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प्रदूषण की मार झेल रही दिल्ली में काटे जाएंगे 17 हजार पेड़

बीते 13 जून को पीएम 10 का स्तर दिल्ली-एनसीआर में 778 और दिल्ली में 824 पर पहुंच गया था जिससे शहर की आबोहवा पूरी तरह से दूषित हो गई थी.

प्रदूषण की मार झेल रही दिल्ली में काटे जाएंगे 17 हजार पेड़

नई दिल्ली: प्रदूषण की मार झेल रही दिल्ली में 17 हजर पेड़ काटे जाएंगे और ये सब दक्षिणी दिल्ली में केंद्र सरकार के आवासों के पुनर्विकास के लिए होगा. वन विभाग के एक अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि नौरोजी नगर, नेताजी नगर और सरोजिनी नगर समेत विभिन्न इलाकों में पेड़ काटे जाएंगे. अधिकारी ने बताया कि केवल सरोजिनी नगर में ही करीब 11 हजार पेड़ काटे जाएंगे. 

गौरतलब है कि बीते 13 जून को पीएम 10 का स्तर दिल्ली-एनसीआर में 778 और दिल्ली में 824 पर पहुंच गया था जिससे शहर की आबोहवा पूरी तरह से दूषित हो गई थी. सीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार, पीएम 2.5 (2.5 मिलीमीटर से कम मोटाई के कणों की मौजूदगी) का स्तर ‘‘बेहद खराब’’ से ‘‘खतरनाक’’ पर पहुंच गया था और बाद में वह कम होकर ‘‘बहुत खराब’’ की श्रेणी में आ गया था. दिल्ली - एनसीआर और दिल्ली में पीएम 2.5 का स्तर 16 जून को 124 मापा गया था. इसी वजह से शहर में निर्माण गतिविधियों पर भी रोक लगा दी गई थी. 

अदालत ने एजेंसियों को पेड़ों की छंटाई की पूर्ण अनुमति देने पर बीएमसी को आड़े हाथ लिया
एक अन्य घटनाक्रम में बंबई उच्च न्यायालय ने बीते 19 जून को बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) को निर्देश दिया कि कुछ निजी एवं सार्वजनिक एजेंसियों को उनके परिसर में लगे पेड़ों की छंटाई की पूर्ण अनुमति पर ‘‘पुनर्विचार’’ किया जाए. न्यायमूर्ति ए. एस. ओका और न्यायमूर्ति आर. आई. चागला की पीठ ने पूछा कि नगर निकाय संस्था ने किस आधार पर इस तरह की पूर्ण अनुमति दे दी और यह पता करने की कोशिश नहीं की गई कि ये एजेंसियां वृक्ष अधिनियम और बीएमसी के अपने नियमों के प्रावधानों का पालन कर रही हैं या नहीं.

पीठ शहर के एक पर्यावरण कार्यकर्ता जोरू भतेना द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें टाटा पॉवर, रिलायंस एनर्जी, रेलवे और भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण जैसी कुछ सार्वजनिक एवं निजी एजेंसियों को अगले तीन वर्ष के लिए उनके परिसरों में लगे पेड़ों की छंटाई की अनुमति के बीएमसी के फैसले को चुनौती दी गई थी.

बीएमसी ने पीठ से कहा कि इस तरह की अनुमति देना उसकी शक्तियों में आता है क्योंकि यह कोई पेड़ काटने की नहीं बल्कि छांटने की अनुमति है जो पेड़ों के रखरखाव के लिए जरूरी है. हालांकि पीठ ने कहा कि निजी व्यक्तियों या संस्थाओं को यह अनुमति केवल तब दी जा सकती है जब निकाय आयुक्त आश्वस्त हों कि संबंधित व्यक्ति की संपत्ति पर पेड़ों की छंटाई की जरूरत है.