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जानिए, आखिर क्यों हिसार के 2 बुजुर्गों ने पेंशन खर्च कर पार्कों में बना दिए 25 'कुएं'

हिसार के विजय प्रभाकर बिजली विभाग से सुपरिटेंडेंट इंजीनियर के पद से तो सतीश कपड़ा वेटरनरी डिपार्टमेंट से रिटायर है. 

जानिए, आखिर क्यों हिसार के 2 बुजुर्गों ने पेंशन खर्च कर पार्कों में बना दिए 25 'कुएं'

हिसार: एक नहीं, दो नहीं बल्कि पूरे 25 'कुएं'. जी हां, आपने बिल्कुल ठीक पढ़ा. हिसार के सरकारी विभाग से रिटायर्ड हुए 2 बुजुर्गों को अजीब शौक चढ़ा है. ये दोनों मिलकर अपने आसपास के पार्कों में 25 कुएं खुदवा चुके है. घबराइए मत, आगे की कहानी आप जानेंगे तो आप हैरान होने की बजाय हिसार के अर्बन एस्टेट के रहने वाले विजय प्रभाकर और सतीश कालड़ा की प्रशंसा ही करेंगे. हरियाणा, पंजाब सहित कई इलाकों में बारिशों का दौर चल रहा है, जलभराव की समस्या का होना आम बात है. आपके इलाके में भी बारिश से ना सिर्फ पार्क लबरेज हो जाते होंगे, साथ ही सडक़ों पर भी पानी का भराव होना आम बात है.

लेकिन हिसार में रिटायर्ड विजय प्रभाकर और सतीश कालड़ा ने एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिससे जलभराव की समस्या का समाधान तो हो ही गया है, साथ ही धरती के गर्भ में पानी भी सहेजा जाने लगा है. दरअसल, दोनों पार्कों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बना रहे है. ये हार्वेस्टिंग सिस्टम ऐसा है कि गलियों से नालियों के जरिये पानी को पार्क और फिर हार्वेस्टिंग सिस्टम में छोड़ा जाता है. 

क्या क्या हो रहे है फायदे, जानेंगे तो हैरानी होगी
हिसार के विजय प्रभाकर बिजली विभाग से सुपरिटेंडेंट इंजीनियर के पद से तो सतीश कपड़ा वेटरनरी डिपार्टमेंट से रिटायर है. दोनों हिसार में वानप्रस्थ संस्था से जुड़े है. एक रोज, बारिश के मौसम में गलियों में होने वाले जलभराव और उसके बाद पानी की वजह से होने वाले हादसों की समस्या पर सामाजिक संस्था वानप्रस्थ में चर्चा हुई. बस उसी दिन से दोनों ने ठान लिया कि कुछ ऐसा किया जाएं, जिससे जलभराव और उसके बाद होने वाले हादसो से तो छुटकारा मिलेगा ही साथ ही पानी का भी सदुपयोग भी किया जाएं. मिलकर इन्होंने ने अपने स्तर पर पार्क में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा दिया. हिसार के अर्बन एस्टेट के शाश्वत पार्क में भी ऐसा किया गया. पार्क के आसपास के गुजरने वाली गलियों को 7 छोटी छोटी नालियां बना कर पार्क से कनेक्ट कर दिया गया. 

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तकनीक का हुआ इस्तेमाल
ये वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बड़े ही तकनीकी ढंग से बनाएं गए है. पहले कुआं खुदवाया गया, उसके बाद बड़ी प्लास्टिक पाइप को इसके अंदर लगवाया गया है. साथ ही आपको बता दें कि गंदा पानी धरती में ना जा सके इसके लिए बजरी इत्यादि डालकर फिल्टर भी बनाया गया. यह वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पूरी तरह से कवर्ड है, यानी कि कोई हादसा होने की वजह से होने का चांस ही नहीं है.

3 दिन में नहीं बल्कि कुछ घंटों में पार्क का पानी हो जाता है साफ
खासियत इनकी यह भी है कि पार्क में जो पानी पहले 3 से 4 दिन तक भरा रहता था, उसका अब कुछ ही घंटों में समाधान हो जाता है. बारिश का पानी अगर 3-4 इंच से ज्यादा पार्क में होगा तो ही वो और वेस्ट इन सिस्टम के जरिए धरती में समा आएगा ऐसा इसलिए भी किया गया है ताकि बारिश का पानी पार्क की हरियाली में भी  इस्तेमाल हो सके. बारिश में गंदगी का पानी फिल्टर हो सके बकायदा इसके लिए बजरी इत्यादि से फिल्टर भी बनाया गया है. 

निगम के मेयर ने भी की थी प्रशंसा
तकनीक को देखने के लिए हिसार नगर निगम के मेयर गौतम सरदाना भी पार्क में आएं थे. सतीश कालड़ा का कहना है कि निगम से उन्हें तकनीक सिखाने के लिए प्रेजेंटेशन देने का न्यौता भी मिला था, और वो गए भी थे. विजय प्रभाकर और सतीश कालड़ा का कहना है कि लोगों को पानी बचाने में आगे आना चाहिए, और हिसार को क्लामेट रिसाइकिल सिटी बनाने में सहयोग देना चाहिए. वहीं दोनों के इन प्रयासों के हिसार के बाशिंदे भी कायल हो गए है. 

अगला टारगेट, हिसार के आर्किटेक्ट को साथ जोड़ेंगे
हिसार के वाटर हार्वेस्टिंग किंग बने दोनों बुजुर्गो यानी विजय प्रभाकर और हरीश कालड़ा का कहना है कि अब इस अभियान के लिए वो स्कूली बच्चों को जागरूक तो करेंगे ही साथ ही हिसार के जितने भी आर्केटेक्ट है, ये उनसे भी मुलाकात करेंगे. ताकि घर का जब भी वो नक्शा बनाएं तो ऐसा बनाएं जिसमें बारिश के दौरान घर की छत्त का पानी साफ हालत में बिना फिल्टर इत्यादि लगाएं ही धरती में सहेजा जा सके. इससे पानी निकासी के साथ-साथ वाटर हावेस्टिंग में भी उनका सहयोग हो जाएगा.