. ऐसो आराम की जिंदगी दिलाने का वादा करने की योजना थी.
तीसरी कैटेगरी: तीसरी कैटेगरी में उन मुस्लिम लड़कियों और महिलाओं को रखा जाना था. जो विचारों से कट्टरपंथी थी और आराम से जिहाद के रास्ते पर आ जाती. ये प्लान शाहीन की टीम चलाती थी, ताकि आतंकी नेटवर्क मजबूत हो.

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टीम D का राज: डॉक्टरों की गैंग और कोड वर्ड्स
यूपी ATS की रडार पर अब शाहीन की 'टीम D' है. ये टीम डॉक्टरों की थी, Team d में मौजूद थे शाहीन के डॉक्टर साथी. जो जैश को संदेश भेजते तो उसमें भी कोड नेम चलता.  चैटबॉक्स में कोड वर्ड्स इस्तेमाल होते थे जैसे आतंकी को 'स्पेशलिस्ट' कहते, जैसे हार्ट स्पेशलिस्ट, आई स्पेशलिस्ट या फिजिशियन. पैसे जुटाने को 'ऑपरेशन की तैयारी' बोलते.   छोटे हथियारों को 'मेडिसिन स्टॉक'.   रेकी वाली जगह को 'ऑपरेशन थिएटर'.

टीम D के हर मेंबर का काम बंटा था
टीम D के हर मेंबर को अलग काम था, कोई फंडिंग, कोई हथियार, कोई टारगेट सर्च करने का. जैश के टॉप कमांडर से डायरेक्ट संपर्क में थी टीम D था.

ATS की जांच में क्या मिला? आगे क्या होगा?
ATS ने शाहीन के फोन और चैट्स से टीम D को डिकोड कर लिया है, ऑपरेशन हमदर्द से सैकड़ों लड़कियां खतरे में थीं. अब ATS पूछताछ कर रही है, गिरफ्तारियां हो सकती हैं. 

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krishna pandey

कृष्णा पांडेय, ज़ी न्यूज़ डिजिटल में चीफ सब-एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. वह राजनीति, अंतरराष्ट्रीय मामलों, क्राइम, और फीचर जैसे कई बीट्स पर काम करते हैं. इनकी खासियत है इन-डेप्थ एक्सप्लेनर और संवे...और पढ़ें

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