आप प्रत्याशी ने लगाया आरोप, गूंज रहा नारा 'मीनाक्षी लेखी कभी नहीं देखी'

हाई प्रोफाइल नई दिल्ली संसदीय सीट पर भाजपा की मीनाक्षी लेखी और कांग्रेस प्रत्याशी एवं पूर्व मंत्री अजय माकन के साथ आप प्रत्याशी बृजेश गोयल का त्रिकोणीय मुकाबला है.

आप प्रत्याशी ने लगाया आरोप, गूंज रहा नारा 'मीनाक्षी लेखी कभी नहीं देखी'
मीनाक्षी लेखी की फाइल फोटो.

नई दिल्ली: आप प्रत्याशी बृजेश गोयल ने आरोप लगाया कि नयी दिल्ली संसदीय क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी तक पहुंच नहीं होने और उनके हमेशा अनुपलब्ध रहने के कारण ही 'मीनाक्षी लेखी कभी नहीं देखी' का नारा गूंज रहा है. हाई प्रोफाइल नई दिल्ली संसदीय सीट पर भाजपा की मीनाक्षी लेखी और कांग्रेस प्रत्याशी एवं पूर्व मंत्री अजय माकन के साथ गोयल का त्रिकोणीय मुकाबला है.

ये चुनाव लेखी के खिलाफ
गोयल ने बताया कि आज मतदाता देख रहा है कि कौन सुलभ है, पहुंच में आने योग्य है और उपलब्ध है और यह लेखी के खिलाफ जा रहा है. उन्होंने कहा कि मैंने अपने संसदीय क्षेत्र के 70 प्रतिशत इलाके का दौरा किया है. उनके बीच में होना ही मेरी ताकत है. मेरा मजबूत मुद्दा है कि मैं अपने मतदाताओं से मिल रहा हूं और यह मीनाक्षी लेखी के खिलाफ जा रहा है. 

लोगों से नहीं मिलती मीनाक्षी लेखी
उन्होंने दावा किया कि उनके लोगों से नहीं मिलने और अनुपलब्ध रहने के कारण मतदाताओं ने ‘मीनाक्षी लेखी कभी नहीं देखी’ का नारा बुलंद किया है और यह इस संसदीय क्षेत्र में सरकार विरोधी रूझान का मुख्य कारण है. उन्होंने बताया कि पिछले छह महीने में जब कभी मैं अपने संसदीय क्षेत्र आया तो 'मीनाक्षी लेखी कभी नहीं देखी' नारे के साथ एक बहुत मजबूत सरकार विरोधी रूझान देखने को मिला. सीलिंग को लेकर लेखी ने लोगों से कहा 'मैं क्या कर सकती हूं' और उनके इस बयान को लेकर लोग बहुत गुस्से में हैं.

 

कांग्रेस पर साधा निशाना
पेशे से व्यापारी गोयल ने कहा कि यह अच्छा है कि कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं हुआ क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में वह ‘प्रतिस्पर्धा’ में भी नहीं है. उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस को 10 प्रतिशत से कम वोट मिलेगा और यह एक अच्छी बात है कि राष्ट्रीय राजधानी में इसके साथ हमारा गठबंधन नहीं हुआ. गोयल ने बताया कि उनके संसदीय क्षेत्र में दुकानों की सीलिंग एक बड़ा मुद्दा है. 

12 मई को होगा मतदान
नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र एक हाई प्रोफाइल सीट है जहां कुल 1,490,147 मतदाता हैं. यहां कई सारे सरकारी कार्यालय हैं और यहां किसी जाति या समुदाय विशेष का दबदबा नहीं है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 12 मई को लोकसभा चुनाव के लिए मतदान होना है.