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दिल्ली: कैप्टन पुरी की मौत की गुत्थी और उलझी, पुलिस अभी भी खोज रही है सुराग

कैप्टन दिवाकर पुरी का शव नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से तक़रीबन 2 किलोमीटर दूर रेलवे ट्रैक पर मिला था. 

दिल्ली: कैप्टन पुरी की मौत की गुत्थी और उलझी, पुलिस अभी भी खोज रही है सुराग
कैप्टन दिवाकर पुरी के मामा गिरीश नाथ ने कहा कि दिवाकर बेहद ख़ुश था क्योंकि मंगलवार को उसके छोटे भाई का जन्मदिन था.

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस के लिए कैप्टन पुरी की मौत की गुत्थी उलझती जा रही है. वहीं, परिवार लगातार इसके पीछे साज़िश की आशंका जता रहा है. नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से उतरने से लेकर जिस जगह लाश मिली, वहां तक के समय मे 6 घंटे का गैप है. 6 घंटे के दौरान कैप्टन पुरी कहां थे, इन सवालों के बीच पुलिस की तफ्तीश जारी है. 

कैप्टन दिवाकर पुरी का शव नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से तक़रीबन 2 किलोमीटर दूर रेलवे ट्रैक पर मिला था. कैप्टन दिवाकर पुरी भारतीय सेना की मेडिकल यूनिट में पोस्टेड थे. AIIMS में Doctor के कोर्स के लिए दिवाकर का चयन हुआ था. लेकिन देश के लिए कुछ कर गुज़रने का जज़्बा दिवाकर को सेना की तरफ़ ले गया. जब दिवाकर का चयन हुआ तो देशभर में दिवाकर की 5वीं रैंक आई थी. दिवाकर अपनी 7 हफ़्तों की ट्रेनिंग के बाद लखनऊ से दिल्ली शताब्दी ट्रेन से आए थे और सुबह क़रीब 11 बजकर 20 मिनट पर सेना के कैप्टन का शव रेलवे ट्रैक पर कटा मिला. पुलिस शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या का केस मान रही है. लेकिन, परिवारवालों का कहना है कि दिवाकर घर और ऑफ़िस की तरफ से किसी भी तनाव में नहीं था.

 

कैप्टन दिवाकर पुरी के मामा गिरीश नाथ ने कहा कि दिवाकर बेहद ख़ुश था क्योंकि मंगलवार को उसके छोटे भाई का जन्मदिन था. दिवाकर के घर आने की ख़ुशी में कैप्टन बेटे की राह देख रही मां ने घर में कीर्तन भी रखा था. लेकिन उस मां को क्या पता था कि उसके बेटे का शव दो हिस्सों में घर पहुंचेगा. परिवार वालो का कहना है कि इस पूरे मामले के पीछे कोई साज़िश है. वहीं रेलवे के डीसीपी डीके गुप्ता का कहना है कि 25 से 27 जुलाई को दिवाकर लखनऊ के बेस अस्पताल में भर्ती थे. स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है.

रेलवे ट्रैक पर मिली सेना के कैप्टन की लाश से कई तरह के सवाल उठते हैं. पहला तो ये कि जब दिवाकर को घर और ऑफ़िस की तरफ़ से कोई तनाव नहीं था, तो वो आत्महत्या क्यों करेगा. दूसरा ये कि अगर दिवाकर को आत्महत्या ही करनी थी तो, वो अपना सामान ट्रेन में ही छोड़कर नई दिल्ली स्टेशन से तक़रीबन 2 किलोमीटर दूर क्यों गए. तीसरा ये कि जब दिवाकर ट्रेन से सुबह 4:45 बजे ही उतर गए थे तो तक़रीबन 6 घंटे से ज़्यादा समय तक वो कहां थे, क्योंकि कैप्टन की लाश 11 बजकर 20 मिनट पर पुलिस को मिली है.