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एसीबी प्रमुख मीणा को नहीं मिला सेवा मुक्ति आदेश, 1 अप्रैल को होगा फैसला

उपराज्यपाल की ओर से नियुक्त भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) के प्रमुख एमके मीणा को सेवा मुक्त नहीं किया गया और इस फैसले को 01 अप्रैल तक के लिए टाल दिया गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पिछले महीने उनका स्थानांतरण आदेश जारी किया था। आम आदमी पार्टी की सरकार मीणा पर भ्रष्टाचार रोकने में असफल रहने का आरोप लगाती रही है। 17 फरवरी को दिल्ली पुलिस के 13 वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उनका भी स्थानांतरण कर दिया गया था। एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि मीणा 1989 बैच के एजीएमयूटी कैडर के अधिकारी हैं। 

नई दिल्ली : उपराज्यपाल की ओर से नियुक्त भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) के प्रमुख एमके मीणा को सेवा मुक्त नहीं किया गया और इस फैसले को 01 अप्रैल तक के लिए टाल दिया गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पिछले महीने उनका स्थानांतरण आदेश जारी किया था। आम आदमी पार्टी की सरकार मीणा पर भ्रष्टाचार रोकने में असफल रहने का आरोप लगाती रही है। 17 फरवरी को दिल्ली पुलिस के 13 वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उनका भी स्थानांतरण कर दिया गया था। एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि मीणा 1989 बैच के एजीएमयूटी कैडर के अधिकारी हैं। 

01 अप्रैल को होगा अंतिम फैसला

23 मार्च को जारी की गई सेवा मुक्ति आदेश में उनके साथ ही एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी श्वेता चौहान का नाम भी नहीं है। सूत्र ने बताया कि मीणा की तैनाती पर अंतिम फैसला 01 अप्रैल को किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पिछले तीन सालों में मीणा को अरूणाचल प्रदेश और अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में स्थानांतरित किया जाना था लेकिन दोनों मामलों में आदेश रद्द कर दिया गया। वर्तमान नियमों के अनुसार, एजीएमयूटी कैडर के किसी अधिकारी को कम से कम तीन 'हार्ड' तैनाती पर जाना होता है जिसके अंतर्गत अरूणाचल प्रदेश, मिजोरम और अंडमान और निकोबार जैसी जगहों में सेवाएं देनी पड़ती है।