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आप-LG विवाद: दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने की सुमित्रा महाजन से शिकायत

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने आरोप लगाया है कि कानून की शक्ति पर उपराज्यपाल अतिक्रमण कर रहे हैं जिन्होंने अपने आदेश से लोकतंत्र की 'हत्या' कर दी है. 

आप-LG विवाद: दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने की सुमित्रा महाजन से शिकायत
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: आरक्षित विषयों पर सवाल स्वीकार न करने के परामर्श वाले उपराज्यपाल अनिल बैजल के पत्र से नाराज दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से शिकायत की है और आरोप लगाया है कि कानून की शक्ति पर उपराज्यपाल अतिक्रमण कर रहे हैं जिन्होंने अपने आदेश से लोकतंत्र की 'हत्या' कर दी है.  यह उल्लेख करते हुए कि वह भी मुद्दे पर कानूनी विकल्प ढूंढ़ रहे हैं , गोयल ने महाजन को लिखे अपने पत्र में मांग की है कि उपराज्यपाल का पत्र तत्काल वापस लिया जाना चाहिए. 

पिछले महीने कानून मंत्रालय ने उपराज्यपाल कार्यालय को परामर्श दिया था कि वह दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखें कि उन्हें सार्वजनिक व्यवस्था , पुलिस , सेवा और भूमि जैसे आरक्षित विषयों पर सवाल स्वीकार नहीं करने चाहिए. 

गोयल ने लिखा लोकसभा अध्यक्ष को पत्र
गोयल ने कहा, 'मैंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर विधानसभा सचिवालय को उपराज्यपाल द्वारा भेजे गए इस पत्र के बारे में शिकायत की है कि विधानसभा अध्यक्ष आरक्षित मुद्दों पर सवाल स्वीकार नहीं कर सकते हैं. ’’ उन्होंने कहा , ‘‘ पत्र में मैंने लोकसभा अध्यक्ष को बताया है कि उपराज्यपाल ने यह आदेश जारी कर लोकतंत्र की हत्या कर दी है.' नाराज गोयल ने जानना चाहा कि आरक्षित विषयों पर विधायक सवाल क्यों नहीं पूछ सकते. 

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा , 'यदि किसी लड़की से बलात्कार होता है तो क्या कोई विधायक सवाल नहीं पूछ सकता ? कोई व्यक्ति ( आरक्षित मुद्दों पर ) आरटीआई के जरिए सवाल पूछ सकता है , लेकिन विधायक सवाल नहीं पूछ सकते. '

बजट सत्र के दौरान आप विधायकों ने बांधी थीं पट्टियां
विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गोयल , उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया , कैबिनेट मंत्रियों और आप विधायकों ने केंद्र के कदम के खिलाफ काली पट्टियां बांधी थीं. गोयल ने कहा था कि केंद्र सरकार ने निर्देश देकर दिल्ली विधानसभा का 'अपमान' किया है. गोयल ने 28 मार्च को सदन को सूचित करते हुए कहा था कि 40 सवालों में से 17 सवालों के जवाब सदन को नहीं मिले हैं क्योंकि संबंधित विभागों ने ‘‘ आरक्षित विषयों ’’ पर जवाब देने से इनकार कर दिया है.  

उन्होंने कहा था , ‘‘ यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कानून मंत्रालय ने इस तरह के निर्देश जारी किए हैं. आजाद भारत के इतिहास में यह काफी खतरनाक है. केंद्र का कदम अत्यंत निन्दनीय है ... विरोध के रूप में मैं काली पट्टी बांधकर बैठना चाहता हूं. ’’