"Tik Tok" एप पर जारी रहेगा बैन! सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई सोमवार को

मद्रास हाईकोर्ट के बैन के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए थे कि देश में "टिक टॉक" एप के डाउनलोड पर प्रतिबंध लगाया जाए क्योंकि यह अश्लील कंटेट का प्रसार कर रही है.

"Tik Tok" एप पर जारी रहेगा बैन! सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई सोमवार को

नई दि‍ल्‍ली: "टिक टॉक" एप पर बैन के मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई होगी. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था. दरअसल, मद्रास हाईकोर्ट के बैन के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए थे कि देश में "टिक टॉक" एप के डाउनलोड पर प्रतिबंध लगाया जाए क्योंकि यह अश्लील कंटेट का प्रसार कर रही है.

कोर्ट ने मीडिया को भी आदेश दिया था कि वो इस एप से बने वीडियोज का प्रसारण ना करे. हाईकोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने गूगल को चिट्ठी लिखकर एप पर रोक लगाने को कहा था. सरकार के आदेश पर गूगल ने प्ले स्टोर से टिक टॉक एप को हटा दिया था.

आपको बता दें कि "टिक टॉक" एप की मदद से यूजर्स छोटे वीडियो बना और शेयर कर सकते हैं वो भी स्पेशल इफेक्ट्स के साथ, भारत में इसके हर महीने 54 मिलियन एक्टिव यूजर्स होते हैं."टिक टॉक" एप के खिलाफ मदुरै के वरिष्ठ वकील और समाजसेवी मुथु कुमार ने याचिका दाखिल कर इस पर अश्लील सामग्री का प्रसार करने का आरोप लगाते हुए प्रतिबंध की मांग की थी. उन्होंने अपनी याचिका में यह भी आरोप लगाया था कि इस ऐप की वजह से बाल उत्पीड़न, आत्महत्या, सांस्कृतिक पतन हो रहा है.

कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि जो बच्चे इस एप को यूज कर रहे हैं वो तेजी से अश्लील कंटेंट से प्रभावित हो रहे हैं. जस्टिस एन कीरुबाकरन और एसएस सुंदर ने एप को बैन करने के आदेश जारी करते हुए केंद्र सरकार को 16 अप्रैल से पहले जवाब देने के लिए कहा था. वहीं टिक टॉक एप के प्रवक्ता ने कहा था कि वो लोग कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रहे हैं, हम स्थानीय कानून के पालन को लेकर प्रतिबद्ध हैं. कोर्ट ने इससे पहले अपने फैसले में कहा था कि इस एप के खतरनाक पहलु यह है कि इसकी वजह से बच्चे बेहद आसानी से किसी भी अनजान शख्स के संपर्क में आ सकते हैं.