यहां 30 परिवारों ने फिर से अपनाई शव को जलाकर अंतिम संस्कार करने की पद्धति

मुगल शासक औरंगजेब के शासन काल में उनके पूर्वजों पर दाह संस्कार की पद्धति को छोड़कर मृतक का शव दफनाने की परंपरा अपनाने का दबाव बनाया गया था.

यहां 30 परिवारों ने फिर से अपनाई शव को जलाकर अंतिम संस्कार करने की पद्धति
प्रतीकात्मक फोटो

हिसार: हरियाणा (Haryana) के हिसार जिले में रहने वाले एक विशेष जाति के 30 परिवार अब अपने परिजनों का अंतिम संस्कार दफनाकर करने की बजाय हिंदू संस्कृति के मुताबिक अग्नि देकर किया करेंगे. हिसार से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित उकलाना के बिठमड़ा गांव में एक विशेष जाति से संबंध रखने वाली बुजुर्ग महिला फुल्ली देवी का दाह संस्कार हिंदू मान्यता के अनुसार अग्नि देकर किया गया. 

मृतक महिला के बेटे सतबीर सिंह का कहना है कि मुगल शासक औरंगजेब के शासन काल में उनके पूर्वजों पर दाह संस्कार की पद्धति को छोड़कर मृतक का शव दफनाने की परंपरा अपनाने का दबाव बनाया गया था, जिसके चलते वो तभी से अपने परिजनों का अंतिम संस्कार दफनाकर करने लगे थे. लेकिन उनकी आस्था हिंदू धर्म में ही रही है. गांव के लोग भी मेरी मां की अंतिम संस्कार यात्रा में शामिल हुए.

गौरतलब है कि अब बिठमड़ा गांव के 30 परिवारों ने भी ऐसा ही फैसला किया है. मृतक महिला के भतीजे मजीर ने कहा कि भविष्य में वो अब हिंदू रीति रिवाज के अनुसार ही दाह संस्कार करेंगे. परिवार के लोगों ने ये भी बताया कि उन्होंने बिना किसी दबाव के ऐसा किया है.

वहीं इन विशेष जाति के लोगों द्वारा ऐसा फैसला लिए जाने पर गांव में रहने वाले अन्य हिन्दुओं ने भी उनका स्वागत किया. बिठमड़ा गांव में ही रहने वाले सतीश पातड़ का कहना है कि उनके भाईयों ने घर वापसी की है.

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अगर इस विशेष जाति की बात करें तो इन लोगों द्वारा बताया गया कि उनकी जाति के ज्यादातर लोग मुस्लिम प्रक्रिया के तहत कार्य करते थे. हालांकि जब सरकारी कागजात बनवाते हैं तो वो डॉक्यूमेंट में धर्म के कॉलम में हिंदू ही लिखते हैं.

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