close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

विदेश से लाते थे ATM क्लोनिंग डिवाइस, करोड़ों का लगाया चूना, अब हुए गिरफ्तार

टोनी के पास से दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एटीएम क्लोन करने वाली मशीन सेट, कीपैड वाला कैमरा और एक ऑटोमैटिक पिस्टल बरामद की है.

विदेश से लाते थे ATM क्लोनिंग डिवाइस, करोड़ों का लगाया चूना, अब हुए गिरफ्तार
इन लोगों के पास से तक़रीबन 30 हज़ार लोगों का बैंकिंग डेटा भी मिला है.

नई दिल्ली: एटीएम क्लोन कर लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले दो लोगों को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने टोनी डागर और जग प्रवेश को दिल्ली के नजफगढ़ से गिरफ्तार किया है. टोनी डागर दिल्ली के झोड़दा इलाके का रहने वाला है. टोनी और उसके साथी पिछले तीन-चार सालों से एटीएम क्लोन कर हज़ारों लोगों के एकाउंट्स से करोड़ों रुपये का चूना लगा चुके हैं. टोनी ने अपने गैंग का नाम टाइगर गैंग रख रखा था. बताया जा रहा है कि इस गैंग के तार सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि राजस्थान, हरियाणा, चंडीगढ़, गोवा, उत्तरप्रदेश ओर उत्तराखंड से भी जुड़े हुए हैं. 

बताया जा रहा है कि टोनी डागर के मुख्य साथी प्रवीण डागर को उत्तराखंड की पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है. जब क्राइम ब्रांच की टीम टोनी डागर को पकड़ने के लिए पहुंची, तो टोनी पुलिस की जिप्सी को टक्कर मारते हुए भाग गया. लेकिन पुलिस ने उसे पीछा कर गिरफ्तार कर लिया. हालांकि, उसके दो साथी भागने में कामयाब हो गए. पुलिस की पूछताछ में टोनी ने बताया कि वो पांचवी पास है और पिछले तीन से चार सालों से इसे अंजाम दे रहा है. इस गैंग में कुल 7 से 8 लोग शामिल हैं. इतना ही नही टोनी पांच सितारा होटलों में लैविश लाइफ भी जीता था. वहीं, उसकी 100 से भी ज्यादा गर्लफ्रैंड हैं.

 

टोनी के पास से दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एटीएम क्लोन करने वाली मशीन सेट, कीपैड वाला कैमरा और एक ऑटोमैटिक पिस्टल बरामद की है. दरअसल, इस गैंग के निशाने पर वो एटीएम मशीन होती थी, जहां पर सिक्योरिटी गार्ड तैनात नहीं होता था. ये लोग एटीएम के कीपैड के ऊपर कैमरा इंस्टॉल कर देते थे और एटीएम की स्वैप मशीन के ऊपर एटीएम स्कैनिंग मशीन लगा देते थे. इसके बाद जब कोई भी व्यक्ति वहां पर पैसे निकालता, तो उसका पासवर्ड और एटीएम की सारी डिटेल इनके ख़ुफ़िया कैमरे और स्कैनिंग मशीन में रिकार्ड हो जाती थी. जिसके बाद ये लोग कार्ड बनाने की मशीन से पहले तो नक़ली कार्ड बनाते थे. फिर लैपटॉप के ज़रिये असली कार्ड का डाटा उस नक़ली एटीएम कार्ड में फीड कर देते थे.

इसके बाद ये लोग एटीएम मशीन पर जा कर आसानी से पैसा निकाल लेते थे. ये गिरोह इतना शातिर है कि क्लोन किए एटीएम कार्ड से पैसे अक्सर रात 12 बजे से पहले और 12 बजे के बाद ही निकालते थे ताकि एक ही समय में दो अलग-अलग तारीख़ में ज़्यादा पैसे निकाल सकें. इन लोगों के पास से तक़रीबन 30 हज़ार लोगों का बैंकिंग डेटा भी मिला है. टोनी विदेशों से स्किमिंग मशीन लाता था और छोटे छोटे गैग को क्लोनिंग डिवाइस भी सप्लाई करता था.